मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की संवेदनशील पहल
रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में संचालित बाल देख-रेख संस्थाओं से बाहर जाने वाले बालक-बालिकाओं के पुनर्वास के लिए बड़ा निर्णय लिया है। बाल देख-रेख संस्थाओं से बाहर जाने वाले 18 वर्ष से अधिक आयु के बालक-बालिकाओं को पुनर्वासित और पुनर्स्थापित करने के लिए राज्य सरकार सहयोग देगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा है कि पुनर्वास योजना में बालक-बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक आर्थिक सहायता की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को योजना में रोजगार सुनिश्चितता, आवास सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि योजना का लाभ 21 वर्ष तक बालक-बालिकाओं को मिले। ऐसे युवाओं के व्यावसायिक कौशल विकास की भी व्यवस्था हो, जिससे वे स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। मुख्यमंत्री बघेल ने देख-रेख संस्थाओं से बाहर जाने वाले बालक-बालिकाओं के लिए योजना में सामुदायिक सामूहिक आवास की व्यवस्था का प्रावधान करने के निर्देश भी दिए हैं।
प्रदेश के छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए छत्तीसगढ़ सरकार राजस्थान के कोटा में बनाएगी, छात्रावास
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर उन्हें अवगत कराया है कि छत्तीसगढ़ सरकार राजस्थान के कोटा में कोचिंग करने वाले राज्य के छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए छात्रावास बनाना चाहती है। बघेल ने छात्रावास हेतु निःशुल्क भू-खण्ड आबंटित करने का आग्रह गहलोत से किया है।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने पत्र में लिखा है कि राजस्थान के कोटा में विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों में प्रवेश के लिए कोचिंग की अच्छी व्यवस्था होने के कारण छत्तीसगढ़ के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में कोचिंग प्राप्त करने के लिए कोटा, राजस्थान जाते हैं। छत्तीसगढ़ शासन इन छात्र-छात्राओं के लिए कोटा में एक छात्रावास का निर्माण करना चाहता है। बघेल ने राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री गहलोत से कोटा में किसी ऐसे स्थान पर छत्तीसगढ़ शासन को निःशुल्क लगभग 01 एकड का भूखण्ड आबंटित करने का आग्रह किया है, जहां से कोचिंग संस्थाओं की दूरी अधिक न हो।
