नयी दिल्ली. अगले साल अप्रैल-मई के लिए निर्धारित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्रातकोत्तर (नीट-पीजी) इस तरह की आखिरी परीक्षा हो सकती है क्योंकि इसके बाद पीजी चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिला एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्रों द्वारा दिये जाने वाले नेशनल एग्जिट टेस्ट (एनईएक्सटी) के नतीजों पर आधारित होगा. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को बताया, ऐसा माना जाता है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने सोमवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को बताया कि वह दिसंबर 2023 में एनईएक्सटी आयोजित करना चाहता है.
उन्होंने बताया कि यदि परीक्षा दिसंबर 2023 में आयोजित की जाती है, तो 2019-2020 बैच के एमबीबीएस छात्रों को परीक्षा देनी होगी. परीक्षा के नतीजों का इस्तेमाल 2024-2025 बैच से स्रातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए भी किया जाएगा.

एनएमसी अधिनियम के अनुसार एनईएक्सटी, एमबीबीएस के अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए होने वाली एक सामान्य योग्यता परीक्षा होगी, जो आधुनिक चिकित्सा पद्धति की प्रैक्टिस करने के लिए एक लाइसेंस परीक्षा, स्रातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिले के वास्ते योग्यता-आधारित प्रवेश परीक्षा और भारत में प्रैक्टिस करने के इच्छुक विदेशी चिकित्सा स्रातकों के लिए एक स्क्रींिनग परीक्षा के रूप में काम करेगी.

सरकार ने सितंबर 2024 तक एनईएक्सटी आयोजित करने की समय सीमा बढ़ाने के लिए एनएमसी अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों को सितंबर में लागू किया था. कानून के अनुसार, आयोग को लागू होने के तीन साल के भीतर एक सामान्य अंतिम वर्ष की स्रातक चिकित्सा परीक्षा, एनईएक्सटी आयोजित करनी थी. अधिनियम सितंबर 2020 में लागू हुआ था.

सूत्रों ने बताया कि नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान बोर्ड परीक्षा के बजाय यह परीक्षा आयोजित कर सकता है लेकिन इस मामले पर फैसला लिया जाना बाकी है. अधिकारियों ने कहा कि एनईएक्सटी आयोजित करने के लिए परीक्षा के तौर-तरीकों, पाठ्यक्रम, प्रकार और पद्धति जैसी तैयारियों की आवश्यकता होती है और छात्रों को भी इसकी तैयारी के लिए पर्याप्त समय देना होगा.

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