नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के पहले निजी रॉकेट ‘विक्रम-एस’ के सफल परीक्षण को देश के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया और शुक्रवार को कहा कि यह देश के निजी अंतरिक्ष उद्योग की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर इस उपलब्धि के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और निजी क्षेत्र की कंपनी ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ को बधाई दी.

उन्होंने कहा, ‘‘स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित रॉकेट ‘विक्रम-एस’ का आज श्रीहरिकोटा से उड़ान भरना भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण है. यह भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. इस उपलब्धि के लिए इसरो और स्काईरूट एयरोस्पेस को बधाई.’’ भारत ने चार साल पुराने एक स्टार्टअप द्वारा विकसित रॉकेट के जरिए तीन उपग्रहों को कक्षा में शुक्रवार को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया और इसी के साथ देश की अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र के प्रवेश का ‘प्रारंभ’ हो गया.
अभी तक सरकारी संस्था इसरो का ही इस क्षेत्र पर आधिपत्य था.

मोदी ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘यह उपलब्धि हमारे युवाओं की अपार प्रतिभा का प्रमाण है, जिन्होंने जून 2020 के ऐतिहासिक अंतरिक्ष क्षेत्र सुधारों का पूरा लाभ उठाया.’’ स्काईरूट एयरोस्पेस’ द्वारा बनाए गए ‘विक्रम-एस’ का पहला मिशन सफल रहा. भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई को श्रद्धांजलि देते हुए इस रॉकेट का नाम ‘विक्रम-एस’ रखा गया है. नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में इस मिशन को ‘प्रारंभ’ नाम दिया गया है. स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी क्षेत्र की कंपनी बन गयी है जिसने 2020 में केंद्र सरकार द्वारा अंतरिक्ष उद्योग को निजी क्षेत्र के लिए खोले जाने के बाद भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में कदम रखा है.

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