नयी दिल्ली. बिहार और उत्तर प्रदेश समेत छह राज्यों की सात विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए बृहस्पतिवार को अपराह्न तीन बजे तक औसतन 45.60 प्रतिशत मतदान हुआ है. यह मतदान बिहार के मोकामा और गोपालगंज, महाराष्ट्र के अंधेरी (पूर्व), हरियाणा के आदमपुर, तेलंगाना के मुनूगोड़े, उत्तर प्रदेश के गोला गोकर्णनाथ और ओडिशा के धामनगर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए हो रहा है.

जिन क्षेत्रों में उपचुनाव हो रहा है, उनमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास तीन, कांग्रेस के पास दो और शिवसेना एवं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पास एक-एक सीट थी. इन उपचुनावों में भाजपा और क्षेत्रीय दलों के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है.
बिहार में उपचुनाव के लिए मुख्य मुकाबला भाजपा और राजद के बीच है. हरियाणा में भाजपा के सामने कांग्रेस, इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और आम आदमी पार्टी (आप) की मुख्य चुनौती हैं. भाजपा का मुख्य मुकाबला तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्र समिति (अब भारत राष्ट्र समिति), उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) के साथ है.

उपचुनाव में अपराह्न तीन बजे तक सबसे ज्यादा तेलंगाना के मुनूगोड़े विधानसभा क्षेत्र के 59.92 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ. वहीं आदमपुर में 55.12 प्रतिशत, धामनगर में 52.13 प्रतिशत, गोला गोकर्णनाथ में 44.05 प्रतिशत, मोकामा में 42.44 प्रतिशत, गोपालगंज में 42.65 प्रतिशत और अंधेरी (पूर्व) सीट पर 22.85 प्रतिशत मतदान हुआ.

इन उपुचनाव के नतीजों से विधानसभाओं में राजनीतिक दलों की स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन उन्होंने इसे हल्के में नहीं लिया है और आक्रामक तरीके से चुनाव प्रचार किया है. मतों की गिनती छह नवंबर को होगी. भाजपा उत्तर प्रदेश में गोला गोकर्णनाथ सीट पर अपना कब्जा कायम रखने की कोशिश कर रही है, जबकि उसने बीजद शासित ओडिशा में मौजूदा विधायक के निधन से खाली हुई धामनगर सीट पर सहानुभूति का लाभ उठाने के लिए दिवंगत विधायक के बेटे को उम्मीदवार बनाया है.

तेलंगाना की मुनूगोड़े सीट पर भाजपा और राज्य में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति ने आक्रामक तरीके से प्रचार किया है. यह सीट कांग्रेस विधायक द्वारा त्यागपत्र देने से खाली हुई थी और अब वह भाजपा के टिकट पर दोबारा चुनाव मैदान में हैं. अधिकारियों ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने बृहद पैमाने पर मतदान की तैयारी की है, जिसके तहत राज्य पुलिस के 3,366 जवानों की तैनाती के अलावा मुनूगोड़े में केंद्रीय अर्द्धसैन्य बलों की 15 कंपनी को तैनात किया गया है. सभी मतदान केंद्रों पर ‘‘वेबकास्ट’’ की व्यवस्था की गई है.

हरियाणा की आदमपुर सीट पर उपचुनाव पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के छोटे बेटे कुलदीप बिश्नोई के इस्तीफे की वजह से अनिवार्य हो गया था. कुलदीप ने इस साल अगस्त में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था और भाजपा में शामिल हो गए थे. बिश्नोई के बेटे भव्य इस सीट से भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे हैं. आदमपुर सीट 1968 से भजनलाल परिवार के पास रही है और दिवंगत मुख्यमंत्री ने नौ बार, उनकी पत्नी जस्मा देवी ने एक बार एवं कुलदीप ने चार बार इसका प्रतिनिधित्व किया है.

इस उपचुनाव में कांग्रेस, इनेलो और आप ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं. कांग्रेस ने हिसार से तीन बार सांसद और दो बार विधायक रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश को उम्मीदवार बनाया है. इनेलो ने बागी कांग्रेस नेता कुर्दा राम नंबरदार को अपना प्रत्याशी बनाया है. आप की ओर से सतेंद्र सिंह चुनाव मैदान में हैं जो भाजपा छोड़कर आप में शामिल हो गये थे. बिहार में, जनता दल (यूनाइटेड) के भाजपा से अलग होने के बाद तीन महीने से भी कम समय पहले बनी नीतीश कुमार की अगुवाई वाली ‘महागठबंधन’ सरकार के लिए राज्य में पहली चुनावी परीक्षा होगी.

बिहार विधानसभा की दो सीट-मोकामा और गोपालगंज पर राज्य में सत्ताधारी महागठबंधन में शामिल राजद और विपक्षी दल भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है. मोकामा सीट पर पहले राजद का और गोपालगंज पर भाजपा का कब्जा था. भाजपा पहली बार मोकामा सीट से चुनाव लड़ रही है, पूर्व के चुनाव में वह इस सीट को अपने सहयोगियों के लिए छोड़ती थी. भाजपा और राजद दोनों ने ही इस सीट पर बाहुबलियों की पत्नी को उम्मीदवार बनाया है.

मोकामा में भाजपा ने सोनम देवी को मैदान में उतारा है, जो एक स्थानीय बाहुबली ललन सिंह की पत्नी हैं और अनंत सिंह का विरोध करती रही हैं. वहीं, राजद ने इस सीट से अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को उम्मीदवार बनाया है. मोकामा में उपचुनाव राजद विधायक अनंत कुमार सिंह को अयोग्य ठहराए जाने के कारण कराया जा रहा है. बाहुबली से नेता बने अनंत सिंह ने मोकामा सीट पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जद(यू) के टिकट पर तीन बार, एक बार निर्दलीय और 2020 में राजद उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी.

स्थानीय बाहुबली और अनंत सिंह के विरोधी ललन सिंह की पत्नी सोनम सिंह पहली बार चुनावी मैदान में हैं. ललन सिंह को गैंगस्टर से नेता बने सूरज भान सिंह का करीबी माना जाता है, जिन्होंने वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को हराया था, जो राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार में मंत्री थे.

गोपालगंज सीट पर उपचुनाव भाजपा के चार बार के विधायक सुभाष सिंह के निधन के कारण कराया जा रहा है. इस सीट से पार्टी ने सिंह की पत्नी कुसुम देवी को चुनाव मैदान में उतारा है. गोपालगंज राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और उनकी पत्नी राबड़ी देवी का पैतृक जिला है. राजद ने मोहन प्रकाश गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है. वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने लालू प्रसाद यादव के साले साधू यादव की पत्नी इंदिरा यादव को मैदान में उतारा है.

महाराष्ट्र में मुंबई के अंधेरी (पूर्व) विधानसभा क्षेत्र के लिए उपचुनाव भाजपा उम्मीदवार के पिछले महीने मैदान से हटने के बाद महज औपचारिकता भर है. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना धड़े की उम्मीदवार ऋतुजा लटके के अब आराम से जीत दर्ज करने की उम्मीद है. उनके खिलाफ छह उम्मीदवार हैं, जिनमें से चार निर्दलीय हैं. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस ने लटके की उम्मीदवारी का समर्थन किया है.

इस साल मई में ऋतुजा लटके के पति एवं शिवसेना विधायक रमेश लटके के निधन के कारण अंधेरी (पूर्व) सीट पर उपचुनाव जरूरी हो गया था. एकनाथ ंिशदे और 39 अन्य विधायकों की बगावत से शिवसेना के दो खेमों में बंटने और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार के गिरने के बाद राज्य में यह पहला चुनाव है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर-खीरी जिले की गोला गोकर्णनाथ विधानसभा सीट छह सितंबर को भाजपा विधायक अरंिवद गिरि के दिल का दौरा पड़ने से हुए निधन के कारण रिक्त हुई थी.

बसपा और कांग्रेस ने इस उपचुनाव में अपने प्रत्याशी नहीं खड़े किए हैं. लिहाजा अब यहां भाजपा उम्मीदवार एवं दिवंगत विधायक अरंिवद गिरि के बेटे अमन गिरि और इसी सीट से पूर्व में विधायक रह चुके सपा प्रत्याशी विनय तिवारी के बीच सीधा मुकाबला होता दिख रहा है.

ओडिशा की धामनगर विधानसभा सीट पर भाजपा नेता एवं निवर्तमान विधायक बिष्णु चरण सेठी के निधन के कारण उपचुनाव कराया जा रहा है. भाजपा ने सहानुभूति के आधार पर वोट हासिल करने की कोशिश करते हुए सेठी के बेटे सूर्यवंशी सूरज को अपना उम्मीदवार बनाया है. इस उपचुनाव में पांच उम्मीदवारों के बीच टक्कर होगी, लेकिन सभी की नजरें सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) उम्मीदवार अंबाती दास और पार्टी के बागी नेता एवं निर्दलीय उम्मीदवार राजेंद्र दास के बीच मुकाबले पर टिकी हैं.

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