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केन्या में किसानों का अनूठा प्रयोग, हाथियों को भगाने के लिए मधुमक्खियों और तिल का इस्तेमाल

 टवेटा. केन्या के किसानों ने हाथियों से अपनी फसलों को बचाने के लिए अनूठा रास्ता अपनाया है जिससे किसानों को अधिक आय भी हो रही है और हाथियों से उनकी फसल की रक्षा भी हो रही है. केन्या के सबसे बड़े राष्ट्रीय उद्यान ‘त्सावो ईस्ट राष्ट्रीय उद्यान’ से घिरे क्षेत्र के आस पास रहने वाले किसान हाथियों से अपनी फसल के बर्बाद होने के कारण काफी परेशान थे.

ऐसे ही एक किसान टैटा के पर्वतीय क्षेत्र में रहने वाले रिचर्ड शिका (68) बताते हैं कि उन्होंने बहुत करीब से हाथी का सामना किया है. उन्होंने बताया, ”एक बार जब मैंने अपनी मक्के की फसल को बचाने के लिए एक हाथी को भगाया तो उसने पलटकर मुझ पर ही हमला कर दिया. मैंने किसी तरह कूदकर अपनी जान बचाई.” इस राष्ट्रीय उद्यान की बाड़बंदी नहीं की गई है जिससे उद्यान के जंगली जानवर, खासकर हाथी अक्सर मानव बस्ती में आ जाते हैं और उनकी फसल को बर्बाद कर देते हैं.

पशु संरक्षण के लिए काम करने वाले संगठन ‘सेव द एलीफेंट्स’ के लिए मानव-हाथी सह-अस्तित्व पर शोध करने वाले युका लुवोंगा बताते हैं, ”हम इंसानों ने जिन जगहों और ढांचों का विकास किया है वे हाथियों के प्रवास के मार्गों और रास्तों में बाधा डालते हैं.” उन्होंने बताया, ”हाथी प्रतिदिन लगभग 150 किलोग्राम वनस्पति खाते हैं, इसलिए उन्हें खेतों से दूर रखना मुश्किल है, खासकर अगर कहीं और चारा कम हो.” केन्या वन्यजीव सेवा और मानव-हाथी संघर्ष पर नजर रखने वाले पशु संरक्षण संगठनों का अनुमान है कि केन्या में हाथियों से संबंधित घटनाओं में हर साल 30 से 35 लोग मारे जाते हैं.

शिका ने बताया, ”हाथियों को मधुमक्खियों के डंक पसंद नहीं हैं, इसलिए वे उन क्षेत्रों से दूर रहते हैं जहां मधुमक्खियों के छत्ते होते हैं.” ‘सेव द एलिफैंट्स’ की मदद से शिका सहित 50 किसानों ने अपने अपने खेतों के चारों ओर खंभों के बीच मधुमक्खी पालन शुरू किया है. अगर कोई हाथी खेत में लगे बाड़ को छू लेता है, तो छत्ते हिल जाते हैं, जिससे मधुमक्खियां भनभना कर बाहर निकलती हैं और हाथी वापस लौट जाते हैं.

शिका ने बताया, ”मधुमक्खियों के ये छत्ते बाड़ की तरह काम करते हैं, जिससे मैं खेती जारी रख सकता हूं और शहद से जीविका भी कमा सकता हूं.” उन्होंने कहा कि इस साल उन्होंने शहद बेचकर लगभग 250 अमेरिकी डॉलर कमाए हैं. वहीं, फसल बदलने से भी फर्क पड़ सकता है. हाथियों को मक्का और तरबूज बहुत पसंद हैं. लेकिन तिल नहीं क्योंकि तिल के पौधे एक ऐसी गंध छोड़ते हैं जिससे हाथी दूर भागते हैं.

गट्र्रूड जैकिम (70) बताती हैं कि मक्का और मूंग की जगह तिल उगाना कोई मुश्किल काम नहीं था. वह कहती हैं, ”देखो, मेरी उम्र बढ. रही है इसलिए मैं हाथियों को भगा नहीं सकती हूं.” वह उन 100 किसानों में शामिल हैं जिन्होंने फसल बदलकर हाथियों को अपने खेतों से दूर रखा. संरक्षणवादियों को आशा है कि दीर्घकाल में इससे उस क्षेत्र के लोगों को फायदा होगा जहां मानव-हाथी संघर्ष चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है.

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