माकन राजस्थान प्रभारी बने रहने के इच्छुक नहीं, पार्टी ने जिम्मेदारी निभाते रहने के लिए कहा

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नयी दिल्ली/जयपुर. . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन ने राजस्थान प्रभारी का पद छोड़ने की इच्छा भले ही जता दी हो, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उनसे यह जिम्मेदारी निभाते रहने के लिए कहा है. सूत्रों ने यह जानकारी दी है. सूत्रों का कहना है कि माकन इस बात से क्षुब्ध हैं कि जयपुर के 25 सितंबर के राजनीतिक घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार जाने माने वाले नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

माकन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से छह महीने पहले आग्रह किया था कि उन्हें पद से मुक्त किया जाए.
उनका कहना है, ‘‘मैं इस जिम्मेदारी को छोड़ना चाहता हूं ताकि दिल्ली में गैर सरकारी संगठनों और श्रमिक संगठनों के माध्यम से दिल्ली में काम कर सकूं और मुद्दों पर आम आदमी पार्टी का प्रतिवाद कर सकूं.’’ पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अभी माकन के पद छोड़ने की पेशकश पर कोई फैसला नहीं हुआ है.

सूत्रों के अनुसार, माकन ने खरगे से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा था और कहा कि राजस्थान में कांग्रेस विधायक दल की बैठक फिर से बुलाई जाए और बागी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाए. सूत्रों का कहना है कि माकन ने खरगे से यह भी कहा कि राजस्थान में संकट के लिए जिम्मेदार नेताओं को ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से जुड़ी जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद उनके लिए स्थिति असहज हो गई. माकन ने 25 सितंबर के जयपुर के राजनीतिक घटनाक्रम का हवाला देते हुए राजस्थान प्रभारी की जिम्मेदारी छोड़ने की इच्छा जताई है.

उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष खरगे को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि यह पार्टी के हित में है कि राजस्थान के लिए नया प्रभारी नियुक्त किया जाए. माकन ने यह पत्र गत आठ नवंबर को लिखा था. उल्लेखनीय है कि 25 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास पर कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक बुलाई गई थी. इसे कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव से पहले मुख्यमंत्री को बदलने की कवायद के रूप में देखा गया था, क्योंकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था.

हालांकि, सीएलपी की बैठक नहीं हो सकी थी, क्योंकि गहलोत के वफादार विधायकों ने संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर समानांतर बैठक की थी और सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के किसी भी संभावित कदम के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी को अपना इस्तीफा सौंप दिया था.

इन विधायकों का कहना था कि अगर विधायक दल का नया नेता चुनना है तो वह उन 102 विधायकों में से हो, जिन्होंने जुलाई 2020 में राजनीतिक संकट के दौरान अशोक गहलोत नीत सरकार का समर्थन किया था. तब पायलट और 18 अन्य विधायकों ने गहलोत के खिलाफ बगावत की थी.

इसके बाद कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने मंत्री शांति धारीवाल और महेश जोशी तथा पार्टी नेता धर्मेंद्र राठौड़ को उनकी इस ‘घोर अनुशासनहीनता’ के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया था और उनसे 10 दिन के भीतर यह बताने के लिए कहा था कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए.

अनुशासनहीनता के नोटिस पर कार्रवाई नहीं होने से व्यथित माकन ने इस्तीफा दिया: बैरवा

राजस्थान अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष खिलाड़ी लाल बैरवा ने कहा कि अनुशासनहीनता नोटिस के 51 दिन बीत जाने के बाद भी राज्य के नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से व्यथित होकर कांग्रेस नेता अजय माकन ने राजस्थान के प्रभारी पद से इस्तीफा दिया है.

वैरवा ने कहा कि राज्य और देश में चर्चा है कि जिन लोगों को अनुशासनहीनता के लिए नोटिस दिया गया था, उन्हें अब राज्य में शुरू होने वाली आगामी भारत जोड़ो यात्रा की व्यवस्था करने का काम देकर पुरस्कृत किया जा रहा है. वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोंिवद सिंह डोटासरा ने कहा कि पार्टी का नया अध्यक्ष चुने जाने के बाद संगठन में सभी ने अपना इस्तीफा दे दिया है.

बैरवा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘आज आम कांग्रेस जन को जो दुख है और तकलीफ है, वो यह है कि हमारे जो प्रभारी महासचिव (अजय माकन) को यह कहना पड़ा कि 25 सितम्बर (विधायक दल की प्रस्तावित बैठक) को आज 51 दिन हो गये.. लोग गिन तो सब रहे हैं.. लेकिन उन व्यक्तियों को जो हमारे आलाकमान कहे जाते है.. उनको भी यह याद दिलाना पड़ा कि 51 दिन होने पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है और इसी पीड़ा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे राजस्थान से बिल्कुल अलग कर दिया जाये मैं इसमें अपनी भागीदारी नहीं निभा पाऊंगा.’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘ आज पूरे राजस्थान में नहीं हिंदुस्तान में चर्चा है कि जो लोग नोटिस लिये हुए है उन पर कार्यवाही करने की बजाय उनको भारत जोड़ो यात्रा का प्रबंधन देखने का काम देकर पुरस्कृत किया जा रहा है. इस तरह की बातें सब जगह चल रही हे वो ठीक नहीं है. ’’ उल्लेखनीय है कि 25 सितंबर को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमे के विधायक उनके निवास पर विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं हुए और उन्होंने स्वायत्त शासन नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर एक समानांतर बैठक की थी. उस वक्त कांग्रेस पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खरगे और अजय माकन ने गहलोत के निवास पर विधायक दल की बैठक बुलाई थी.

धारीवाल के आवास पर बैठक के बाद विधायक विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के आवास पर गए और अशोक गहलोत जो उस समय कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ में थे उनके स्थान पर सचिन पायलट को नए मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त करने के किसी भी कदम के खिलाफ सभी ने सी पी जोशी को इस्तीफा सौंप दिया. .

पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक ओर जलदाय मंत्री महेश जोशी, यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल और आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ को कारण बताओ नोटिस जारी किया. बैरवा ने पार्टी आलाकमान से आग्रह किया कि भारत जोड़ो यात्रा से पहले नोटिस या कार्रवाई से संबंधित आवश्यक बदलाव तुरंत करें,इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे.

भारत जोड़ो यात्रा के मार्ग में परिवर्तन किये जाने संबंधित एक सवाल का जवाब देते हुए बैरवा ने कहा \”मेरा मानना है कि यह सही नहीं होगा और ऐसा नहीं किया जाना चाहिए. हमारे पास मुद्दों को हल करने के लिए पर्याप्त समय है और सरकार कुछ भी कर सकती है. सरकार को बातचीत करनी चाहिए.\” कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोंिवद सिंह डोटासरा ने कहा कि पार्टी का नया अध्यक्ष चुने जाने के बाद संगठन में सभी ने अपना इस्तीफा दे दिया है.

डोटासरा ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा \”यह एक प्रक्रिया है. जब नए राष्ट्रीय पार्टी अध्यक्ष कार्यभार संभालते हैं तो नई कार्यकारी समिति का गठन किया जाता है. सभी ने अपना इस्तीफा दे दिया है. हमने एक प्रस्ताव भी पारित किया है और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को नई टीम चुनने का अधिकार दिया है.\” उन्होंने कहा कि पार्टी के नए अध्यक्ष पद के उम्मीदवार की घोषणा होने पर कांग्रेस र्विकंग कमेटी के सदस्यों, महासचिवों सहित सभी ने अपना इस्तीफा दे दिया है.