पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए नौकरियों को लेकर माकपा नेता को लिखे गये पत्र से राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ

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तिरुवनंतपुरम: तिरुवनंतपुरम नगर निगम में अस्थायी पदों पर नियुक्ति के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं की प्राथमिकता सूची उपलब्ध कराने का अनुरोध करते हुए महापौर आर्य राजेंद्रन द्वारा सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एक शीर्ष नेता को कथित रूप से पत्र लिखे जाने से केरल में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस पत्र को लेकर विपक्षी कंग्रेस और भाजपा ने महापौर से तत्काल इस्तीफे की मांग की है।

यह कथित पत्र 23 वर्षीय महापौर के आधिकारिक लेटरपैड पर एक नवंबर को लिखा गया और उसे माकपा के जिला सचिव अनावूर नागप्पन को भेजा गया। राजेंद्रन ने पत्र में कथित रूप से कहा है कि माकपा शासित निगम ने अपने स्वास्थ्य विभाग में दिहाड़ी आधार पर कुछ पदों पर र्किमयों की नियुक्ति करने का फैसला किया है।

इस विवादास्पद पत्र में यह भी बताया गया है कि जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ, डॉक्टर, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, लैब तकनीशिन, अंशकालिक सफाईकर्मी समेत हर श्रेणी में कितने कितने पद खाली हैं। महापौर ने कथित रूप से पार्टी जिला सचिव ने इन पदों पर नियुक्त किये जाने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं की प्राथमिकता सूची 16 नवंबर तक उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इन विभिन्न पदों के वास्ते आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 16 नवंबर है।

इस विवाद पर अनावूर नागप्पन ने ने कहा कि ऐसा कोई पत्र उनके संज्ञान में नहीं आया है और महापौर को ऐसा किसी पत्र लिखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ मुझे ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है। किसी ने जवाब भी नहीं दिया है।’’ जब उनसे पूछा गया कि कोई पुलिस शिकायत क्यों नहीं दर्ज करायी गयी, तब उन्होंने कहा कि यह प्रश्न महापौर से पूछा जाना चाहिए।

नागप्पन ने कहा कि महापौर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुर में नहीं हैं और वह कोझिकोड़ में एक कार्यक्रम में शामिल होने गयी हैं तथा फोन पर उनका उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में महापौर से बातचीत करने के बाद ही पार्टी इस मामले पर प्रतिक्रिया देगी।

स्थानीय मीडिया में इस विवादास्पद पत्र की खबर आने के बाद राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है । इस विषय पर माकपा नीत वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार पर प्रहार करते हुए कांग्रेस और भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्य संचालित संस्थानों में पार्टी कार्यकर्ताओं को घुसाने की कोशिश का यह एक और उदाहरण है।

कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘ महापौर ने पद की शपथ का उल्लंघन किया एवं भाई-भतीजावाद किया, इसलिए उन्हें इस पद बने रहने का कोई हक नहीं है। यथाशीघ्र आर्य राजेंद्रन को इस्तीफा दे देना चाहिए और उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना चाहिए।’’

महापौर पर प्रहार करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने मांग की कि वामशासित नगर निकाय के प्रशासनिक पैनल को भंग कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘ यह राज्य के लाखों युवाओं के लिए एक चुनौती है। केरल अब भयावह स्थिति से गुजर रहा है जहां यदि आपको किसी सरकारी संगठन में नौकरी चाहिए तो आपको माकपा सदस्य या माकपा नेताओं या मंत्रियों का रिश्तेदार होना होगा ।’’

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