भूपेश बघेल की सरकार सुपेबेड़ा की जनता का विश्वास खो चुकी है : कोमल हुपेंडी

रायपुर। गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक अतंर्गत ग्राम सुपेबेड़ा में सत्त्ता के मोह में पीड़ित परिवारों और ग्रामवासियों से किया हुआ वादा अब कांग्रेस की भूपेश सरकार भूल गई है। इससे सुपेबेड़ा वासियों में रोष व्याप्त है।

आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ के संयोजक कोमल हुपेंडी, प्रदेशसचिव उत्त्तम जायसवाल, सह संगठन मंत्री दुर्गा झा, युथ विंग के अध्यक्ष तेजेंद्र तोड़ेकर, गरियाबंद जिला अध्यक्ष राजा ठाकुर, बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा अध्यक्ष हनीफ मेमन के साथ पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं ने ग्राम सुपेबेड़ा पहुंच कर पीड़ित व ग्रामवासियों के साथ चर्चा कर यहां उत्पन्न समस्याओं का जायजा लिया।

ग्राम वासियों ने चर्चा में आम आदमी पार्टी के पदाधिकारियों को बताया कि कांग्रेस पार्टी चुनाव से पहले तक यहां राजनीति के उद्देश्य से आती थी, लेकिन चुनाव में जीत कर सत्ता में आने के बाद यहां की जनता से विश्वासघात किया है। चुनाव से पहले कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष और वर्तमान में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सुपेबेड़ा आये थे। उन्होंने घरों-घर जाकर पीड़ितो का जायजा लिया था और ग्रामवासियों से 5 लाख रुपये मुआवजा, अस्पताल, उपचार और मृतक परिवार के सदस्य को नौकरी देने का वादा किया था। लेकिन सत्ता में आने के बाद भूपेश बघेल अपने वायदे को भूल गए और आलम यह है कि कांग्रेस की सरकार बने 2 वर्षों से ज्यादा का समय हो गया, लेकिन उन्हें सुपेबेड़ावासियों की सुध लेने की फुरसत नहीं है।

ग्रामवासियों ने कहा है कि हमें रुपये पैसे और अन्य किसी चीज़ की आवश्यकता नहीं है, हमें केवल तेल नदी से फिल्टर पानी चाहिए, जिसे भी भूपेश बघेल सरकार करने प्रयासरत नहीं दिख रही है। ग्रमीणों ने कहा कि तेल नदी से फिल्टर पानी मिलने से हमारी नस्लें सुरक्षित हो जाएगी।

आप छत्तीसगढ़ के संयोजक कोमल हुपेंडी ने सुपेबेड़ा वासियों से कहा कि वे और उनकी पार्टी सुपेबेड़ा के समस्या के समाधान के लिए हमेशा खड़ी है और इस मसले पर रायपुर में प्रमुखता से उठाएगी। हुपेंडी ने कहा कि उनकी पार्टी जल्द इस मामले में सुपेबेड़ा से रायपुर तक की यात्रा कर शासन का ध्यान सुपेबेड़ा की तरफ केंद्रित करेगी। तब अगर सरकार अगर सुपेबेड़ावासियों के हित में कोई ठोंस कदम नहीं उठाती तो आम आदमी पार्टी ठोस रणनीति बना कर सुपेबेड़ा के ग्रामवासियों के लिए लड़ाई लड़ेगी।