डिंडीगुल (तमिलनाडु). प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि महात्मा गांधी के विचारों में जलवायु संकट सहित आधुनिक समय की चुनौतियों का जवाब है. साथ ही, प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की दिशा में काम करने के लिए गांधी से प्रेरित है.

यहां गांधीग्राम ग्रामीण संस्थान के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘गांधीवादी मूल्य बहुत प्रासंगिक होते जा रहे हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘चाहे संघर्ष को समाप्त करने की बात हो या जलवायु संकट, महात्मा गांधी के विचारों में आज की कई चुनौतियों का जवाब है. गांधीवादी जीवन शैली के छात्र के रूप में आपके पास एक बड़ा प्रभाव डालने का एक बड़ा अवसर है.’’ मोदी ने कहा, ‘‘महात्मा गांधी को सबसे अच्छी श्रद्धांजलि उनके दिल के करीबी विचारों पर काम करना है.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी ने खादी को गांवों में ‘‘स्वशासन के औजार’’ के रूप में देखा और उनसे प्रेरित होकर केंद्र देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘खादी को लंबे समय तक उपेक्षित किया गया. लेकिन ‘नेशन के लिए खादी से लेकर फैशन के लिए खादी’ के आ’’ान के माध्यम से यह बहुत लोकप्रिय हो गयी है और पिछले आठ वर्षों में बिक्री में 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.’’ खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) का पिछले साल रिकॉर्ड एक लाख करोड़ रुपये का कारोबार हुआ. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यहां तक कि वैश्विक फैशन ब्रांड भी खादी को अपना रहे हैं क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल सामग्री है. यह बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्रांति नहीं है. यह जनता द्वारा उत्पादन की क्रांति है.’’

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी चाहते थे कि गांवों का विकास हो और साथ ही उन्होंने ग्रामीण जीवन के मूल्यों के संरक्षण को प्राथमिकता दी. मोदी ने कहा, ‘‘हमारा दृष्टिकोण ‘आत्मा गांव की, सुविधा शहर की’ है.’’ तमिल में नारे को दोहराते हुए उन्होंने कहा, ‘ग्रामथिन आनामा, नागरथिन वसाथी.’ मोदी ने ग्रामीण विकास की दिशा में सरकार के विभिन्न प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का अलग होना ठीक है. अंतर ठीक है, असमानता नहीं है. लंबे समय तक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच असमानता बनी रही. लेकिन आज देश इसे सुधार रहा है.’’

उन्होंने कहा कि इसमें छह करोड़ घरों में नल का पानी और 2.5 करोड़ बिजली कनेक्शन शामिल हैं. मोदी ने कहा कि स्वच्छता एक अवधारणा है जो महात्मा गांधी को बहुत प्रिय थी और ‘स्वच्छ भारत’ के माध्यम से इसमें क्रांति ला दी गई है ‘‘लेकिन हम केवल बुनियादी चीजें प्रदान करने पर ही नहीं रुक रहे हैं.’’ मोदी ने कहा, ‘‘आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी का लाभ गांवों तक भी पहुंच रहा है. करीब दो लाख ग्राम पंचायतों को जोड़ने के लिए छह लाख किलोमीटर आॅप्टिक फाइबर केबल बिछाई गई हैं. इंटरनेट डेटा की कम लागत से ग्रामीण क्षेत्रों को फायदा हुआ है.’’

ग्रामीण क्षेत्रों के भविष्य के लिए टिकाऊ कृषि को महत्वपूर्ण बताते हुए मोदी ने कहा कि प्राकृतिक खेती और रासायनिक मुक्त खेती के लिए जबरदस्त उत्साह है. यह उर्वरक आयात पर देश की निर्भरता को कम करता है. यह मिट्टी के स्वास्थ्य और मानव स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है. उन्होंने कहा, ‘‘हमने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारी जैविक खेती योजना खासकर पूर्वोत्तर में चमत्कार कर रही है. पिछले साल के बजट में केंद्र ने प्राकृतिक खेती से संबंधित नीति बनाई थी.’’

मोदी ने कहा, ‘‘टिकाऊ खेती के संबंध में, एक और महत्वपूर्ण ंिबदु है जिस पर आपको ध्यान देना चाहिए-कृषि को मोनोकल्चर (एक क्षेत्र में एक ही तरह की फसल) से बचाने का समय आ गया है. अनाज, बाजरा और अन्य फसलों की कई देशी किस्मों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है…ये अनाज पौष्टिक और जलवायु के अनुकूल हैं. इसके अलावा, फसल विविधीकरण से मिट्टी और पानी की बचत हो सकती है.’’ अक्षय ऊर्जा पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में स्थापित सौर ऊर्जा की क्षमता लगभग 20 गुना बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि अगर गांवों में सौर ऊर्जा का प्रसार हो जाए तो भारत ऊर्जा के मामले में भी आत्मनिर्भर हो सकता है.

मोदी ने कहा कि गांधीवादी विचारक विनोबा भावे ने कहा था कि ग्राम-स्तरीय निकायों के चुनाव ‘विभाजनकारी’ होते हैं क्योंकि समुदाय और परिवार टूट जाते हैं. उन्होंने कहा कि गुजरात में इसका मुकाबला करने के लिए राज्य सरकार ने एक योजना शुरू की, जहां आपसी सहमति से नेता चुनने वाले गांवों को अलग से प्रोत्साहन दिया जाता है. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इससे सामाजिक संघर्ष बहुत कम हो गए. युवा पूरे भारत में एक समान तंत्र विकसित करने के लिए ग्रामीणों के साथ काम कर सकते हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर गांवों को जोड़ा जा सकता है, तो वे अपराध, मादक पदार्थ और असामाजिक तत्वों जैसी समस्याओं से लड़ सकते हैं. महात्मा गांधी ने एकजुट और स्वतंत्र भारत के लिए लड़ाई लड़ी. गांधीग्राम अपने आप में एकता की कहानी है. यहीं पर हजारों ग्रामीण गांधी जी की एक झलक के लिए ट्रेन से आए थे.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु हमेशा से राष्ट्रीय चेतना का स्थान रहा है और स्वामी विवेकानंद के पश्चिम से लौटने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया.

प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के नीलगिरि में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत को लोगों के ‘वीरवनक्कम’ (वीरों को सलामी) का भी जिक्र किया. काशी तमिल संगमम कार्यक्रम पर, उन्होंने कहा कि यह जल्द ही उत्तर भारत में आयोजित होगा और काशी तथा तमिलनाडु के बीच जुड़ाव का जश्न मनाएगा.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘काशी के लोग तमिलनाडु की भाषा और संस्कृति का जश्न मनाने के लिए उत्सुक हैं. यही तरीका ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ है. एक दूसरे के लिए यह प्यार और सम्मान हमारी एकता का आधार है.’’ उन्होंने कहा कि ऐसे समय जब दुनिया सदी के सबसे बड़े वैश्विक संकट का सामना कर रही है, भारत का उज्जवल भविष्य है.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान हो, सबसे गरीब लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा की बात हो, दुनिया का विकास इंजन होने के नाते भारत ने दिखाया है कि यह किस चीज से बना है. दुनिया को भारत से महान काम करने की उम्मीद है क्योंकि भारत का भविष्य युवाओं की ‘कर सकते हैं’ वाली पीढी के हाथ में है.’’ तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि और मुख्यमंत्री एम के स्टालिन भी दीक्षांत समारोह में मौजूद थे. राज्य में सत्तारूढ़ दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से रवि को राज्यपाल के नाते उनके कुछ ‘अनुचित’ कदमों के लिए बर्खास्त करने का आग्रह करने के कुछ दिनों बाद दोनों की यह पहली सार्वजनिक उपस्थिति थी.

अपने संबोधन में, स्टालिन ने शिक्षा की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया और आरक्षण लाभ सहित इस क्षेत्र में विभिन्न पहल पर प्रकाश डाला. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘शिक्षा ही एकमात्र ऐसी संपत्ति है, जिसे किसी भी परिस्थिति में कोई भी नहीं छीन सकता है. यह राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वह शिक्षा का खजाना प्रदान करे. इसलिए, मैं केंद्र सरकार से अपील करता हूं कि वह शिक्षा को राज्य सूची के तहत वापस लाकर राज्य सरकार के ऐसे प्रयासों का समर्थन और प्रोत्साहित करे.’’

स्टालिन ने कहा, ‘‘जब संविधान बनाया गया था और लागू हुआ, शिक्षा को मूल रूप से राज्य सूची में रखा गया था. इसे आपातकाल की अवधि के दौरान समवर्ती सूची में ले जाया गया. मैं अनुरोध करता हूं कि केंद्र सरकार, विशेष रूप से प्रधानमंत्री शिक्षा को राज्य सूची में वापस लाने के लिए प्रयास करें.’’ कई छात्रों ने स्रातक की डिग्री प्राप्त की, जिसमें प्रधानमंत्री ने चार को स्वर्ण पदक प्रदान किए. संगीतकार इलैया राजा और कर्नाटक संगीत के प्रसिद्ध वादक उमयालपुरम के शिवरामन को विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया.

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