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संसद ने छह दशक पुराने कानून को बदलने के लिए नए आयकर विधेयक को मंजूरी दी

नयी दिल्ली. संसद ने छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 को बदलने के लिए मंगलवार को नए आयकर विधेयक को मंजूरी दे दी. नया कानून एक अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा. राज्यसभा में आयकर विधेयक, 2025 पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा इसमें कर की कोई नयी दर नहीं है और इसमें सिर्फ भाषा को सरल बनाया गया है, ताकि जटिल आयकर कानून को समझने में आसानी हो.

विधेयक में मौजूदा कानून के अनावश्यक प्रावधानों और पुरानी भाषा को हटा दिया गया है और 1961 के आयकर अधिनियम में धाराओं की संख्या 819 से घटाकर 536 और अध्यायों की संख्या 47 से घटाकर 23 कर दी गयी है. नए आयकर विधेयक में शब्दों की संख्या 5.12 लाख से घटाकर 2.6 लाख कर दी गई है. विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति के बीच सीतारमण ने कहा, ”ये बदलाव केवल सतही नहीं हैं; ये कर प्रशासन के प्रति नए व सरलीकृत दृष्टिकोण को दर्शाते हैं. यह अधिक संक्षिप्त और अधिक केंद्रित कानून है, जिसे पढ़ने, समझने और लागू करने में आसानी होगी.” राज्यसभा ने आयकर विधेयक, 2025 के साथ ही कराधान विधि (संशोधन) विधेयक, 2025 को भी चर्चा एवं वित्त मंत्री के जवाब के बाद लोकसभा को लौटा दिया. लोकसभा ने सोमवार को दोनों विधेयकों को मंजूरी दी थी.
वित्त मंत्री ने कहा, ”किसी भी भ्रम को दूर करने के लिए, मैं कहना चाहती हूं कि इस नए कानून को लाने का उद्देश्य भाषा को सरल और स्पष्ट बनाना है.” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट निर्देश था कि कोविड हो या न हो, लोगों पर कर का बोझ नहीं बढ़ाया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, ”हमने कोई नया कर नहीं लगाया है.” उच्च सदन में इन दोनों विधेयकों पर चर्चा के समय कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्य मौजूद नहीं थे. विपक्षी सदस्यों ने मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग पर सदन से वाकऑउट किया था.

वित्त मंत्री ने कहा, ”मुझे आश्चर्य है कि विपक्ष इसमें भाग नहीं लेना चाहता. विपक्ष ने कार्य मंत्रणा समिति में विधेयक पर लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में चर्चा करने पर सहमति जताई थी… हम चर्चा करना चाहते हैं. हम लोकसभा में 16 घंटे और यहां भी (राज्यसभा में) 16 घंटे चर्चा के लिए सहमत हुए थे…आज वे कहाँ हैं?” नया आयकर विधेयक रिकॉर्ड छह महीने के भीतर तैयार किया गया और फरवरी 2025 के बजट सत्र में पेश किया गया.

नए विधेयक का प्रारूप तैयार करने में लगभग 75,000 मानव-घंटे लगे, जिसमें आयकर विभाग के सर्मिपत अधिकारियों की एक टीम ने अथक परिश्रम किया. वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त मंत्रालय जल्द ही नए कानून के बारे में अधिक जानकारी के लिए अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) जारी करेगा. उन्होंने कहा कि मंत्रालय के अधिकारी नियम बनाने में व्यस्त हैं, जो विधेयक की तरह ही सरल होंगे. उन्होंने कहा कि नया कानून एक अप्रैल, 2026 से लागू होगा, इसलिए आयकर विभाग की कंप्यूटर प्रणाली को उस हिसाब से दुरुस्त करना आवश्यक है.

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