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फर्जी बैंक गारंटी जारी करने के मामले में ईडी की छापेमारी, जांच के दायरे में अनिल अंबानी की कंपनी

नयी दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कारोबारी समूहों के लिए ‘फर्जी’ बैंक गारंटी जारी करने का रैकेट चलाने की आरोपी ओडिशा की एक कंपनी के खिलाफ शुक्रवार को छापेमारी की। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। कंपनी पर रिलायंस ग्रुप की एक कंपनी के लिए भी इस तरह की 68 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जारी करने का आरोप है।

भुवनेश्वर में स्थित कंपनी ‘बिस्वाल ट्रेडंिलक’ और इसके निदेशकों को खिलाफ धनशोधन का मामला दर्ज किया गया था। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज ईडी का मामला, दिल्ली पुलिस आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की नवंबर, 2024 की प्राथमिकी से संबंधित है।

सूत्रों ने बताया कि ईडी ने शुक्रवार को कंपनी के भुवनेश्वर में स्थित तीन परिसरों और कोलकाता में स्थित एक सहयोगी कंपनी के खिलाफ छापेमारी की। एजेंसी के सूत्रों ने आरोप लगाया कि कंपनी आठ प्रतिशत कमीशन पर ह्लफर्जीह्व बैंक गारंटी जारी करने की गतिविधि में लिप्त थी।

सूत्रों ने बताया कि ‘रिलायंस एनयू बीईएसएस लिमिटेड’ (रिलायंस पावर की सहायक कंपनी)/महाराष्ट्र एनर्जी जेनरेशन लिमिटेड की ओर से सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन आॅफ इंडिया लिमिटेड (एसईसीआई) को सौंपी गई 68.2 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी “फर्जी” पाई गई।

कंपनी पहले महाराष्ट्र ऊर्जा उत्पादन लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी। उन्होंने बताया कि ईडी ने पिछले सप्ताह मुंबई में अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह की कंपनियों के खिलाफ छापेमारी के दौरान इस लेनदेन से संबंधित कुछ दस्तावेज जब्त किए थे।

सूत्रों ने बताया कि कई कंपनियों के साथ संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता चला है और इसकी जांच की जा रही है।
रिलायंस समूह के एक प्रवक्ता ने कहा कि रिलायंस पावर इस मामले में “धोखाधड़ी और जालसाजी की साजिश का शिकार” रही है और उसने 7 नवंबर, 2024 को विभिन्न स्टॉक एक्सचेंज में इस संबंध में उचित सूचनाएं दी थीं।

प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने अक्टूबर, 2024 में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में तीसरे पक्ष (आरोपी कंपनी) के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी और कानून की “उचित प्रक्रिया” का पालन किया जाएगा।

सूत्रों ने कहा कि कई कंपनियों के साथ इसी तरह के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता चला है और इसकी जांच की जा रही है। पता चला है कि ओडिशा स्थित कंपनी मूल ईमेल डोमेन की जगह दूसरे ईमेल डोमेन का उपयोग कर रही थी ताकि यह दिखावा किया जा सके कि यह संदेश देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा भेजा जा रहा है।

सूत्रों ने बताया कि फर्जी डोमेन का इस्तेमाल एसबीआई बनकर एसईसीआई को “जाली” संचार भेजने के लिए किया गया था। पता चला है कि ईडी ने नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज आॅफ इंडिया (एनआईएक्सआई) को पत्र लिखकर फर्जी ईमेल डोमेन के डोमेन पंजीकरण का विवरण मांगा है।

सूत्रों के अनुसार, ईडी की प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि ओडिशा की इस कंपनी ने कमीशन के लिए “फर्जी” बिल भी जारी किए और कई “अघोषित” बैंक खातों का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि इन बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन किए गए।

सूत्रों ने बताया कि ओडिशा की यह कंपनी “मात्र एक कागजी संस्था” है क्योंकि इसका पंजीकृत कार्यालय एक व्यक्ति की आवासीय संपत्ति है और तलाशी के दौरान उस पते पर कंपनी का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

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