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देश की जनता तय करेगी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री जेल से सरकार चलाएंगे या नहीं: अमित शाह

नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि अब देश की जनता को यह तय करना होगा कि क्या जेल में रहकर किसी मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री का सरकार चलाना उचित है. इससे पहले, गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार किए गए और लगातार 30 दिन हिरासत में रखे गए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान वाले तीन विधेयक बुधवार को लोकसभा में पेश किए गए, जिन्हें सदन ने अध्ययन के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेजने का फैसला किया.

शाह ने विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच सदन में ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’, ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025’ पेश किए. बाद में उनके प्रस्ताव पर सदन ने तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने का निर्णय लिया.

शाह ने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने आप को कानून के दायरे में लाने का संविधान संशोधन पेश किया है और दूसरी ओर ”कानून के दायरे से बाहर रहने, जेल से सरकारें चलाने एवं कुर्सी का मोह न छोड़ने के लिए” कांग्रेस के नेतृत्व में पूरे विपक्ष ने इसका विरोध किया है.

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”अब देश की जनता को यह तय करना पड़ेगा कि क्या जेल में रहकर किसी मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री का सरकार चलाना उचित है?” शाह ने कहा कि देश में राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी सरकार की प्रतिबद्धता और जनता के आक्रोश को देखकर उन्होंने संसद में लोकसभा अध्यक्ष की सहमति से संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया, ताकि महत्वपूर्ण संवैधानिक पद, जैसे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री जेल में रहते हुए सरकार न चला पाएं.

उन्होंने लिखा, ”इस विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में गिरते जा रहे नैतिकता के स्तर को ऊपर उठाना और राजनीति में शुचिता लाना है.” शाह ने कहा कि इन तीनों विधेयक से जो कानून अस्तित्व में आएगा, वह यह है कि: कोई भी व्यक्ति गिरफ्तार होकर जेल से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्र या राज्य सरकार के मंत्री के रूप में शासन नहीं चला सकता है.” उन्होंने कहा, ”संविधान जब बना, तब हमारे संविधान निर्माताओं ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि भविष्य में ऐसे राजनीतिक व्यक्ति भी आएंगे, जो गिरफ्तार होने से पहले नैतिक मूल्यों पर इस्तीफा नहीं देंगे.” शाह ने कहा कि विगत कुछ वर्षों में, देश में ऐसी आश्चर्यजनक स्थिति उत्पन्न हुई कि मुख्यमंत्री या मंत्री बिना इस्तीफा दिए जेल से अनैतिक रूप से सरकार चलाते रहे.

उन्होंने कहा कि इस विधेयक में आरोपी नेता को गिरफ्तारी के 30 दिन के अंदर अदालत से जमानत लेने का प्रावधान भी दिया गया है. अगर वे 30 दिन में जमानत प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो 31वें दिन या तो केंद्र में प्रधानमंत्री और राज्यों में मुख्यमंत्री उन्हें पदों से हटाएंगे, अन्यथा वे स्वयं ही कानूनी रूप से कार्य करने के लिए अयोग्य हो जाएंगे.

उन्होंने कहा, ”कानूनी प्रक्रिया के बाद ऐसे नेता को यदि जमानत मिलेगी, तब वे अपने पद पर पुन? आसीन हो सकते हैं.” शाह ने कहा कि देश को वह समय भी याद है, जब इसी महान सदन में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संविधान संशोधन संख्या-39 से प्रधानमंत्री को ऐसा विशेषाधिकार दिया कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती थी.

उन्होंने कहा, ”एक तरफ यह कांग्रेस की कार्य संस्कृति और उनकी नीति है कि वे प्रधानमंत्री को संविधान संशोधन करके कानून से ऊपर करते हैं. जबकि, दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी की नीति है कि हम हमारी सरकार के प्रधानमंत्री, मंत्री, मुख्यमंत्रियों को ही कानून के दायरे में ला रहे हैं.” गृह मंत्री ने कहा, ”आज सदन में कांग्रेस के एक नेता ने मेरे बारे में व्यक्तिगत टिप्पणी भी की कि जब कांग्रेस ने मुझे पूरी तरह से फर्जी मामले में फंसाया और गिरफ्तार कराया, तब मैंने इस्तीफा नहीं दिया.”

उन्होंने कहा, ”मैं कांग्रेस को याद दिलाना चाहता हूं कि मैंने गिरफ्तार होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था और जमानत पर बाहर आने के बाद भी जब तक मैं अदालत से पूरी तरह निर्दोष साबित नहीं हुआ, तब तक मैंने कोई संवैधानिक पद नहीं लिया था. मेरे ऊपर लगाए गए फर्जी आरोपों को अदालत ने यह कहते हुए खारिज किया कि मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है.” शाह ने कहा कि भाजपा और राजग हमेशा नैतिक मूल्यों के पक्षधर रहे हैं तथा लाल कृष्ण आडवाणी ने भी सिर्फ आरोप लगने पर ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा कि दूसरी ओर इंदिरा गांधी द्वारा शुरू की गई ”अनैतिक परंपरा” को कांग्रेस पार्टी आज भी आगे बढ़ा रही है.

शाह ने कहा, ”जिस लालू प्रसाद यादव को बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी अध्यादेश लाई थी, जिसका राहुल गांधी ने विरोध किया था, आज वही राहुल गांधी पटना के गांधी मैदान में लालू जी को गले लगा रहे हैं. विपक्ष का यह दोहरा चरित्र जनता भली-भांति समझ चुकी है.” उन्होंने कहा कि यह पहले से स्पष्ट था कि यह विधेयक संसद की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के समक्ष रखा जाएगा, जहां इस पर गहन चर्चा होगी. शाह ने कहा, ”फिर भी सभी प्रकार की शर्म और हया छोड़कर, भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए, कांग्रेस के नेतृत्व में पूरा ‘इंडी’ (गठबंधन गठबंधन ‘इंडिया’) एकत्रित होकर इसका भद्दी तरह से विरोध कर रहा था. आज विपक्ष का जनता के बीच पूरी तरह से पर्दाफाश हो गया है.”

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