कर्नाटक केवल अन्य राज्यों ही नहीं, बल्कि कुछ देशों को भी चुनौती दे रहा है: मोदी

7

बेंगलुरु. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक को निवेश का मुख्य केंद्र बताते हुए उसकी संस्कृति, भाषा एवं लोगों की बुधवार को प्रशंसा की और कहा कि कई क्षेत्रों में राज्य की दोगुनी रफ्तार का एक कारण ‘डबल इंजन’ वाली सरकार की ताकत है. प्रधानमंत्री द्वारा तीन दिवसीय वैश्विक निवेशक सम्मेलन ‘इन्वेस्ट कर्नाटक 2022’ को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए ‘डबल इंजन’ सरकार (राज्य और केंद्र में एक ही दल की सरकार) का जिक्र किया जाना महत्व रखता है, क्योंकि राज्य में करीब पांच महीने बाद चुनाव होने हैं.

मोदी ने कहा, ‘‘राज्य और केंद्र में एक ही दल (भारतीय जनता पार्टी) की सरकार होने के कारण कर्नाटक के पास ‘डबल इंजन’ की शक्ति है. कई क्षेत्रों में राज्य का तेजी से विकास करने और कारोबार सुगमता एवं एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) में इसके शीर्ष स्थान पर रहने का एक कारण यह भी है.’’ उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 400 ‘फॉर्च्यून 500’ कंपनियां और देश की 100 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियों में से 40 से अधिक कंपनियां हैं.

मोदी ने कहा, ‘‘कर्नाटक आज दुनिया के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी केद्रों में से एक के रूप में जाना जाता है. उद्योग से लेकर सूचना प्रौद्योगिकी तक, वित्तीय प्रौद्योगिकी से लेकर जैव प्रौद्योगिकी तक, स्टार्टअप से सतत ऊर्जा तक यहां प्रगति से नए रिकॉर्ड लिखे जा रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि कर्नाटक भारत में अन्य राज्यों को ही नहीं, बल्कि कुछ देशों को भी चुनौती दे रहा है.

मोदी ने कहा, ‘‘जब कभी प्रतिभा और प्रौद्योगिकी की बात होती है, तो जेहन में जो पहला नाम आता है, वह ‘ब्रांड बेंगलुरु’ है. यह बात दुनियाभर में स्थापित है.’’ ऐसा बताया जा रहा है कि ‘इन्वेस्ट कर्नाटक 2022’ कोविड-19 के बाद देश में इतने व्यापक स्तर पर निवेशकों का पहला सम्मेलन है.

मोदी ने राज्य में निवेशकों का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘कर्नाटक एक ऐसी जगह है, जहां परंपरा और प्रौद्योगिकी दोनों हैं, जहां प्रकृति एवं संस्कृति का बेहतरीन संगम है और इसकी पहचान अद्भुत वास्तुकला और जीवंत स्टार्टअप दोनों से जुड़ी है.’’ उन्होंने कहा कि कर्नाटक अपने सबसे खूबसूरत प्राकृतिक स्थलों के लिए जाना जाता है. मोदी ने कहा, ‘‘यहां की मृदु भाषा कन्नड़, समृद्ध संस्कृति और कर्नाटक के लोगों में अपनेपन की भावना ने सभी का दिल जीत लिया है.’’ उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेशक सम्मेलन का आयोजन प्रतिस्पर्धी और सहकारी संघवाद का सबसे अच्छा उदाहरण है.

‘वैश्विक संकट’ के दौर में दुनिया भारत की तरफ बहुत उम्मीद भरी नजरों से देख रही है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि ‘‘वैश्विक संकट’’ के दौर में दुनियाभर के अर्थव्यवस्था विशेषज्ञ और विश्लेषक भारत को ‘‘असीम संभावनाओं का केंद्र’’ बता रहे हैं और दुनिया भारत की तरफ से बहुत उम्मीद भरी नजरों से देख रही है. उन्होंने यह भी कहा कि नीतिगत संकटों को समाप्त करके उनकी सरकार ने ‘‘लालफीताशाही के जाल’’ में धकेलने की बजाय निवेशकों के अनुकूल माहौल बनाया है.

यहां आयोजित तीन-दिवसीय वैश्विक निवेशक सम्मेलन (जीआईएम) ‘इन्वेस्ट कर्नाटक 2022’ के उद्घाटन समारोह को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कर्नाटक को निवेशकों के लिए बड़ा केंद्र बताया और कहा कि दक्षिण के इस राज्य में ‘‘डबल इंजन’’ की सरकार है, यानि केंद्र सरकार और राज्य सरकार में एक ही पार्टी का नेतृत्व है.

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले वर्ष भारत ने करीब 84 बिलियन डॉलर का रिकॉर्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) हासिल किया था. ये नतीजे तब आ रहे हैं जब दुनिया कोविड वैश्विक महामारी के असर और युद्ध की परिस्थितियों से जूझ रही है. हर तरफ अनिश्चितता का माहौल है. भारत पर भी युद्ध और महामारी से बनी स्थितियों का विपरीत प्रभाव पड़ा है. बावजूद इसके, आज पूरी दुनिया भारत की तरफ बहुत उम्मीद भरी नजरों से देख रही है.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि ये दौर आर्थिक अनिश्चितता का है लेकिन तमाम देश एक बात को लेकर आश्वस्त हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत है.

उन्होंने कहा, ‘‘ये बाजार में उतार-चढ़ाव का भी दौर है लेकिन 130 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाएं हमारे घरेलू बाजार की मजबूती की गारंटी दे रही हैं. ये भले ही वैश्विक संकट का दौर है लेकिन दुनियाभर के विशेषज्ञ, विश्लेषक और अर्थव्यवस्था के जानकार भारत को ‘असीम संभावनाओं से भरपूर’ बता रहे हैं.’’ मोदी ने कहा कि भारत अपने बुनियादी मानकों पर लगातार काम कर रहा है ताकि उसकी अर्थव्यवस्था दिनों-दिन और मजबूत हो.

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ महीनों में भारत ने जितने मुक्त व्यापार करार किए हैं, उससे दुनिया को हमारी तैयारियों की झलक मिल चुकी है.’’ ‘‘इंवेस्ट कर्नाटक’’ को भारत में होने वाले निवेशक सम्मेलनों में सबसे बड़ा निवेशक सम्मेलन माना जाता है. प्रधानमंत्री ने दावा किया कि 9-10 साल पहले देश नीतिगत संकट के दौर से गुजर रहा था और देश को उस स्थिति से बाहर निकालने के लिए अपना रुख बदलने की जरूरत थी.

उन्होंने कहा, ‘‘हमने निवेशकों को लालफीताशाही के जाल में उलझाने की बजाय निवेश के लिए लाल कालीन बिछाने का माहौल बनाया. हमने नए-नए उलझाऊ कानून बनाने के बजाय उन्हें आसान बनाया. हमने खुद बिजनेस चलाने के बजाय बिजनेस के लिए आधार तैयार किया ताकि दूसरे आगे आ सकें. हमने युवाओं को नियमों में जकड़ने के बजाय उन्हें अपनी क्षमताओं को और बढ़ाने का मौका दिया.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि नए भारत का निर्माण बड़े सुधारों, व्यापक बुनियादी ढांचे और सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा पर ध्यान केंद्रित करके ही किया जा सकता है.

इस दिशा में उठाए गए विभिन्न कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सुधारों के साथ-साथ अवसंरचना के क्षेत्र में भी बहुत तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है और निवेश व मानव पूंजी पर ध्यान केंद्रित करके ही प्रगति हासिल की जा सकती है. प्रधानमंत्री ने कहा कि अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में आज भारत ने जो मुकाम हासिल किया है, वह पूरी दुनिया के लिए मिसाल है क्योंकि पिछले 8 वर्षों में देश की अक्षय ऊर्जा की क्षमता में तीन गुनी वृद्धि हुई है और सौर ऊर्जा की क्षमता में 20 गुना बढ़ोतरी हुई है. केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी होने की ताकत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक वजह यह भी है कि कर्नाटक कई क्षेत्रों में सबसे तेज गति से विकास कर रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘फॉर्च्यून 500 कंपनियों की सूची में से 400 कर्नाटक में ही हैं. भारत के 100 से अधिक यूनिकॉर्न में से 40 से ज्यादा कर्नाटक में ही हैं. कर्नाटक की गिनती आज दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक केंद्र के तौर पर हो रही है. यहां कर्नाटक में उद्योग से लेकर सूचना-प्रौद्योगिकी तक, फिनटेक से लेकर जैव प्रौद्योगिक तक, स्टार्ट अप से लेकर तक सतत ऊर्जा, हर क्षेत्र में विकास की नई गाथा लिखी जा रही है. विकास के कुछ आंकड़े तो ऐसे हैं कि कर्नाटक सिर्फ भारत के दूसरे राज्यों को ही नहीं बल्कि कुछ देशों को भी चुनौती दे रहा है.’’ वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि इसके लिए ये बहुत जरूरी है कि निवेशकों का निवेश और भारत की प्रेरणा एक साथ जुड़ जाएं क्योंकि समावेशी, लोकतांत्रिक और मजबूत भारत का विकास ही दुनिया के विकास को गति देगा.

उन्होंने कहा, ‘‘भारत में निवेश का मतलब है, समावेश और लोकतंत्र में निवेश करना. भारत में निवेश का मतलब है दुनिया के लिए निवेश करना, एक बेहतर पृथ्वी के लिए निवेश करना और स्वच्छ व सुरक्षित दुनिया के लिए निवेश करना है.’’ उद्घाटन समारोह में राज्यपाल थावरचंद गहलोत और मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के अलावा केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, प्र‘‘ाद जोशी और राजीव चंद्रशेखर भी मौजूद थे. अधिकारियों ने बताया कि जीआईएम का यह संस्करण ‘बिल्ड फॉर द वर्ल्ड’ विषय के तहत आयोजित किया जा रहा है, जो कर्नाटक की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लक्ष्य को दर्शाता है.