नयी दिल्ली. विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने मंगलवार को मांग की कि सरकार को ‘अवैध’ धर्मांतरण के विरुद्ध जल्द से जल्द कानून बनाना चाहिए. विहिप ने यह मांग ऐसे समय में की है जब एक दिन पहले ही उच्चतम न्यायालय ने जबरन धर्मांतरण को ‘बहुत गंभीर’ मुद्दा करार देते हुए केंद्र से इसे रोकने के लिए कदम उठाने और इस दिशा में गंभीर प्रयास करने को कहा था.

विहिप के संयुक्त महामंत्री सुरेन्द्र जैन ने अपने बयान में कहा कि विभिन्न घटनाओं और इस विषय पर गठित आयोगों का यही निष्कर्ष है कि अवैध धर्मांतरण धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है. उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर इसे नहीं रोका गया तो देश के लिए खतरनाक स्थिति निर्माण हो जाएगी, ऐसे में केंद्र सरकार अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए शीघ्र ही केंद्रीय कानून बनाए.

जैन ने कहा कि बार बार यह स्पष्ट हुआ है कि जबरन, धोखे से व लालच से किया गया धर्मांतरण अवैध है लेकिन स्पष्ट कानून के अभाव में षड्यंत्रकारियों को सजा नहीं मिल पाती. उन्होंने कहा कि धर्मांतरण के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा भी खतरे में पड़ती रही है, इसके बाबजूद वोट बैंक की राजनीति के चलते कुछ राजनीतिक दल इसका विरोध नहीं करते हैं जबकि पहले वही राजनीतिक दल अपने शासित राज्यों में यह कानून लेकर आए थे.

विहिप के संयुक्त महामंत्री ने कहा, ‘‘ आज के समय में अवैध धर्मांतरण की समस्या एक भीषण रूप धारण कर चुकी है. आज के समय की आवश्यकता है कि केंद्रीय कानून अविलंब लाना चाहिए जिससे भारत को अवैध धर्मांतरण की समस्या से मुक्ति दिलाई जा सके.’’ सोमवार को न्यायमूर्ति एम.आर. शाह और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि सरकार प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण पर अंकुश लगाने के लिये उठाए गए कदमों के बारे में बताए. पीठ ने कहा, ‘‘यह एक बहुत ही गंभीर मामला है. केंद्र द्वारा जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए. अन्यथा बहुत मुश्किल स्थिति सामने आएगी. हमें बताएं कि आप क्या कार्रवाई करने का प्रस्ताव रखते हैं… आपको हस्तक्षेप करना होगा.’’

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