मुझे आयुष्मान खुराना प्रेरित करते हैं: गजराज राव

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नयी दिल्ली. ‘माजा मा’, ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’ और ‘मेड इन चाइना’ जैसी हास्य फिल्मों में बेहतरीन अभिनय के लिए जाने जाने वाले गजराव राव ने कहा कि उनके पास जब भी सामाजिक संदेश वाली किसी हल्की-फुल्की फिल्म की पटकथा आती है, तो वह अकसर सोचते हैं कि अभिनेता आयुष्मान खुराना इसे किस प्रकार देखेंगे.

राव की तरह खुराना को भी ऐसी हास्य फिल्मों के लिए जाना जाता है, जिनमें समाज के लिए कोई संदेश होता है. दोनों अभिनेताओं ने ‘बधाई हो’ और ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’ में साथ अभिनय किया है. राव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक डिजिटल साक्षात्कार में कहा, ‘‘नियमित जीवन उबाऊ हो जाता है. कलाकार को ऐसी फिल्मों में काम करना चाहिए, जो आम फिल्मों से अलग हों. मैं भाग्यशाली हूं कि ‘ब्लैक फ्राइडे’, ‘बैंडिट क्वीन’, ‘तलवार’ और ‘आमिर’ जैसी फिल्मों का प्रस्ताव मुझे मिला, लेकिन ‘बधाई हो’ में काम करने के बाद रचनात्मक व्यक्ति के रूप में आयुष्मान ने मुझे प्रेरित किया.’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं अनुभव और उम्र के मामले में भले ही उनसे (आयुष्मान से) थोड़ा वरिष्ठ हूं, लेकिन… जब भी कोई ऐसी (सामाजिक संदेश देने वाली हास्य) पटकथा मेरे पास आती है, तो मैं सोचता हूं कि आयुष्मान इसकी परिकल्पना कैसे करेंगे या वह इसके साथ क्या करेंगे.’’ अभिनेता ने जोखिम उठाने के लिए खुराना की प्रशंसा की. उन्होंने कहा, ‘‘वह आसानी से रोमांटिक कॉमेडी कर सकते हैं, लेकिन वह हर फिल्म में जोखिम मोल लेते है. वह जानते हैं कि उनकी हर फिल्म बहुत सफल नहीं होने वाली. कुछ कहानियां लोगों तक नहीं पहुंचेंगी और शायद वे उसे स्वीकार नहीं करेंगे, लेकिन वह अपना रास्ता नहीं बदल रहे.’ राव ‘थाई मसाज’ फिल्म में नजर आएंगे, जिसमें वह एक छोटे शहर में अकेले रहने वाले 70 वर्षीय व्यक्ति की भूमिका निभा रहे है.

अभिनेता ने कहा कि वह इस फिल्म में आत्माराम दुबे नाम के व्यक्ति का किरदार निभा रहे हैं, जो जीवन भर अपनी इच्छाओं को दबाने के बाद उन्हें पूरा करने के लिए थाईलैंड जाने का साहस करता है. उन्होंने कहा, ‘‘हम इस प्रकार की कहानियों पर फिल्म इसलिए बना पा रहे हैं, क्योंकि दर्शक उन्हें स्वीकार कर रहे हैं. वे इन फिल्मों को अवसर दे रहे हैं. ‘थाई मसाज’ के मामले में मुझे यह देखकर खुशी होती है कि लोग न तो इस कहानी का मजाक बना रहे हैं और न ही इस पर बात करने से बच रहे हैं.’’ राव ने कहा कि लंबे समय तक दर्शकों का मानना था कि ‘‘व्यक्ति को अपनी उम्र के अनुरूप काम करना चाहिए’’, लेकिन अब चलन बदल रहा है.