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रोशनी से नहाये अयोध्या के घाट, 26 लाख से अधिक दीये जलाकर बनाया विश्व रिकॉर्ड

योगी ने विक्रमादित्य की परंपरा को किया पुनर्जीवित, त्रेता युग फिर लौटा: संत

अयोध्या. उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक नगरी अयोध्या में रविवार को दो विश्व कीर्तिमान बनाए गए. भव्य दीपोत्सव समारोह के दौरान एक साथ 26 लाख 17 हजार 215 दीप प्रज्ज्वलित किये गये और 2,128 लोगों ने एक साथ सरयू आरती की. यह दोनों ही उपलब्धियां विश्व रिकॉर्ड के तौर पर दर्ज की गई हैं.

राज्य सरकार द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ के प्रतिनिधियों ने ड्रोन से की गई दीयों की गणना की पुष्टि के बाद इस उपलब्धि की आधिकारिक घोषणा की. बयान के अनुसार, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और प्रमुख सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति) अमृत अभिजात ने इस उल्लेखनीय उपलब्धि के सम्मान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गिनीज प्रमाण पत्र प्रदान किया.

पहला गिनीज पुरस्कार उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग, अयोध्या जिला प्रशासन और डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय द्वारा सबसे बड़ी संख्या में तेल के दीये जलाने के लिए दिया गया. बयान के अनुसार, दूसरा गिनीज पुरस्कार सर्वाधिक लोगों (2128) द्वारा एक साथ आरती करने के लिए दिया गया. यह पुरस्कार पर्यटन विभाग, अयोध्या जिला प्रशासन, अयोध्या और सरयू आरती समिति, अयोध्या को प्राप्त हुआ.

बयान के मुताबिक, 2017 में जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी थी तब सरयू नदी के घाटों पर जलाए जाने वाले दीयों की संख्या 1.71 लाख थी और इसके बाद हर साल यह संख्या लगातार बढ.ती रही है. इसमें कहा गया है कि साल 2018 में 3.01 लाख, 2019 में 4.04 लाख, 2020 में 6.06 लाख, 2021 में 9.41 लाख, 2022 में 15.76 लाख, 2023 में 22.23 लाख और 2024 में यह संख्या 25.12 लाख थी.

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में दीपोत्सव प्रकाश के उत्सव से बढ.ाकर गौरव और अस्मिता का उत्सव बन गया है. आज पूरी दुनिया अयोध्या को रामराज्य के जीवंत स्वरूप के रूप में देख रही है – जहां आस्था, अनुशासन और विकास एक साथ चमकते हैं.” उन्होंने कहा, “यहां जलाया गया प्रत्येक दीया विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत की भावना को प्रतिबिम्बित करता है.”

योगी ने विक्रमादित्य की परंपरा को किया पुनर्जीवित, त्रेता युग फिर लौटा: संत

प्रभु श्री राम के प्रतीकात्मक राज्याभिषेक में पहुंचे संतों ने अयोध्या में भव्य दीपोत्सव को विक्रमादित्य की परंपरा को पुनर्जीवित करने वाला बताते हुए रविवार को कहा कि इसे देखकर लगता है कि त्रेता युग लौट आया है. राज्य सरकार द्वारा यहां जारी एक बयान के मुताबिक, राम कथा पार्क में प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक में पहुंचे संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने वह कर दिखाया जो युगों तक असंभव रहा.

पूर्व सांसद रामविलास वेदांती महाराज ने कहा कि अयोध्या में ऐसा दीपोत्सव कभी कोई सोच भी नहीं सकता था लेकिन आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनकर असंभव को संभव बना दिया. रामविलास ने कहा कि उनसे पहले कई मुख्यमंत्री हुए पर किसी ने अयोध्या में ऐसे भक्ति-महोत्सव का स्वप्न तक नहीं देखा.

उन्होंने नाम लिए बिना समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, “लोग सैफई महोत्सव करवाते रहे और अपने घरों को सजाते रहे मगर योगी ने अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत की. हर वर्ष दीपों की संख्या बढ. रही है. योगी ने विश्वभर के हिंदुओं का मस्तक गर्व से ऊंचा किया है.” जगतगुरु रामानुजाचार्य राघवाचार्य जी महाराज ने कहा कि पिछली सरकारों ने अयोध्या को अंधकार में धकेल दिया था, लोग अयोध्या का नाम लेने से कतराते थे, लेकिन आज वही अयोध्या प्रकाश की राजधानी बन गई है.

उन्होंने कहा पहले के मुख्यमंत्री अयोध्या देखना नहीं चाहते थे, पर योगी लगभग हर महीने यहां आकर संतों का हाल जानते हैं. उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य ने कभी अयोध्या को सजाया था, योगी ने विक्रमादित्य की ही परंपरा को पुनर्जीवित किया है. जगतगुरु श्रीराम दिनेशाचार्य महाराज ने कहा, “हम अक्सर राम पैड़ी पर कल्पना भर करते थे कि मां सरयू दीप जला रही हैं और श्रीराम की प्रतीक्षा कर रही हैं. योगी के नेतृत्व में वह कल्पना साकार हुई है. अब लगता है कि शरीर से हम कलियुग में हैं, पर मन और आत्मा से त्रेता युग में जी रहे हैं.”

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