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संविधान से धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद मिटाकर ‘वैचारिक तख्तापलट’ करना चाहते हैं भाजपा-आरएसएस: सोनिया

नयी दिल्ली: कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, संविधान से समाजवाद एवं धर्मनिरपेक्षता को मिटाकर ‘वैचारिक तख्तापलट’ करने की कोशिश में हैं।

उन्होंने कांग्रेस के विधि विभाग द्वारा आयोजित वार्षिक विधिक सम्मेलन के लिए भेजे गए संदेश में यह भी कहा कि कांग्रेस संविधान को सुरक्षित रखने के लिए संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष जारी रखेगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने इस कार्यक्रम में सोनिया गांधी का संदेश पढ़ा।

सोनिया गांधी ने संदेश में कहा, ‘‘यह हमारे लोकतंत्र का नैतिक आधार है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित है। इसे कांग्रेस के बलिदान और दूरर्दिशता ने आकार दिया। आज़ादी से पहले ही, कांग्रेस पार्टी ने भारतीयों द्वारा, भारतीय नागरिकों के लिए एक संविधान की कल्पना की थी। ’’

उनके अनुसार, 1928 की नेहरू रिपोर्ट से लेकर 1934 में संविधान सभा की मांग तक, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू ने इसकी नींव रखी और मसौदा समिति के अध्यक्ष के रूप में डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने इन आदर्शों को मूर्त रूप दिया तथा उन्होंने चेतावनी दी थी कि सामाजिक और आर्थिक न्याय के बिना, राजनीतिक लोकतंत्र केवल एक दिखावा मात्र होगा।

सोनिया गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस ने इसे पहचाना और इस पर अमल किया, अधिकारों का विस्तार किया, संस्थाओं को मज़बूत किया और गरिमा व समावेशिता को कायम रखा। उन्होंने दावा किया, ‘‘आज, संविधान संकट में है। भाजपा-आरएसएस, जिसने कभी स्वतंत्रता के लिए लड़ाई नहीं लड़ी या समानता को नहीं अपनाया, अब अपनी शक्ति का इस्तेमाल उसी ढांचे को ध्वस्त करने के लिए कर रहे हैं जिसका उसने लंबे समय से विरोध किया था। उनके वैचारिक पूर्वजों ने मनुस्मृति का महिमामंडन किया, तिरंगे को नकारा और एक ंिहदू राष्ट्र की कल्पना की, जहां लोकतंत्र खोखला हो और भेदभाव सर्वोपरि हो।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता में रहते हुए संस्थाओं को नष्ट किया है, असहमति को अपराध घोषित किया है, अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया है और दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़ा वर्गों और मेहनतकश गरीबों के साथ विश्वासघात किया है।

कांग्रेस की प्रमुख नेता ने कहा, ‘‘अब वे समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता, जो आंबेडकर के समान नागरिकता के दृष्टिकोण के स्तंभ हैं, को मिटाना चाहते हैं। यह कोई सुधार नहीं है, बल्कि एक वैचारिक तख्तापलट है जो हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य की जगह एक ऐसे रू़ढ़ीवादी कॉरपोरेट तंत्र को स्थापित कर रहा है जो कुछ शक्तिशाली लोगों की सेवा करे।’’

सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘भारत हमारे स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं द्वारा परिकल्पित समावेशी, न्यायसंगत और लोकतांत्रिक राष्ट्र की आकांक्षा रखता है। कांग्रेस पार्टी इसी के लिए खड़ी है और लड़ती है। हम संसद, अदालतों और सड़कों पर संविधान को कमजोर करने के हर प्रयास का विरोध करेंगे।’’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि प्रत्येक भारतीय की गरिमा की रक्षा के लिए हमारी वैचारिक प्रतिबद्धता है।

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