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ऑपरेशन सिंदूर रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का प्रमाण है: डीआरडीओ प्रमुख

युद्ध में लक्ष्य प्राप्त करना और इसे समाप्त करना बहुत महत्वपूर्ण: वायुसेना प्रमुख

पुणे/बेंगलुरु. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अध्यक्ष समीर कामत ने शनिवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ आत्मनिर्भरता, रणनीतिक दूरर्दिशता और स्वदेशी प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत की ताकत का उद्घोष है. कामत ने यहां डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (डीआईएटी) के 14वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिमी सीमाओं पर अत्यंत समन्वित एवं बहुआयामी अभियान ने न केवल सैनिकों के साहस को प्रर्दिशत किया, बल्कि उस प्रौद्योगिकी को भी रेखांकित किया, जिसने उनका समर्थन किया.

उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद उन्हें उम्मीद है कि अगले दो से तीन वर्षों में भारत का रक्षा निर्यात दोगुना हो जाएगा. उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक मिशन से कहीं अधिक था और यह आत्मनिर्भरता, रणनीतिक दूरर्दिशता और स्वदेशी प्रौद्योगिकी में भारत की ताकत को प्रर्दिशत करता है. कामत ने कहा कि यह अभियान दुनिया के लिए एक संदेश था कि भारत अपनी सीमाओं की रक्षा स्वदेशी तकनीक के माध्यम से करने की क्षमता रखता है..

डीआरडीओ प्रमुख ने कहा कि सेंसर, ड्रोन और सुरक्षित संचार से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निर्णय लेने में सहायक प्रणाली और सटीक हथियारों तक, स्वदेशी संसाधनों ने अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि अभियान के लिए तैनात प्रणालियों में ‘आकाश’ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, ‘ब्रह्मोस’ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, डी4 एंटी-ड्रोन सिस्टम, एडब्ल्यूएनसी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम और आकाशतीर प्रणाली शामिल हैं. उन्होंने कहा कि ये सभी भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास तंत्र द्वारा विकसित की गई हैं.

पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने सात मई को पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था. कामत ने कहा, “हम अब एक ऐसे युग में प्रवेश कर रहे हैं जहां युद्ध की परिभाषा तेज.ी से विस्तृत हो रही है. युद्ध अब सीमाओं या अग्रिम मोर्चों तक सीमित नहीं रह गए हैं. वे विभिन्न क्षेत्रों में लड़े जाते हैं – भूमि, वायु, समुद्र, अंतरिक्ष, साइबरस्पेस और यहां तक कि विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम में भी.” बाद में पत्रकारों से बात करते हुए कामत ने कहा कि सुखोई एसयू-30एमकेआई लड़ाकू विमानों से इस्तेमाल किया जाने वाला ब्रह्मोस, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान प्राथमिक हथियार था.

उन्होंने कहा, “रक्षात्मक हथियार प्रणालियों की बात करें तो आकाश प्रणाली, डी4 ड्रोन रोधी प्रणाली और मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एमआरएसएएम) का इस्तेमाल किया गया. हमने जो भी सेंसर तैनात किए थे, वे सभी ‘अकाशतीर’ नामक एक एआई-आधारित प्रणाली से जुड़े हुए थे, जो खतरों की पहचान करने में मदद करती थी और फिर उन्हें नि्क्रिरय करने के लिए उपयुक्त प्रकार का हथियार तैनात करती थी.” कामत ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा उपयोग किये जाने वाले रडारों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया.

डीआरडीओ प्रमुख ने कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए, हमारी अपनी क्षमताएं होना अत्यंत आवश्यक है और तभी देश संप्रभु निर्णय ले सकता है. कामत ने कहा कि दक्षिण पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के देश भारत से हथियार आयात कर रहे हैं. ब्रह्मोस-एनजी (नेक्स्ट जेनरेशन) के बारे में उन्होंने कहा कि यह ब्रह्मोस का छोटा संस्करण है जिसे कई सैन्य संसाधनों पर लगाया जा सकता है.

उन्होंने कहा, “फ.लिहाल, ब्रह्मोस को केवल सुखोई पर ही लगाया जा सकता है, लेकिन अगर हम इसे छोटा कर दें, तो यह अन्य संसाधनों पर भी लगाया जा सकेगा. हम जल्द ही ब्रह्मोस-एनजी का विकास शुरू करने की योजना बना रहे हैं.” दीक्षांत समारोह के दौरान 298 छात्रों को डिग्रियां दी गईं. इनमें 206 एमटेक, 68 एमएससी और 24 पीएचडी के छात्र शामिल थे, जो अलग-अलग विषयों से थे. कुल 18 छात्रों को गोल्ड मेडल भी दिए गए.

युद्ध में लक्ष्य प्राप्त करना और इसे समाप्त करना बहुत महत्वपूर्ण: वायुसेना प्रमुख

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने शनिवार को कहा कि किसी युद्ध की समाप्ति बहुत महत्वपूर्ण होती है और युद्ध का अहम सिद्धांत लक्ष्य होता है जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में हासिल किया गया. उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उद्देश्य पूरा हो गया और आतंकवादियों को सबक सिखाया गया.

यहां एयर चीफ मार्शल एल एम कात्रे स्मृति व्याख्यान के 16वें संस्करण को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि उन्होंने दो सप्ताह पहले ब्रिटेन में एक सम्मेलन में भाग लिया था. प्रतिभागियों ने रूस, यूरोपीय युद्ध, इजराइल और ईरान युद्ध, या हमास-इजराइल युद्ध पर चर्चा की. हालांकि, पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमला करने के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा गया.

वायुसेना प्रमुख ने कहा, “उन्होंने इस बारे में बहुत बात की कि युद्ध कैसे शुरू किया जाए, युद्ध से कैसे बचा जाए, लेकिन इस बारे में एक बार भी बात नहीं हुई कि युद्ध को कैसे समाप्त किया जाए.” इसके अलावा, उन्होंने कहा, “इसलिए मुझे लगता है कि इस पहलू को भुला दिया जा रहा है. संघर्ष समाप्ति किसी भी संघर्ष का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है. हम लगातार युद्ध में बने रहने का जोखिम नहीं उठा सकते.” वायुसेना प्रमुख ने कहा कि जब कोई युद्ध कोई भी शुरू करे, उसे समाप्त होना चाहिए ताकि लोग अपनी दिनचर्या में वापस लौट सकें और राष्ट्र की प्रगति पर ध्यान केंद्रित कर सकें.

उन्होंने कहा, “जब मैं युवा था, तो मुझे सबसे पहला सबक जो सिखाया गया वह था – युद्ध के सिद्धांतों में से एक: लक्ष्य का चयन करना और उसे बनाए रखना.” सिंह ने कहा, “हमारा उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट था. हमारा उद्देश्य आतंकवादियों को ऐसा सबक सिखाना था कि वे कुछ भी करने से पहले दो बार सोचेंगे; अब उन्हें पता है कि उन्हें इसकी कितनी कीमत चुकानी पड़ सकती है. और एक बार जब हम ये उद्देश्य हासिल कर लें, तो हमें इसे जारी रखने के बजाय, इसे रोकने के सभी अवसर तलाशने चाहिए. उन्होंने कहा, “उस रात हमारा मनोबल बेहद ऊंचा था. मैंने कई लोगों से सुना…मेरे कुछ करीबी लोगों ने भी कहा ‘और मारना था’.”

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