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न्यायालय ने दिवाली पर दिल्ली-एनसीआर में शर्तों के साथ हरित पटाखे फोड़ने की अनुमति दी

नयी दिल्ली. दिवाली से पहले एक महत्वपूर्ण राहत देते हुए उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में हरित पटाखों की बिक्री और उनके इस्तेमाल की अनुमति दे दी. हालांकि, यह अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी गई है, जिनका उद्देश्य परंपराओं का सम्मान करते हुए पर्यावरण और जनस्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन बनाए रखना है.

न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि हरित पटाखों का उपयोग दिवाली और उससे एक दिन पहले कुछ घंटों तक ही किया जा सकेगा. हालांकि, 18 से 20 अक्टूबर को दिवाली वाले दिन तक हरित पटाखों की बिक्री की अनुमति होगी. उसने यह भी कहा कि छूट केवल ”प्रायोगिक आधार पर दी गयी है और यह केवल निर्दष्टि अवधि के लिए होगी.” भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी आर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार के संयुक्त अनुरोध और 2024 में दिल्ली सरकार द्वारा पहले लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के मद्देनजर छूट देने का अनुरोध करने वाले हरित पटाखों के विनिर्माताओं की याचिका को स्वीकार कर लिया.

अदालत ने कहा, ”गंभीर पर्यावरण प्रदूषण के परिणामस्वरूप गंभीर स्वास्थ्य खतरे पैदा होते हैं जो पटाखा उद्योग में लगे व्यक्तियों और उनके कामगारों के लिए उपलब्ध जीने के अधिकार और किसी पेशे को जारी रखने के अधिकार के खिलाफ है.” उसने कहा, ”पटाखे फोड़ना उत्सव की भावना की अभिव्यक्ति है और यह भारत के सांस्कृतिक परिवेश में अंर्तिनहित धार्मिक तथा अन्य शुभ समारोहों में उत्साह बढ.ाता है.”

सीजेआई ने 21 पन्नों के आदेश में कहा, ”हालांकि, केवल परंपराओं और सांस्कृतिक या धार्मिक मानदंडों के आधार पर अनियंत्रित उपयोग से स्वास्थ्य को दीर्घकालिक या यहां तक ??कि अल्पकालिक नुकसान पहुंचाने की स्थिति पैदा नहीं हो सकती है. हम यह दोहराए बिना नहीं रह सकते हैं कि इस न्यायालय ने पहले भी कई बार कहा है कि जब पर्यावरण और स्वास्थ्य की बात आती है तो व्यावसायिक विचारों और उत्सव की भावना को पीछे छोड़ देना चाहिए.” अस्थायी उपाय के तौर पर निर्देश देते हुए पीठ ने 2018 के अर्जुन गोपाल बनाम भारत संघ मामले के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया, जिससे हरित पटाखों की शुरुआत हुई थी.

पीठ ने कहा, ”नीरी (राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान) की वेबसाइट पर अपलोड किए गए हरित पटाखों की बिक्री 18 अक्टूबर से शुरू होगी और केवल 20 अक्टूबर तक जारी रहने की अनुमति दी जाएगी.” उसने कहा, ”जिला प्रशासन और पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि पटाखों का उपयोग दो दिन यानी दिवाली के दिन और उससे पहले सुबह छह बजे से सुबह सात बजे और रात आठ बजे से रात 10 बजे के बीच ही सीमित रहेगा.” आदेश में कहा गया है कि हरित पटाखों की बिक्री की अनुमति केवल एनसीआर में निर्दष्टि स्थानों से ही दी जाएगी, जिनकी पहचान जिला कलेक्टर द्वारा जिला पुलिस अधीक्षक के परामर्श से की जाएगी.

इसमें कहा गया है, ”हमें परस्पर विरोधी हितों को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा और पर्यावरण संबंधी चिंताओं से समझौता न करते हुए संयम बरतना होगा. ऐसा करते समय हम हरियाणा द्वारा उठाई गई चिंताओं पर भी ध्यान देते हैं.” आदेश के अनुसार, ”यह उनका तर्क है कि हरियाणा के 22 जिलों में से 14 जिले एनसीआर के अंतर्गत आते हैं. इसलिए, यह तर्क है कि राज्य का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पटाखों पर प्रतिबंध से प्रभावित है…”.

न्यायालय ने कहा कि पुलिस प्राधिकरण इस बात पर नजर रखने के लिए गश्ती टीमों का गठन करेगा कि केवल क्यूआर कोड वाले पटाखे ही बेचे जाएं. नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के लिए उल्लंघन नोटिस संलग्न किया जाएगा. उसने कहा, ”गश्ती दल विश्लेषण के उद्देश्य से यादृच्छिक नमूने भी लेंगे, जो उल्लंघन पाए जाने पर पीईएसओ (पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन) को प्रेषित किए जाएंगे, जिम्मेदारी निषिद्ध उत्पादों के निर्माण या बिक्री में शामिल लोगों से जुड़ी होगी, जिन्हें न केवल दंडित किया जाएगा बल्कि पीईएसओ या नीरी से उनका लाइसेंस/पंजीकरण भी रद्द कर दिया जाएगा.”

इसमें कहा गया है कि पटाखे केवल लाइसेंस प्राप्त व्यापारियों के माध्यम से ही बेचे जा सकते हैं, उनका निर्माण नीरी और पीईएसओ के साथ पंजीकृत व्यापारियों द्वारा किया जाना चाहिए. जब्त किए गए पटाखे, जो पंजीकृत निर्माताओं द्वारा निर्मित नहीं हैं, उन्हें जब्त कर लिया जाएगा. इसमें कहा गया है कि एनसीआर क्षेत्र में बाहर से किसी भी पटाखे को लाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

इसमें कहा गया है, ”बेरियम वाले पटाखों और नीरी द्वारा हरित पटाखों के रूप में अनुमोदित नहीं किए गए पटाखों के उपयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी और यदि ये बिक्री के लिए या व्यक्तियों/व्यापारियों के कब्जे में पाए गए, तो उन्हें जब्त कर लिया जाएगा.” पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि ई-कॉमर्स मंचों के माध्यम से पटाखों की बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के परामर्श से 14 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) की निगरानी करेगा. प्रत्येक दिन के एक्यूआई को निर्दष्टि करते हुए एक रिपोर्ट दायर की जाएगी.

इसमें कहा गया है कि पटाखों के कारण वायु प्रदूषण का मुद्दा एक दशक से अधिक समय से अदालत के समक्ष परेशानी का सबब है.
पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (नीरी) की सहायता से विकसित ये पर्यावरण-अनुकूल हरित पटाखे कथित तौर पर पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) और हानिकारक गैसों के उत्सर्जन को 30 प्रतिशत तक कम करते हैं.

पीठ ने उन आंकड़ों पर भी गौर किया कि पहले के प्रतिबंधों के बावजूद एनसीआर जिलों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में महत्वपूर्ण सुधार नहीं दिखा, सिवाय कोविड-19 लॉकडाउन अवधि के जब समग्र औद्योगिक और वाहन गतिविधि न्यूनतम थी.
उच्चतम न्यायालय ने 10 अक्टूबर को दिल्ली-एनसीआर में हरित पटाखों के निर्माण और बिक्री की अनुमति के अनुरोध वाली याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था.

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