छत्तीसगढ़ प्रदेश में पत्रकारों व मीडिया कर्मियों के ऊपर सरकार द्वरा झूठे प्रकरण बनाकर एफ आई आर दर्ज हूये मामले में सीबीआई जांच की मांग- नितिन लॉरेंस

रायपुर : माननीय इस विषय से अवगत कराना चाहेंगे कि राजधानी में पत्रकारों के साथ जिस तरह से अनुचित व्यवहार किया जा रहा है, उन पर सच न दिखाने का दबाव बनाया जा रहा है और तो और नामी और पैसे वालों के साथ मिलकर पुलिस भी सच को अनदेखा कर झूठे लोगों को बढ़ावा देकर पत्रकारों के साथ बदसलूकी कर रही है यह सरासर अन्याय और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की हत्या है।

बिना मामले की तफ्तीश किए पुलिस पत्रकारों को थाने में बैठा कर उन पर दबाव बना रही है और दूसरी ओर अवैध कारोबारियों को संरक्षण दे रही है अगर ऐसा ही चलता रहा तो कोई भी पत्रकार सच को शासन प्रशासन के सामने लाने की हिमाकत की नहीं कर पाएगा। सरकार जिस तरह से अवैध कारोबारियों को संरक्षण दे रही है ऐसे में पत्रकारों का काम करना मुश्किल हो जाएगा, कोई भी व्यक्ति आसानी से पत्रकारों के ऊपर पैसा वसूली करने का आरोप लगाकर उनको परेशान करेगा क्या कोई भी पत्रकार पुलिस की मौजूदगी में पैसा ले सकता है यह सोचने वाली बात है।

लेकिन इसके बावजूद भी उनको झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। अगर पत्रकार सरकार को किसी घटना के बारे में वाकिफ कराते हैं तो सरकार को चाहिए कि उस मामले को संज्ञान में लें न कि इस तरह पत्रकारों पर झूठे मामले लाद दिए जाए। ऐसे में पत्रकारिता करना मुश्किल हो जाएगा कोई भी पत्रकार जोखिम उठाकर पत्रकारिता ही नहीं कर पाएगा।

माननीय भारत देश के नक्शे पर अपनी सांस्कृतिक विरासत प्राकृतिक संपदा के साथ गौरवशाली श्रम शक्ति की गरिमा लिए छत्तीसगढ़ राज्य की पहचान हमेशा शांति सद्भाव और सहयोग को लेकर रही है यह सर्वविदित है छत्तीसगढ़ राज्य के भावना अनुकूल प्रदेश में प्रजातंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारिता की भूमिका भी निभाने के नाम और रचनात्मक रही है।

 

महोदय उक्त विषय में अत्यंत अफसोस के साथ जिक्र करना पड़ रहा है कुछ वर्षों में यहां दैनिक साप्ताहिक समाचार पत्रों के अलावा आर्थिक मानसिक व अन्य समय अवधि से जुड़े मीडिया कर्मी इलेक्ट्रॉनिक न्यूज़ चैनलों से जुड़े पत्रकार व अन्य मीडिया कर्मियों के साथ दुर्व्यवहारों की घटनाओं के साथ हमले भी बढ़े हैं। माननीय यह दुखद है कि देश में प्रजातंत्र को भयमुक्त करने वाले जिस पुलिस प्रशासन की मौजूदगी हमारे सीने को फक्र से चौड़ा और निर्भय कर देते हैं तो वही पुलिस प्रशासन से ही जुड़े कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा पत्रकार मीडिया कर्मियों से दुर्व्यवहार एवं दबाव पूर्ण वातावरण बनाए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। प्रदेश में घटनास्थल पर खबरों को कवरेज करने वाले मीडिया कर्मी इस तरह के दुर्व्यवहार और दबाव के शिकार हो रहे हैं।

हाल ही में अबोव एंड बियोंड होटल वाले मामले में जिन तीन पत्रकारों को पुलिस ने वसूली वाले मामले में हिरासत में लिया है क्या होटल संचालक ने इन तीनों व्यक्तियों के एक साथ एक ही समय पर मौजूद होने संबंधी कोई भी साक्ष्य पुलिस को दिए। एक ही समय में यह तीनों व्यक्ति एक साथ इस होटल में मौजूद थे? क्या इससे संबंधित कोई भी क्लू होटल संचालक ने पुलिस को दिए हैं क्या पुलिस ने इस बात की जांच की तीनों व्यक्ति एक ही साथ होटल में पहुंचे और तीनों ने जीएम को धमकाकर पैसों की मांग की
वर्तमान में जिस तरह से माना थाने में वेब पत्रकारों के साथ कार्यवाही की गई है इसमें तत्काल संज्ञान लेते हुए त्वरित कार्यवाही करते हुए मामले की गंभीरता से C B I उच्च स्तरीय जांच करने की मंग