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भाजपा ने माओवादियों के साथ ‘संघर्षविराम वार्ता’ पर कांग्रेस नेता की टिप्पणी को लेकर पार्टी की आलोचना की

नयी दिल्ली. भाजपा ने मंगलवार को प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के साथ ”संघर्षविराम” के लिए कुछ वर्गों के आह्वान का समर्थन करने का आरोप कांग्रेस पर लगाया और कहा कि इससे नक्सल समस्या से निपटने के मुद्दे पर विपक्षी पार्टी के ”दोहरे मानदंड उजागर हो गए हैं.”

भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए माओवादियों से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सुरक्षार्किमयों का अपमान कर रही है और पूछा कि पार्टी ”हमेशा भारत के दुश्मनों – नक्सलियों से लेकर पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों तक – के साथ क्यों खड़ी रहती है.” यह बयान कांग्रेस की तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि वह भाकपा (माओवादी) के साथ संघर्षविराम के लिए शांति वार्ता समिति की अपील को मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के संज्ञान में लाएंगे और पार्टी की उच्च स्तरीय समिति में इस मुद्दे पर चर्चा भी करेंगे.
मीडिया में आई खबरों के अनुसार, गौड़ ने रविवार को हैदराबाद में शांति वार्ता समिति द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्र पर आरोप लगाया कि वह छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में खनिज संपदा को कॉरपोरेट घरानों को सौंपने के लिए माओवादियों को ”खत्म” करना चाहता है.

गौड़ की टिप्पणी पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के साथ संघर्षविराम के आह्वान का समर्थन करने का आरोप लगाया और कहा कि यह पार्टी की ”वास्तविक मानसिकता” है. पूनावाला ने कहा, ”जब कांग्रेस (केन्द्र में) सत्ता में थी, तो वह नक्सलवाद को आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताती थी और आज यह पार्टी के लिए मानवाधिकार का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है.” उन्होंने कहा, ”बसवराजू जैसे नक्सली कमांडरों के मारे जाने के बाद कांग्रेस अब आंसू बहा रही है. कांग्रेस की तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष का कहना है कि नक्सलियों के साथ संघर्षविराम होना चाहिए.” भाजपा के आरोप पर कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ”आतंकवादियों और नक्सलियों” के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं चाहती, क्योंकि वह वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता देती है. उन्होंने आरोप लगाया, ”कांग्रेस के दोहरे मानदंड देखिए. वोट बैंक की राजनीति को ध्यान में रखते हुए वह चाहती है कि आतंकवादियों को क्लीनचिट मिल जाए, चाहे वे नक्सली हों या इस्लामी जिहादी. यह हमारे सशस्त्र बलों और पुलिसर्किमयों का अपमान है, जो आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए हैं.”

पूनावाला ने आरोप लगाया, ”कांग्रेस हमेशा अपनी वोट बैंक नीति को राष्ट्रीय सुरक्षा से ऊपर रखती है. यह हमेशा पार्टी के हित और (गांधी) परिवार के हित को राष्ट्रीय हित से ऊपर रखती है.” गौड़ की कथित टिप्पणी को ”शर्मनाक” बताते हुए, भाजपा के एक अन्य राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में पूछा, ”कांग्रेस हमेशा भारत के दुश्मनों – नक्सलियों से लेकर पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों के साथ क्यों खड़ी होती है?” उन्होंने कहा कि माओवाद प्रभावित जिलों की संख्या 2014 के 126 से घटकर 2025 की शुरुआत में सिर्फ 18 रह जाना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के भारत को ”2026 तक नक्सल मुक्त” बनाने के संकल्प का प्रमाण है.

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