सिनियाह द्वीप (यूएई). संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) तट से थोड़ी दूर एक द्वीप पर प्राचीन ईसाई मठ मिला है जो संभवत: अरब प्रायद्वीप में इस्लाम के प्रसार से वर्षों पूर्व का है. अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह ऐलान किया. सिनियाह द्वीप स्थित यह मठ फारस की खाड़ी के तटवर्ती इलाकों में प्रारंभिक ईसाईयत के इतिहास के बारे में नई रोशनी डालता है.

यूएई में मिला यह इस तरह का दूसरा मठ है जिसे करीब 1400 साल पुराना बतया जा रहा है, जो अरब रेगिस्तान में तेल उद्योग के पनपने से पहले का है जिसके कारण एक एकीकृत राष्ट्र समेत अबु धाबी और दुबई में ऊंची-ऊंची इमारतें बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ.
ये दो मठ इतिहास में गुम हो गये क्योंकि विशेषज्ञों का मानना है कि ईसाई धीरे-धीरे इस्लाम में परिर्वितत हो गये जिसका इस क्षेत्र में बहुत व्यापक रूप से विकास हुआ.

आज मध्य पूर्व के व्यापक क्षेत्र में ईसाई समुदाय अल्पसंख्यक के रूप में हैं. हालांकि, पोप फ्रांसिस नजदीकी बहरीन में मुस्लिम नेताओं के साथ अंतरधार्मिक वार्ता को बढ़ावा देने के लिए बृहस्पतिवार को ही पहुंच रहे हैं. यूएई विश्वविद्यालय में पुरातत्व विभाग के एक एसोसिएट प्रोफेसर टिमोथी पावर ने नये खोजे गये मठ की जांच में मदद की है. टिमोथी की नजर में यूईए आज ‘देशों के मिलन ंिबदु’ के रूप में उभरा है.

उन्होंने कहा कि तथ्य यह है कि कुछ इस तरह की चीजें यहां 1000 साल पहले घटित हो रही थीं जो वाकई उल्लेखनीय हैं और यह एक ऐसी कहानी है जिसे लोगों को बताने की जरूरत है. यह मठ सिनियाह द्वीप पर है जो उम्म अल-क्वैन स्थित खेर अल-बीदर दलदली भूमि की रक्षा करता है. यह द्वीप दुबई के उत्तरपूर्व में करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर फारस की खाड़ी के तट के पास स्थित है.

कार्बन डेंिटग से इस मठ की स्थापना तिथि 534 ईस्वी से 656 ईस्वी के बीच बताई गई, जबकि इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद का जन्म करीब 570 ईस्वी में हुआ था और उन्होंने मक्का (आज का सऊदी अरब) विजय के बाद 632 में दुनिया को अलविदा कहा था.
पुरातत्ववेत्ताओं ने बहरीन, इराक, ईरान, कुवैत और सऊदी अरब में इस तरह के अन्य ईसाई मठ खोजे हैं. वर्ष 1990 के दशक में पुरातत्ववेत्ताओं ने यूएई में पहले ईसाई मठ की खोज सर बानी यस द्वीप पर की थी, जो इस दूसरे ईसाई मठ जितना ही पुराना है.

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