मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मुद्रास्फीति पर उसी तरह नजर रख रहा है, जैसे महाभारत में अर्जुन ने एक घूमने वाली मछली की आंख में तीर मारने के लिए ध्यान केंद्रित करते हुए रखी थी. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को यह बात कही. दास ने यहां बैंकरों के वार्षिक एफआईबीएसी सम्मेलन में कहा, ‘‘अर्जुन के कौशल की बराबरी कोई नहीं कर सकता, लेकिन हमारी (आरबीआई) अर्जुन की तरह मुद्रास्फीति पर लगातार नजर रखने की कोशिश है.’’ यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब मुद्रास्फीति काफी तेज है और आरबीआई जल्द ही सरकार को इस संबंध में स्पष्टीकरण देगा.

दास ने हाल के दिनों में महंगाई के मुद्दे पर आलोचना के बीच आरबीआई की रणनीतियों का बचाव किया. उन्होंने कहा कि देश को भारी कीमत चुकानी पड़ती, अगर आरबीआई ने समय से पहले सख्ती शुरू कर देता. दास ने यह भी कहा कि आरबीआई की दर निर्धारित करने वाली समिति बृहस्पतिवार को एक बैठक करेगी. इस बैठक में एक स्पष्टीकरण तैयार किया जाएगा कि किन परिस्थितियों में मुद्रास्फीति लक्ष्य से अधिक हो गई. इसमें सुधारात्मक उपाय का विवरण भी होगा.

खुदरा ई-रुपये का परीक्षण इसी महीने शुरू हो जाएगा: आरबीआई गवर्नर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) थोक ई-रुपये के पायलट परीक्षण के बाद इसी महीने खुदरा ई-रुपये का परीक्षण शुरू कर देगा. आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को यह बात कही. उन्होंने केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) की शुरुआत को देश में मुद्राओं के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण बताया. मंगलवार को सीमित बैंकों के बीच थोक लेनदेन के लिए ई-रुपये की शुरुआत की गई थी. उन्होंने कहा कि इससे कारोबार करने का तरीका काफी हद तक बदल जाएगा.

दास ने यहां बैंकरों के वार्षिक एफआईबीएसी सम्मेलन में कहा, ‘‘खुदरा कारोबार के लिए सीबीडीसी का परीक्षण इस महीने के अंत में शुरू किया जाएगा. हम तारीख की घोषणा अलग से करेंगे.’’ उन्होंने कहा कि आरबीआई ‘निकट भविष्य में’ सीबीडीसी को पूरी तरह पेश करना चाहता है. हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई समयसीमा नहीं बताई.

दास ने कहा, ‘‘मैं एक तय तारीख नहीं बताना चाहता, जिस समय तक सीबीडीसी को पूरी तरह पेश किया जाएगा, क्योंकि इस संबंध में हमें बहुत सावधानी से आगे बढ़ना है. दुनिया में ऐसा पहली बार हो रहा है. हम बहुत जल्दबाजी करना नहीं चाहते.’’ उन्होंने कहा कि कुछ तकनीकी चुनौतियां हो सकती हैं, कुछ प्रक्रिया संबंधी चुनौतियां हो सकती हैं और आरबीआई उन सभी पहलुओं को दूर करना चाहता है. केंद्रीय बैंक सीबीडीसी को इस तरह पेश करना चाहता है ताकि कोई समस्या पैदा न हो. दास ने इस दौरान कृषि ऋण को डिजिटल करने पर पायलट परियोजना के अनुभवों को बताया और कहा कि आरबीआई 2023 में इसे छोटे कारोबारी ऋणों के लिए विस्तारित करना चाहता है.

अर्थव्यवस्था को गिरने से रोकने के लिए जल्दबाजी में सख्त कदम उठाने से बचे : दास

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को अपनी नीतियों का बचाव करते कहा कि अगर समय से पहले ब्याज दरों को सख्त करना शुरू कर दिया होता तो अर्थव्यवस्था में वृद्धि नीचे की ओर मुड़ जाती. दास ने बुधवार को यहां बैंकरों के वार्षिक एफआईबीएसी सम्मेलन में मुद्रास्फीति लक्ष्य से चूकने के लिए आलोचना के बीच यह कहा है.

दास ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया में मजबूत और आशावाद की कहानी के रूप में देखा जा रहा है और मुद्रास्फीति के अब नरम होने की उम्मीद है. यह स्वीकार करते हुए कि बढ़ती मुद्रास्फीति के कारण केंद्रीय बैंक अपने प्राथमिक लक्ष्य से चूक गया है, दास ने कहा कि ‘प्रतितथ्यात्मक’ पहलू की भी सराहना करने की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा, ‘‘अगर हमने जल्दी सख्त या आक्रामक रुख अपनाया होता तो यह निर्णय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महंगा पड़ता. यह इस देश के नागरिकों के लिए भी महंगा होता और हमें इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती.’’ दास ने कहा, ‘‘हमने ब्याज दरों को आक्रामक रूप नहीं बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से प्रभावित होने से रोका है. आरबीआई अर्थव्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया को बाधित नहीं करना चाहता और इसे सुरक्षित स्थिति की तरफ मोड़ना चाहता है.’’ उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति के लक्ष्य से चूकने को लेकर सरकार को जवाब देने के लिए ब्याज दर तय करने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बृहस्पतिवार को बैठक कर रही है.

आरबीआई गवर्नर ने साथ ही सरकार को लिखे जाने वाले पत्र को सार्वजनिक न करने के आरबीआई के कदम का भी बचाव किया.
आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार अधिक व्यापक, समय पर और लक्षित राजकोषीय, मौद्रिक और नियामकीय नीतियों पर आधारित है.

वहीं, रुपये में गिरावट पर चल रही बहस के बीच दास ने सभी से स्थिति को भावनात्मक रूप से नहीं देखने को कहा और जोर दिया कि घरेलू मुद्रा ने व्यवस्थित तरीके से प्रदर्शन किया है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) की शुरुआत देश के लिए ऐतिहासिक क्षण है और यह व्यापार करने के तरीके को बदल देगी.

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