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पीएम, सीएम, मंत्रियों को उनके पद से हटाने वाले विधेयक हैं लोकतंत्र विरोधी : चंद्रशेखर

नयी दिल्ली: आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद चंद्रशेखर ने बृहस्पतिवार को कहा कि गंभीर अपराधों के आरोपों में 30 दिनों तक गिरफ्तार रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों या मंत्रियों को उनके पद से हटाने का प्रावधान वाले तीन नये विधेयक पूरी तरह से ‘लोकतंत्र विरोधी’ हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में गंभीर आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार रहने की स्थिति में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को उनके पद से हटाने से संबंधित तीन विधेयक पेश किए, जिसका विपक्षी सांसदों ने तीखा विरोध किया और मसौदा कानून की प्रतियां तक फाड़ दीं । वे नारे लगाते हुए शाह की सीट के पास पहुंच गए।

उत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद चंद्रशेखर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ये विधेयक पूरी तरह से लोकतंत्र विरोधी, संविधान पर हमला और अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करने वाली जनता का अपमान हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से एजेंसियां ??काम कर रही हैं, जिस तरह से वे विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं, वैसे में ये विधेयक विपक्ष को निशाना बनाने के लिए लाये गये हैं। यह संविधान पर हमला है और हम संविधान पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसलिए हम इसका विरोध कर रहे हैं।’’ जब उनसे यह कहा गया कि भाजपा का कहना है कि उनके मंत्री भी इन विधेयकों के दायरे में आएंगे, तब चंद्रशेखर ने कहा,‘‘क्या ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने अब तक किसी भाजपा मंत्री पर छापा मारा है? सभी ईडी छापे विपक्षी नेताओं पर पड़े हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे नेता हैं जिन्हें भ्रष्ट कहा जाता था, लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें ‘उपमुख्यमंत्री’ बना दिया गया। महाराष्ट्र, असम इसके उदाहरण हैं… बी एस येदियुरप्पा एक उदाहरण हैं…।’’ चंद्रशेखर ने कहा, ‘‘लोग देख रहे हैं कि लोकतंत्र की जगह निरंकुशता आ रही है।’’ गृह मंत्री द्वारा बुधवार को पेश किए गए और संसद की एक संयुक्त समिति को भेजे गए तीन विधेयक हैं: ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’, ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025’।

विधेयकों में प्रस्ताव दिया गया है कि यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री या मुख्यमंत्री को ऐसे अपराधों के लिए लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार कर हिरासत में रखा जाता है, जिनमें कम से कम पांच साल की जेल की सजा हो सकती है, तो वे 31वें दिन अपना पद गंवा देंगे।

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