तिरुवनंतपुरम. केरल सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों में राज्यपाल की जगह प्रतिष्ठित शिक्षाविदों को कुलाधिपति बनाने के लिए बुधवार को अध्यादेश लाने का फैसला किया. कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों ने इस फैसले का विरोध किया है. मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में बताया गया कि आज हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया. एलडीएफ नीत राज्य सरकार का यह कदम विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति समेत कामकाज के विषय पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के साथ चल रहे उसके गतिरोध के बीच आया है.

कांग्रेस और भाजपा ने फैसले का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि राज्य मंत्रिमंडल का फैसला केरल में विश्वविद्यालयों को ‘वामपंथी केंद्र’ बनाने के उद्देश्य से लिया गया है. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि यदि अध्यादेश लागू किया जाता है तो विश्वविद्यालयों में कुलपति समेत सभी नियुक्तियों का फैसला एकेजी सेंटर करेगा जो सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का प्रदेश मुख्यालय है.

मुख्यमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला किया गया कि खान से अध्यादेश को मंजूरी देने की सिफारिश की जाएगी जो विश्वविद्यालय कानूनों में कुलापधिपति की नियुक्ति से संबंधित धारा को हटा देगा. इस धारा में कहा गया है कि राज्यपाल राज्य के 14 विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी होंगे.

उसने कहा कि बैठक में भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश मदन मोहन पुंछी की अध्यक्षता वाले पुंछी आयोग की सिफारिशों पर भी विचार किया गया कि राज्यपाल को विश्वविद्यालयों का प्रमुख नियुक्त करना ठीक नहीं होगा क्योंकि संविधान के तहत उनके अन्य दायित्व भी हैं. बयान के अनुसार आयोग की सिफारिशों और राज्यपाल द्वारा राज्य में उच्च शिक्षा को दिये गये महत्व के मद्देनजर विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में प्रतिष्ठित शिक्षाविदों की नियुक्ति का फैसला किया गया है.

मंत्रिमंडल की राय थी कि विश्वविद्यालयों में शीर्ष पद पर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञता वाले किसी व्यक्ति को बैठाना लाभकारी होगा ताकि केरल के उच्च शिक्षण केंद्रों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की दीर्घकालिक योजना तैयार की जा सके.
राज्य की उच्च शिक्षा मंत्री आर ंिबदू ने भी यहां संवाददाताओं से बातचीत में इसकी पुष्टि की. उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्य में उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालयों में सुधार के लिए यह फैसला किया है.

क्या राज्यपाल खान इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर करेंगे, इस सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राज्यपाल अपने संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप काम करेंगे. राज्य के 11 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति के खिलाफ खान के हालिया कदम के संदर्भ में ंिबदू ने कहा कि पिछले दिनों विश्वविद्यालयों के कामकाज में हस्तक्षेप किया गया जिसका उद्देश्य उन्हें दिशाहीन बनाना था और इससे निश्चित रूप से केरल में उच्च शिक्षा के स्तर को लेकर ंिचताएं पैदा हुई हैं.

राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी डी सतीशन ने मंत्रिमंडल के फैसले का विरोध किया और कहा कि इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों को ‘वामपंथी केंद्र’ बनाना है. उन्होंने कहा कि कुलाधिपति बदलना सरकार और मुख्यमंत्री की गलतियों का कोई हल या उपाय नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर राज्यपाल को हटाया जाता है तो जिस तरह पिछले दरवाजे से पार्टी नेताओं के रिश्तेदारों की नियुक्ति होती है, उसी तरह एकेजी सेंटर से कुलपतियों का चयन किया जाएगा.

सतीशन ने कहा कि इस फैसले से राज्य में उच्च शिक्षा का नुकसान ही होगा जैसा पश्चिम बंगाल में हुआ. सतीशन ने यह आरोप भी लगाया कि अध्यादेश का उद्देश्य कुलपतियों की नियुक्ति के संबंध में उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले को कमतर करना भी होगा.
भाजपा के प्रदेश महासचिव एम टी रमेश ने भी इसी तर्ज पर कहा कि अध्यादेश इसलिए लाया जा रहा है क्योंकि राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में माकपा नेताओं के रिश्तेदारों और पसंदीदा नेताओं की नियुक्ति की राज्य सरकार की योजना से सहमति नहीं जताई.

भाजपा नेता ने आरोप लगाया, ‘‘इसलिए, उन्होंने एक ऐसे राज्यपाल को हटाने का फैसला किया जो भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के खिलाफ हैं. यह फैसला जन-विरोधी, शिक्षा-विरोधी और छात्र-विरोधी है. यह विश्वविद्यालयों की प्रगति के विरुद्ध है.’’ उन्होंने भी कहा कि अध्यादेश लागू किया जाएगा तो विश्वविद्यालयों में सभी नियुक्तियों का फैसला माकपा के प्रदेश मुख्यालय में किया जाएगा.

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