कांग्रेस ने राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई के फैसले की आलोचना की, अस्वीकार्य और गलत बताया

8

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय द्वारा राजीव गांधी हत्याकांड के मामले में उम्रकैद की सजÞा काट रही नलिनी श्रीहरन और आर. पी. रविचंद्रन को समय से पहले रिहा किये जाने के फैसला की आलोचना करते हुए शुक्रवार को कहा कि यह पूरी तरह अस्वीकार्य और गलत है.

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह आरोप भी लगाया कि देश की शीर्ष अदालत ने भारत की भावना के अनुरूप कार्य नहीं किया है.
उन्होंने एक बयान में कहा, \”पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी के हत्यारों को मुक्त करने का सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय पूर्णतया अस्वीकार्य और गलत है. कांग्रेस पार्टी इसकी स्पष्ट शब्दों में ंिनदा करती है और इसे पूरी तरह से अमान्य मानती है.\” रमेश ने कहा, \”यह सर्वाधिक दुर्भाग्यपूर्ण है कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर भारत की सार्वभौमिक भावनाओं के अनरूप कार्य नहीं किया है.\”

पार्टी प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने संवाददाताओं से कहा, \”एक पदासीन या पूर्व प्रधानमंत्री पर हमला एवं उसकी हत्या करना भारत की अक्षुणता, संप्रभुता और अस्तित्व पर हमला है. इस जघन्य अपराध के मामले के दोषियों को आप सामान्य मामलों की तरह प्रशासनिक कारणों से रिहा नहीं कर सकते.\” उन्होंने कहा कि ऐसा कोई संदेश नहीं जाना चाहिए कि एक पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के दोषियों को न्यायपालिका फायदा दे रही है.

उनके मुताबिक, उच्चतम न्यायालय के कई निर्णयों में कहा है कि सिर्फ कारागार में कुछ समय बिता लेना ही रिहाई का आधार नहीं हो सकता. सिंघवी ने कहा, \” उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में तमिलनाडु सरकार के रुख को प्रधानता दी है. हमारा यह मानना है कि इसमें अंतिम शब्द राज्य सरकार का नहीं उच्चतम न्यायालय का होता है.\” उन्होंने सवाल किया, \”क्या पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के दोषियों को इस तरह प्रमुखता दी जा सकती है? क्या ऐसे मामले में रिहाई का कारण दोषियों का अच्छा आचरण हो सकता है?\”

उन्होंने कहा कि अगर तमिलनाडु सरकार दोषियों के पक्ष से सहमत थी तो उच्चतम न्यायालय को केंद्र सरकार के मत को सुनना चाहिए था. सिंघवी ने कहा, \”केंद्र सरकार ने कुछ भी कहा हो, लेकिन वह राज्य सरकार के मत से असहमत थी. ऐसे में राज्य सरकार के मत को इतना ज्यादा महत्व देना कानूनी रूप से गलत है.\” उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 142 का उपयोग किया जो सिर्फ शीर्ष अदालत के लिए बना विशेष प्रावधान है. कांग्रेस नेता ने दावा किया कि न्यायालय द्वारा इस मामले में विशेष प्रावधान का इस्तेमाल किया जाना उपयुक्त नहीं है. उन्होंने कहा कि इसमें सभी कानूनों विकल्पों पर विचार किया जाएगा.

उधर, तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले लोकसभा सदस्य मणिकम टैगोर ने ट्वीट कर सवाल किया, \”आज जब उच्चतम न्यायालय में मामला आया तो केंद्र सरकार की ओर से कोई अधिवक्ता मौजूद क्यों नहीं था? क्या नरेंद्र मोदी इस अपराध का समर्थन करते हैं?मोदी जी, राष्ट्रीय सुरक्षा पर होने वाले असर का क्या? आप अपनी आंख बंद और आतंकवादियों की मदद कैसे कर सकते हैं?\” उच्चतम न्यायालय ने राजीव गांधी हत्याकांड में उम्रकैद की सजÞा काट रही नलिनी श्रीहरन और आर. पी. रविचंद्रन को समय से पहले रिहा करने का शुक्रवार को आदेश दिया. दोनों ने समय से पहले रिहाई की मांग को लेकर शीर्ष अदालत का दरवाजÞा खटखटाया था.

‘भारत जोड़ो यात्रा’ का असर पहले से ही महसूस किया जा रहा है: कांग्रेस

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चार दक्षिणी राज्यों के दौरे को लेकर कटाक्ष करते हुए शुक्रवार को कहा कि विपक्षी दल की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का असर पहले से ही महसूस किया जा रहा है, लेकिन कोई भी हरकत लोगों के साथ चलने और उनकी बातों को सुनकर उनसे बने रिश्ते की बराबरी नहीं कर सकती.

मोदी शुक्रवार से दक्षिणी राज्यों कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के दो दिवसीय दौरे पर हैं. इस दौरान वह कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे और विकास पहलों की शुरुआत करेंगे. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मोदी के दौरे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक पार्टी द्वारा निकाली जा रही ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का असर पहले से ही महसूस किया जा रहा है.

रमेश ने ट्वीट किया, ‘‘प्रधानमंत्री अब चार दक्षिण भारतीय राज्यों की दो दिवसीय यात्रा पर हैं, जहां से ‘भारत जोड़ो यात्रा’ गुजर चुकी है. कैमरा-जीवी के लिए निस्संदेह बड़े फोटो-आॅप होंगे. लेकिन कोई भी हरकत लोगों के साथ चलने और उनकी बातों को सुनकर बने जुड़ाव की बराबरी नहीं कर सकती.’’ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ सात सितंबर को कन्याकुमारी से ‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर निकले थे. यात्रा तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से होकर गुजरी है और वर्तमान में महाराष्ट्र में है.