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भारत और साइप्रस भरोसमंद मित्र और विश्वसनीय साझेदार हैं: जयशंकर

नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि विश्वास और समय की कसौटी पर खरा उतरना जैसे ”विशेषणों का इस्तेमाल करना आजकल आसान नहीं है” लेकिन भारत और साइप्रस के संबंधों के लिए वह इन्हें पूरे आत्मविश्वास और भरोसे के साथ कह सकते हैं.

जयशंकर ने कहा कि 2026 में जब साइप्रस यूरोपीय संघ की अध्यक्षता संभालेगा, तो ”हमें विश्वास है कि भारत-यूरोपीय संघ के संबंध और मजबूत होंगे.” जयशंकर और साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस ने यहां द्विपक्षीय वार्ता की और दोनों मंत्रियों ने भारत-साइप्रस संयुक्त कार्य योजना 2025-2029 की समीक्षा की, जिस पर जून में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की साइप्रस यात्रा के दौरान नेताओं ने सहमति व्यक्त की थी.

विदेश मंत्री ने हैदराबाद हाउस में कोम्बोस के साथ बैठक के दौरान अपने प्रारंभिक वक्तव्य में कहा, ”विदेश मंत्री के रूप में आपकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा, और मैं समझता हूं कि आपकी भारत की पहली यात्रा, स्पष्ट रूप से बहुत विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह जून 2025 में हमारे अपने प्रधानमंत्री की साइप्रस की बहुत ही सफल यात्रा के छह महीने के भीतर हो रही है.” यात्रा के दौरान जारी व्यापक भागीदारी के कार्यान्वयन पर संयुक्त घोषणापत्र में अनेक नये क्षेत्रों में ”हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक प्रगा­ढ़ बनाने” के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया गया है.

उन्होंने कहा, ”हमने भारत-साइप्रस संयुक्त कार्य योजना 2025-2029 तैयार की है और मुझे खुशी है कि कुछ महीनों के भीतर ही हमने योजना पर कार्रवाई शुरू कर दी है और हम आज इसकी समीक्षा करेंगे.” मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान साइप्रस को भारत का ”भरोसमंद साझेदार” बताया था और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया था. कोम्बोस 29 से 31 अक्टूबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं.

जयशंकर ने कहा, ”आपकी यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब साइप्रस एक जनवरी, 2026 से यूरोपीय संघ की परिषद की अध्यक्षता संभालने की तैयारी कर रहा है. साइप्रस और यूरोपीय संघ दोनों के साथ संबंधों को मजबूत करना भारत के लिए एक प्रमुख प्राथमिकता है और हम निश्चित रूप से इस संबंध में आपके दृ­ढ़ समर्थन की सराहना करते हैं.” उन्होंने कहा कि भारत और साइप्रस ”भरोसमंद मित्र” और ”विश्वसनीय साझेदार” हैं.

विदेश मंत्री ने कहा, ”आजकल विश्वास और समय की कसौटी पर खरा उतरना जैसे विशेषणों का इस्तेमाल करना आसान नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि मैं इस संबंध के लिए पूरे आत्मविश्वास और भरोसे के साथ ऐसा कर सकता हूं. हमारे संबंध आपसी सम्मान, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और एक संयुक्त रणनीतिक दृष्टिकोण पर आधारित एक व्यापक साझेदारी के रूप में विकसित हुए हैं.” जयशंकर ने बाद में ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि दोनों नेताओं के बीच ”वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति, हमारे संबंधित क्षेत्रों में विकास और बहुपक्षीय मंचों पर हमारे सहयोग पर भी चर्चा हुई.” उन्होंने कहा, ”क्योंकि साइप्रस 2026 में यूरोपीय संघ की अध्यक्षता संभालेगा, इसलिए हमें विश्वास है कि भारत-यूरोपीय संघ के संबंध और मजबूत होंगे.” उन्होंने अपनी बैठक की कुछ तस्वीरें भी साझा कीं.

जयशंकर ने कहा कि भारत और साइप्रस के बीच संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और राष्ट्रमंडल समेत क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर घनिष्ठ है. उन्होंने कहा, ”हम भारत के मूलभूत हितों से जुड़े मुद्दों, खासकर सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में साइप्रस के निरंतर समर्थन की सराहना करते हैं. मैं एक बार फिर पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करने और आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में भारत के साथ व्यक्त की गई एकजुटता के लिए आपकी सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूं.”

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