फतेहपुर और बरेली मामलों को लेकर पुलिस का दोहरा रवैया, देश में ‘दो तरह’ के कानून : कांग्रेस सांसद
सहारनपुर. सहारनपुर से कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने बरेली में पिछले महीने हुई हिंसा के बाद पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई की आलोचना करते हुए रविवार को कहा कि सरकार फतेहपुर में मजार तोड़ने वालों और बरेली में हिंसा के आरोपियों से अलग-अलग बर्ताव कर रही है.
उन्होंने कहा, ”इससे जाहिर होता है कि देश में दो तरह के कानून चल रहे हैं.” मसूद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में दावा किया कि बरेली में पुलिस पिछले महीने 26 सितंबर को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के मामले में बेकुसूर मुसलमानों को भी झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेज रही है, यह कार्रवाई दर्शाती है कि देश में दो तरह के कानून चल रहे हैं.
उन्होंने दलील देते हुए कहा, ”फतेहपुर में जब मजार के अंदर घुसकर तोड़फोड़ की जाती है, कब्रों पर खड़े होकर उनकी बेअदबी की जाती है तो कोई कार्रवाई नहीं होती. न तो वहां पुलिस का डंडा चलता, न हाथ-पैर तोड़े जाते हैं, न गोली चलती है.” कांग्रेस सांसद ने कहा, ”कांवड़ यात्रा के दौरान रास्ते में पड़ने वाले ढाबों को तोड़ दिया जाता है, उनमें आग लगा दी जाती है, उन्हें लूट लिया जाता है, राहगीरों के साथ मारपीट की जाती है और कानून का मजाक बना दिया जाता है तो कोई कार्रवाई नहीं होती, बल्कि समझा-बुझाकर शांत किया जाता है लेकिन अगर पोस्टर (आई लव मोहम्मद का पोस्टर) लेकर कोई खड़ा हो गया तो आप (पुलिस) हाथ-पैर भी तोड़ देंगे, पैरों पर गोली भी मार देंगे. तो सच्चाई तो यही है कि दो अलग-अलग वर्गों के लिये अलग-अलग तरह का कानून लागू है.”
उन्होंने कहा, ”इस तरह का जो हाल उत्तर प्रदेश में चल रहा है, वह ठीक नहीं है. भारतीय जनता पार्टी ने लोकतंत्र को तबाह कर दिया है. आपस में इतनी नफरत पैदा की जा रही है कि देश में रहना मुश्किल हो जाये. अमन और शान्ति बिल्कुल खत्म हो जाये. माहौल खराब होगा तो देश का आम आदमी पिसेगा.” सांसद ने मुजफ्फरनगर में हाल में कथित रूप से कांवड़ियों द्वारा एक होटल में की गयी तोड़फोड़ कर जिक्र करते हुए कहा, ”आप देखिये कि मुजफ्फरनगर में कोई कार्रवाई नहीं हुई. वहां किसे गोली मारी गयी, कौन गिरफ्तार हुआ, किसके हाथ-पैर तोड़े गये? वहां एक महिला ने पूरे जीवन की पूंजी लगाकर अपना एक होटल बनाया था, उस पूरे होटल को तबाह कर दिया था. वहां गुंडागर्दी की इंतेहा थी, तो क्या कार्यवाही हुई? पुलिस तमाशा देखती रही.”
मसूद ने कहा, ”अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके मामला खत्म कर दिया गया. ऐसी घटनाओं की वीडियो मौजूद हैं, सब नजर आ रहा है. इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई.” ‘आई लव मोहम्मद’ अभियान का जिक्र करते हुए मसूद ने कहा कि पोस्टर के प्रदर्शन को वह ठीक नहीं मानते हैं. उन्होंने कहा कि मोहम्मद साहब से प्रेम दिखाने के लिये किसी पोस्टर की जरूरत ही नहीं है. मुसलमान होना अपने आप में इस बात की गारंटी है कि उसके दिल में पैगम्बर मोहम्मद के लिये मोहब्बत है.