शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का 89 साल की उम्र में निधन

नयी दिल्ली/मिर्जापुर/वाराणसी. ‘पद्म विभूषण’ हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का बृहस्पतिवार सुबह निधन हो गया. वह 89 वर्ष के थे. परिवार के सूत्रों ने बताया कि मिश्र ने सुबह चार बजे अंतिम श्वांस ली. वह पिछले काफी दिनों से बीमार थे और मिर्जापुर में अपनी सबसे छोटी बेटी के परिवार के साथ रहते थे.
छन्नूलाल की बेटी नम्रता मिश्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”उम्र संबंधी समस्याओं के कारण वह पिछले 17-18 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे. आज सुबह करीब साढ़े चार बजे घर पर उनका निधन हो गया.” उन्होंने बताया कि वैसे तो उनकी तबीयत पिछले छह-सात महीने से खराब थी. फेफड़ों में संक्रमण के कारण सांस लेने में दिक्कत भी हो रही थी. इसके अलावा उनके शरीर में हीमोग्लोबिन की भी कमी थी. कुछ दिन पहले उन्हें दिल का दौरा भी पड़ा था जिसके बाद उन्हें बीएचयू (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) रेफर किया गया था.
मिश्र का अंतिम संस्कार शाम पांच बजे वाराणसी में किया जाएगा.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी महान शास्त्रीय कलाकार के निधन पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ”भारतीय शास्त्रीय संगीत के मर्मज्ञ, ‘पद्म विभूषण’ प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी का निधन अत्यंत दु?खद एवं शास्त्रीय संगीत विधा की अपूरणीय क्षति है. उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!” मुख्यमंत्री ने कहा, ”आपने अपना पूरा जीवन भारतीय शास्त्रीय गीत-संगीत के उत्थान में सर्मिपत कर दिया. आपका गायन कला साधकों के लिए एक प्रेरणा है. प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को सद्गति व उनके शोकाकुल परिजनों, अनुयायियों एवं प्रशंसकों को यह अथाह दु?ख सहन करने की शक्ति प्रदान करें. ॐ शांति!” संगीत सम्राट के नाम से विख्यात ‘पद्य विभूषण’ पंडित छन्नूलाल मिश्र के परिवार में तीन पुत्रियां और एक पुत्र है. उनकी पत्नी का चार वर्ष पूर्व देहांत हो गया था. उनके पुत्र रामकुमार मिश्र भी जाने माने तबला वादक हैं.
साल 1936 में आजमगढ़ में जन्मे मिश्र हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के दिग्गज थे. उन्होंने ख्याल, ठुमरी, दादरा, चैती, कजरी और भजन जैसी शैलियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया. मिश्र ने अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्र के साथ-साथ किराना घराने के उस्ताद अब्दुल गनी खान और ठाकुर जयदेव सिंह से संगीत की शिक्षा प्राप्त की थी. वे बनारस घराने और ठुमरी की पूरब अंग परंपरा के प्रतिपादकों में थे. उन्हें 2020 में पदम विभूषण और 2010 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया.
पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन से भारतीय संगीत को अपूरणीय क्षति: राष्ट्रपति मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन से भारतीय संगीत को अपूरणीय क्षति हुई है. राष्ट्रपति ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा ”बनारस घराने के एक प्रकाशमान व्यक्तित्व पंडित मिश्र ने शास्त्रीय गायन को नए आयाम दिए. कई अन्य सम्मानों के साथ उन्हें पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था.” मुर्मू ने कहा, “प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी का निधन भारतीय संगीत के लिए एक अपूरणीय क्षति है.” उन्होंने कहा, “मैं उनके प्रियजनों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं.”
पंडित छन्नूलाल की विरासत संगीतकारों और कलाकारों की पीढ़ियों को प्रेरित करेगी: मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने भारतीय संगीत परंपराओं को विश्व पटल पर स्थापित करने में अपना अमूल्य योगदान दिया. मोदी ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें हमेशा उनका स्नेह और आशीर्वाद मिलता रहा. उन्होंने यह भी बताया कि मिश्र 2014 में वाराणसी लोकसभा सीट से उनकी उम्मीदवारी के प्रस्तावकों में से एक थे.
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह भाव शहर और इसकी विकसित होती विरासत के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक है. बयान में मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी विरासत संगीतकारों, कलाकारों और संस्कृति के प्रति उत्साही लोगों की पीढि.यों को प्रेरित करती रहेगी.
बयान के अनुसार मोदी ने कई बार मिश्र के स्नेह और आशीर्वाद के बारे में बात करते हुए इसे अपना व्यक्तिगत सौभाग्य बताया है. उन्होंने कहा, ”उनका रिश्ता भारत की शास्त्रीय परंपराओं, आध्यात्मिक गहराई और संस्कृति की परिवर्तनकारी शक्ति के प्रति साझा सम्मान को दर्शाता है.” मोदी ने कहा कि मिश्र ने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने और भारतीय परंपरा को विश्व पटल पर स्थापित करने में अमूल्य योगदान दिया.
मोदी ने बनारस घराने के अग्रणी गायक की सराहना करते हुए कहा कि वह भारतीय कला और संस्कृति के जीवनपर्यंत उपासक रहे हैं. उन्होंने कहा, ”उनकी प्रस्तुतियों में शहर की संगीत विरासत का सार समाहित था. उन्होंने काशी में अनगिनत छात्रों का मार्गदर्शन किया और यह सुनिश्चित किया कि शहर की संगीत परंपराएं संरक्षित रहें और आगे बढ़ें. वाराणसी में उनका घर शिक्षा, भक्ति और कलात्मक उत्कृष्टता का केंद्र था.”
पद्म विभूषण कलाकार पंडित छन्नू लाल मिश्र के निधन पर वाराणसी की संगीत बिरादरी में शोक की लहर
प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पद्म विभूषण पंडित छन्नू लाल मिश्र के बृहस्पतिवार सुबह निधन से उनकी कर्मभूमि वाराणसी में शोक की लहर है. मिश्र ने मिर्जापुर में रहने वाली अपनी बेटी के घर में अंतिम सांस ली. मिश्र की बेटी नम्रता मिश्र ने बताया कि उनके पिता का पार्थिव शरीर मिर्जापुर से दोपहर तक वाराणसी लाया जाएगा जहां शाम को इनका अंतिम संस्कार किया जायेगा. वाराणसी के मशहूर सितार वादक पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्र के पुत्र पंडित देवव्रत मिश्रा ने कहा कि पंडित छन्नू लाल मिश्र का निधन संगीत जगत की अपूरणीय क्षति है.
उन्होंने बताया कि पंडित छन्नू लाल मिश्र मूलत? आजमगढ़ के हरिहरपुर के रहने वाले थे. वहां से वाराणसी आकर उन्होंने अपनी संगीत साधना को आगे बढ़ाया और इस आध्यात्मिक नगरी को अपनी कर्मस्थली बनाया. मिश्र ने बताया कि पंडित छन्नू लाल मिश्र बनारस के ठुमरी सहित सम्पूर्ण गायकी को ना केवल आगे बढ़ाया बल्कि एक अलग मुकाम पर पहुंचाया. उन्होंने वाराणसी में कई बड़े कलाकारों के बीच अपना स्थान बनाया. उनका गाया ‘खेले मसाने में होली’ गीत आज भी पूरी दुनिया में मशहूर है.
उन्होंने बताया कि पंडित छन्नू लाल मिश्र को गायकी के लिए कई पुरस्कारों से नवाजा गया. उन्हें वर्ष 2010 में पद्म भूषण और 2020 में पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया. वाराणसी की मशहूर शास्त्रीय गायिका डॉक्टर मंजू सुंदरम ने बताया ”पंडित छन्नू लाल मिश्र बहुत ही सौम्य और सरल स्वभाव के धनी थे. वह सभी से बहुत प्रेम स्नेह रखते थे. उनकी गायकी, प्रस्तुतीकरण और दर्शकों के साथ जुड़ाव गजब का था. वह लोकगीत को शास्त्रीय रूप से गाते थे.”
सुंदरम ने बताया कि वाराणसी के लोकगीतों ठुमरी, चैती, कजरी और होली को मिश्र ने शास्त्रीय रूप दे कर वैश्विक प्रसिद्धि दिलायी. उनका मंच पर आना ही दर्शकों को बहुत लुभाता था. वह गायकी के साथ ही दर्शकों को गीत का अर्थ भी समझाते थे. उनका जाना संगीत गीत विधा के लिए ऐसी क्षति है जिसे भर पाना बहुत मुश्किल है. पंडित छन्नू लाल मिश्र बनारस घराने और किराना घराना की गायिकी के प्रमुख प्रतिनिधि थे. वर्ष 2000 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2010 में पद्मभूषण और 2020 में पद्मविभूषण से अलंकृत किया गया था. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में वह वाराणसी संसदीय सीट पर भाजपा प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावक थे. वह पिछले तीन वर्षों से मिर्जापुर में महंत शिवाला स्थित अपनी बेटी डॉ. नम्रता मिश्र के आवास पर रह रहे थे.

