नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर की अगले सप्ताह मास्को यात्रा के दौरान भारत और रूस के बीच विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग पर प्रमुखता से बातचीत होगी. जयशंकर का यह दौरा ऐसे वक्त हो रहा है जब रूस का यूक्रेन के साथ संघर्ष कई महीनों से जारी है. विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि जयशंकर सात और आठ नवंबर को रूस का दौरा करेंगे तथा रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उप प्रधानमंत्री एवं व्यापार और उद्योग मंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ बातचीत करेंगे. रूस ने पिछले हफ्ते जयशंकर की यात्रा की घोषणा की थी.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अंिरदम बागची ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘विदेश मंत्री जयशंकर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात करेंगे. चर्चा में दोनों देशों के द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर विचारों के आदान-प्रदान की उम्मीद है.’’ उन्होंने कहा कि जयशंकर-मंटुरोव की वार्ता में द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा. बागची ने कहा, ‘‘विदेश मंत्री जयशंकर व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी-टीईसी) के अपने समकक्ष रूस के उप प्रधानमंत्री और व्यापार एवं उद्योग मंत्री डेनिस मंटुरोव से भी मुलाकात करेंगे.’’

उन्होंने कहा, ‘‘विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.’’ यूक्रेन संघर्ष पर एक सवाल के जवाब में बागची ने कहा कि भारत ने हमेशा कूटनीति और बातचीत पर लौटने की जरूरत पर जोर दिया है और कहा, ‘‘मुझे यकीन है कि विदेश मंत्री निश्चित रूप से इसे दोहराएंगे.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस फैसले पर नहीं पहुंचना चाहूंगा कि किस विषय पर चर्चा होगी.’’ साथ ही बागची ने उल्लेख किया कि भारत ‘‘आर्थिक तत्वों को देख रहा है’’ और ‘‘राजनीतिक घटनाक्रम’’ पर विचारों और चर्चाओं का आदान-प्रदान भी कर रहा है.

बागची ने कहा कि यह यात्रा दोनों पक्षों के बीच नियमित उच्च स्तरीय वार्ता के क्रम में होगी. यह पूछे जाने पर कि रूस काला सागर गलियारे के माध्यम से यूक्रेन से अनाज के निर्यात की अनुमति देने के लिए संयुक्त राष्ट्र सर्मिथत समझौते में फिर से शामिल होने के लिए सहमत है, बागची ने सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन कहा कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा चुनौती को दूर करने के लिए कोई भी प्रयास स्वागत योग्य कदम है.

बागची ने कहा, ‘‘हम उर्वरकों, खाद्य और ऊर्जा की उच्च कीमतों के प्रभाव के बारे में दुनिया भर के देशों के, विशेष रूप से विकासशील दुनिया के प्रभावित होने के बारे में बात कर रहे हैं और ऐसा कोई भी कदम जो उपलब्धता बढ़ाने और भोजन की लागत को कम करने की प्रक्रिया में मदद करता है, एक स्वागत योग्य घटनाक्रम है.’’

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘अनाज समझौते पर मेरी कोई विशेष टिप्पणी नहीं है क्योंकि हम इसमें सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं. लेकिन हमने रिपोर्ट देखी है कि यह फिर से शुरू हो गया है.’’ परमाणु प्रसार पर पाकिस्तान और यूक्रेन के बीच गठजोड़ के बारे में कुछ खबरों को लेकर एक सवाल पर बागची ने कोई विशेष टिप्पणी नहीं की लेकिन उल्लेख किया कि नयी दिल्ली ने अतीत में पाकिस्तान से परमाणु प्रौद्योगिकी के प्रसार पर ंिचता व्यक्त की थी. उन्होंने कहा कि बेशक, अगर कोई गठजोड़ या प्रसार है, तो यह न केवल भारत के लिए बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए ंिचता का कारण है.

जयशंकर ने आखिरी बार पिछले साल जुलाई में रूस का दौरा किया था, जिसके बाद अप्रैल में लावरोव ने भारत का दौरा किया था. पश्चिम के कई देशों द्वारा पिछले कुछ महीनों में दबाव बनाए जाने के बावजूद भारत ने रूस से रियायती कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है.

फरवरी में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से जयशंकर और लावरोव चार बार मिल चुके हैं. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पिछले साल दिसंबर में भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए थे. दोनों देशों के पास एक तंत्र है जिसके तहत भारत के प्रधानमंत्री और रूसी राष्ट्रपति संबंधों के संपूर्ण पहलुओं की समीक्षा के लिए सालाना एक शिखर बैठक आयोजित करते हैं.

इस साल के शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी को रूस का दौरा करना है. हालांकि, इस साल के शिखर सम्मेलन को लेकर अभी तक कुछ स्पष्ट जानकारी नहीं है. फरवरी में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से मोदी ने पुतिन के साथ-साथ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से कई बार बात की है.

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