मोरबी हादसे की विस्तृत, व्यापक जांच समय की मांग : प्रधानमंत्री मोदी

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मोरबी/नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मोरबी हादसे के बाद स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और कहा कि इस त्रासदी से संबंधित सभी पहलुओं की पहचान करने के लिए एक ‘‘विस्तृत और व्यापक’’ जांच समय की मांग है.
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान के मुताबिक, उन्होंने कहा कि जांच से मिले प्रमुख सबकों को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए.

प्रधानमंत्री को राहत अभियान और प्रभावित परिवारों को उपलब्ध कराई गई मदद के बारे में जानकारी दी गई. मोदी ने कहा कि अधिकारियों को प्रभावित परिवारों के संपर्क में रहना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दुख की इस घड़ी में उन्हें हर संभव मदद मिले. बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह मंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद थे.

इससे पहले मोदी ने दुर्घटनास्थल का दौरा किया और स्थानीय अस्पताल भी गए जहां इस हादसे में घायल हुए लोगों का उपचार किया जा रहा है. उन्होंने राहत और बचाव के काम में शामिल लोगों से बातचीत की और उनके प्रयासों की सराहना की. गुजरात के मंत्री राजेंद्र त्रिवेदी ने मंगलवार को कहा कि रविवार शाम को मोरबी में मच्छु नदी पर हुए केबल पुल हादसे में 135 लोगों की मौत हो गई जबकि 170 अन्य को इस हादसे के बाद बचाया गया.

मोरबी पुल हादसे से संबंधित याचिका पर सुनवाई करेगा न्यायालय

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह गुजरात के मोरबी में पुल गिरने की घटना की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित करने संबंधी जनहित याचिका पर 14 नवंबर को सुनवाई करेगा. मोरबी में मच्छु नदी पर बना ब्रिटिश युग का पुल रविवार को टूट कर गिर गया था. ताजा खबरों के अनुसार इस दुर्घटना में 134 लोगों की मौत हो गई है.

प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ के समक्ष वकील विशाल त्रिवेदी ने कहा कि उनकी जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई की जानी चाहिए. इस पर पीठ ने कहा, ‘‘आप क्या चाहते हैं.’’ वकील ने कहा, ‘‘मैं उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में एक आयोग से न्यायिक जांच कराने की अपील कर रहा हूं.’’ पीठ ने कहा कि जनहित याचिका को 14 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा. तिवारी ने जनहित याचिका में कहा कि दुर्घटना के कारण पुल गिरा, जिसके परिणामस्वरूप 134 से अधिक लोग हताहत हुए. यह सरकारी अधिकारियों की लापरवाही और पूरी तरह से उनकी विफलता को दर्शाता है.

जनहित याचिका में कहा गया है कि पिछले एक दशक में हमारे देश में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जिनमें कुप्रबंधन, कामकाज में चूक और रखरखाव में लापरवाही के कारण बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने के मामले सामने आए हैं, जिन्हें टाला जा सकता था. राज्य की राजधानी गांधीनगर से लगभग 300 किलोमीटर दूर स्थित मोरबी में मच्छू नदी पर एक सदी से भी अधिक पुराना पुल पांच दिन पहले व्यापक मरम्मत और नवीनीकरण के बाद फिर से खोला गया था. 30 अक्टूबर की शाम करीब साढ़े छह बजे जब यह गिरा तब लोगों से खचाखच भरा हुआ था. याचिका में राज्यों को खतरे का सामना कर रहे स्मारकों और पुलों के सर्वेक्षण व मूल्यांकन के लिए समिति बनाने और निर्माण दुर्घटना जांच विभाग गठित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है ताकि जब भी ऐसी घटनाएं हों तो त्वरित जांच की जा सके.

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