जी-20 देश रूस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने को तैयार, युक्रेन युद्ध खत्म करने की अपील

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नुसा दुआ. विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के नेता मंगलवार को इस बात के लिए तैयार दिखे कि यूक्रेन पर रूसी हमले को लेकर कड़ा संदेश दिया जाए. इस क्रम में राष्ट्रपति जो बाइडन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने जी-20 समूह पर दबाव डाला कि वह यूक्रेन के खिलाफ नौ महीने से जारी युद्ध को लेकर मॉस्को पर दबाव बनाये रखें, जिसने यूक्रेन को बर्बाद करने के अलावा वैश्विक अर्थव्यवस्था को मुश्किल में डाल दिया. जी-20 समूह के नेताओं की ओर से मंगलवार को जारी घोषणापत्र मसौदे से यह ध्वनित होता है कि यूक्रेन पर रूस के हमले की संयुक्त राष्ट्र द्वारा आलोचना की गई है, जबकि विभिन्न देशों के अलग मत का भी संज्ञान लिया गया है.

जी-20 घोषणापत्र मसौदे में यूक्रेन के खिलाफ रूसी ‘‘आक्रामकता’’ की संयुक्त राष्ट्र द्वारा की गई ंिनदा का समर्थन किया गया. हालांकि स्थिति पर सदस्य देशों के अलग-अलग विचारों को भी स्वीकार किया गया. मसौदा प्रस्ताव पर विचार-विमर्श जारी है.
‘द एसोसिएटेड प्रेस’ द्वारा देखे गए बयान के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र महासभा के दो मार्च के प्रस्ताव में अपनाए रुख को दोहरते हुए, ‘‘रूस की आक्रामकता की कड़ी ंिनदा की गई’’ और ‘‘यूक्रेन से उसकी (रूसी सैनिकों की) बिना किसी शर्त वापसी की मांग की गई.’’

बयान के अनुसार, मसौदे में स्थिति पर सदस्य देशों की अलग-अलग राय और रूस के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों का भी जिक्र है. इसमें यह भी कहा गया कि जी20 सुरक्षा मुद्दों का समाधान निकालने का मंच नहीं है. बयान में शब्दों का बेहद सोच-समझकर इस्तेमाल किया जाना शिखर सम्मेलन में व्याप्त तनाव को दर्शाता है. रूस और चीन सहित कई सदस्य देशों ने संघर्ष पर तटस्थ रुख अपनाए जाने की मांग की है.

वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने जी20 से रूस को कूटनीतिक व आर्थिक रूप से और अलग-थलग करने की मांग की है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी बाइडन की मांग का समर्थन किया है. इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोको विडोडो ने मंगलवार को यहां शुरू हुए वार्षिक जी20 शिखर सम्मेलन में वैश्विक नेताओं को इस मुद्दे पर एकजुट करने की कोशिश की थी.

विडोडो ने कहा, ‘‘ अगर युद्ध समाप्त नहीं हुआ तो आगे बढ़ना मुश्किल होगा. हमें दुनिया को हिस्सों में नहीं बंटने देना चाहिए. दुनिया को एक और शीत युद्ध में नहीं फंसने देना चाहिए.’’ जेलेंस्की ने एक वीडियो संदेश में युद्ध समाप्त करने की अपनी 10 मांगें दोहराईं, जिसमें एक मांग रूसी बल की पूर्ण वापसी और क्षेत्र में यूक्रेन का पूर्ण कब्जा भी है.

उन्होंने कहा, ‘‘ यूक्रेन को अपने विवेक, संप्रभुता, क्षेत्र और स्वतंत्रता के साथ समझौता करने की पेशकश नहीं की जानी चाहिए.’’ जेलेंस्की ने कहा, ‘‘ यूक्रेन हमेशा शांति स्थापित करने के प्रयासों में अगुवा रहा है और दुनिया ने इसे देखा भी है. अगर रूस कहता है कि वह युद्ध खत्म करना चाहता है तो अपने कदमों से उसे साबित भी करे.’‘ अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि शिखर सम्मेलन की आखिरी विज्ञप्ति में यह स्पष्ट होगा कि ‘‘अधिकतर’’ सदस्य देश यूक्रेन में रूस के आक्रमण और इसकी वजह से वैश्विक खाद्य व ऊर्जा आपूर्ति को हुए नुकसान की ंिनदा करते हैं.

जी-20 में अर्जेंटीना, आॅस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) शामिल हैं.

यूक्रेन में युद्ध-विराम और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का तरीका तलाशना होगा: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को यूक्रेन विवाद को सुलझाने के लिए ‘‘युद्धविराम और कूटनीति’’ के रास्ते पर लौटने का आ’’ान किया. साथ ही रूसी तेल व गैस खरीद के खिलाफ पश्चिमी देशों के आ’’ान के बीच उन्होंने ऊर्जा की आपूर्ति पर किसी भी प्रतिबंध को बढ़ावा देने का विरोध किया.

मोदी ने वार्षिक जी20 शिखर सम्मेलन के एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन, कोविड-19 वैश्विक महामारी और यूक्रेन संकट के कारण उत्पन्न वैश्विक चुनौतियों ने दुनिया में तबाही मचा दी है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला ‘‘चरमरा’’ गई है.
भारत की जी-20 की आगामी अध्यक्षता का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि जब ‘‘ (गौतम) बुद्ध और (महात्मा) गांधी की धरती पर जी-20 की बैठक होगी, तो हम सभी एकसाथ विश्व को शांति का ठोस संदेश देंगे.’’ खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा पर बुलाए गए सत्र में मोदी ने वैश्विक समस्याओं के असर को रेखांकित किया और कहा कि पूरी दुनिया में आवश्यक वस्तुओं का संकट है और हर देश के गरीब नागरिकों के लिए चुनौतियां अधिक बढ़ गई हैं.

मोदी ने कहा कि भारत की ऊर्जा-सुरक्षा वैश्विक विकास के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह ‘‘ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ हमें ऊर्जा की आपूर्ति पर किसी प्रतिबंध को बढ़ावा नहीं देना चाहिए और ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित की जानी चाहिए.’’ इस सत्र में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव सहित कई विश्व नेताओं ने हिस्सा लिया.

प्रधानमंत्री ने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के मद्देनजर रूसी तेल व गैस की खरीद के खिलाफ पश्चिमी देशों के आ’’ान के बीच ऊर्जा आपूर्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाने का आ’’ान किया. भारत रियायती दरों पर रूसी कच्चा तेल खरीदता रहा है. मोदी ने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण के लिए प्रतिबद्ध है.

इंडोनेशिया के बाली में हो रहे शिखर सम्मेलन में उन्होंने कहा, ‘‘ 2023 तक हम अपनी जरूरत की आधी बिजली का उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से करेंगे. समावेशी ऊर्जा परिवर्तन के लिए विकासशील देशों को समयबद्ध और किफायती वित्त व प्रौद्योगिकी की सतत आपूर्ति की जरूरत है.’’ यूक्रेन संघर्ष पर उन्होंने बातचीत के माध्यम से संकट को हल करने का अपना आ’’ान दोहराया.
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ मैंने बार-बार कहा है कि हमें यूक्रेन में युद्ध-विराम और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का तरीका तलाशना होगा. पिछली शताब्दी में द्वितीय विश्व युद्ध ने दुनिया पर कहर बरपाया था.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ उसके बाद उस दौर के नेताओं ने गंभीरता से शांति की राह पर चलने का प्रयास किया. अब हमारी बारी है. कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद एक नयी विश्व व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में शांति, सद्भाव और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘‘ठोस और सामूहिक संकल्प’’ समय की मांग है. मोदी ने कहा कि भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान सभी प्रमुख मुद्दों पर वैश्विक सहमति कायम करने के लिए काम करेगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने चुनौतीपूर्ण वातावरण के बीच जी20 के नेतृत्व के लिए इंडोनेशिया की तारीफ भी की.

मोदी ने कहा, ‘‘ जलवायु परिवर्तन, कोविड-19 वैश्विक महामारी तथा यूक्रेन संकट और उससे उत्पन्न वैश्विक चुनौतियां.. इन सभी ने मिलकर दुनिया में तबाही मचा रखी है. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं चरमरा गई हैं.’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ पूरी दुनिया में आवश्यक सामान का संकट है. हर देश के गरीब नागरिकों के लिए चुनौतियां अधिक हैं. उनके लिए रोजमर्रा की ंिजदगी पहले से ही एक संघर्ष थी.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि गरीब ‘‘दोहरी मार’’ से निपटने के लिए आर्थिक रूप से असमर्थ हैं.