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व्यक्ति की आत्महत्या के बाद ममता ने भाजपा पर NRC को लेकर डर फैलाने का आरोप लगाया

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर राष्ट्रीय नागरिक पंजी को लेकर भय फैलाने का मंगलवार को आरोप लगाया. उन्होंने यह टिप्पणी कोलकाता के निकट उस व्यक्ति की कथित आत्महत्या के कुछ घंटों बाद की, जिसने अपनी मौत के लिए एनआरसी को जिम्मेदार ठहराया है.

बैरकपुर के पुलिस आयुक्त मुरलीधर शर्मा ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद बताया कि उत्तर 24 परगना जिले के पानीहाटी निवासी 57 वर्षीय प्रदीप कर मंगलवार सुबह अपने आवास पर फंदे से लटके मिले. शर्मा ने बताया कि एक सुसाइड नोट मिला है जिसमें एनआरसी का जिक्र है. उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि सोमवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की घोषणा के बाद से व्यक्ति अवसाद में था.

भाजपा की “भय और विभाजन की राजनीति” की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एनआरसी को लेकर पार्टी के अभियान ने लोगों में दहशत पैदा कर दी है. बनर्जी ने पोस्ट में कहा, “यह सोचकर मैं अंदर तक हिल जाती हूं कि कैसे भाजपा ने वर्षों से एनआरसी के डर से निर्दोष नागरिकों को परेशान किया है, झूठ फैलाया है, दहशत फैलाई है और वोट के लिए असुरक्षा को हथियार बनाया है.” उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने “संवैधानिक लोकतंत्र को भय का रंगमंच” बना दिया है और कहा कि “दुखद मौत विषैले दुष्प्रचार” का परिणाम है.

मुख्यमंत्री ने कहा, ” उन्होंने संवैधानिक लोकतंत्र को भय का रंगमंच बना दिया है, जहां लोगों को अपने अस्तित्व के अधिकार पर ही संदेह करने पर मजबूर किया जा रहा है. यह दुखद मौत भाजपा के विषैले दुष्प्रचार का सीधा नतीजा है. दिल्ली में बैठकर राष्ट्रवाद का उपदेश देने वालों ने आम भारतीयों को इतनी निराशा में धकेल दिया है कि वे अपनी ही धरती पर इस डर से मर रहे हैं कि उन्हें ‘विदेशी’ घोषित कर दिया जाएगा.” केंद्र से इस “हृदयहीन खेल” को समाप्त करने की मांग करते हुए बनर्जी ने दोहराया कि बंगाल “एनआरसी को कभी अनुमति नहीं देगा” और अपने लोगों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करेगा.

उन्होंने कहा, “हमारी धरती मां, माटी और मानुष की है, न कि उन लोगों की जो नफरत पर पनपते हैं. दिल्ली के जमींदारों को यह बात जोर से और स्पष्ट रूप से सुननी चाहिए: बंगाल प्रतिरोध करेगा, बंगाल रक्षा करेगा और बंगाल सफल होगा.” बैरकपुर के पुलिस आयुक्त मुरलीधर शर्मा ने कहा, “शुरुआती जांच और उनके परिवार के सदस्यों व रिश्तेदारों से बात करने के बाद, हमें पता चला कि कर एनआरसी को लेकर बहुत उदास थे. वह पिछले कुछ समय से, खासकर कल एसआईआर की घोषणा के बाद से काफी तनाव में थे.”

आईपीएस अधिकारी ने बताया कि मृतक ने सोमवार रात को खाना खाया और फिर अपने कमरे में चला गया. शर्मा ने कहा, “उनके परिवार के सदस्य समझ नहीं पा रहे थे कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है. मंगलवार सुबह वह कमरे में फंदे से लटकते हुए मिले.” मृतक की बड़ी बहन ने दावा किया कि उसका भाई एनआरसी के कार्यान्वयन को लेकर भयभीत था.

मनरेगा पर न्यायालय का आदेश केंद्र के लिए ‘बड़ा झटका’, बंगाल के गरीब लोगों की जीत: तृणमूल

तृणमूल कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में इस साल एक अगस्त से मनरेगा के क्रियान्वयन की अनुमति देने वाला उच्चतम न्यायालय का फैसला भाजपा नीत केंद्र सरकार के लिए ”बड़ा झटका” और राज्य के गरीब लोगों की जीत है. उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ केंद्र की याचिका सोमवार को खारिज कर दी, जिसमें 100 दिन की रोजगार गारंटी योजना ‘मनरेगा’ (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) को पश्चिम बंगाल में एक अगस्त 2025 से लागू करने का निर्देश दिया गया था.

न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने उच्च न्यायालय के 18 जून के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है. तृणमूल भवन में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रदीप मजूमदार ने कहा कि इस फैसले से तृणमूल का यह रुख सही साबित हुआ है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल के श्रमिकों को “अवैध, अनैतिक और राजनीति से प्रेरित तरीके से वंचित” किया.

मजूमदार ने आरोप लगाया कि बार-बार याद दिलाने, सूचना साझा करने और दिशानिर्देशों के अनुपालन के बावजूद, केंद्र ने 2021 की चुनावी हार के बाद पश्चिम बंगाल को ‘दंडित’ करने के लिए धनराशि रोक दी. उन्होंने कहा कि वंचित करने का यह कदम राजनीतिक से प्रेरित और गैरकानूनी था. उन्होंने दावा किया कि 14 केंद्रीय टीम और राष्ट्रीय स्तर की 33 निगरानी टीम ने कई वर्षों में 19 जिलों का दौरा किया, और निष्कर्ष निकाला कि 2016-17 और 2021-22 के बीच लगभग 6.03 करोड़ रुपये “पारंपरिक रूप से इस्तेमाल नहीं किए गए”. राष्ट्रीय टीम ने “गैर-मानक उपयोग” में 26 लाख रुपये का भी उल्लेख किया.

मजूमदार ने कहा, “लेकिन इन 6.29 करोड़ रुपये के लिए केंद्र ने तीन साल तक धनराशि और श्रम दिवस पर रोक लगा दी. अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया होता, तो गरीबों को 50.44 करोड़ रुपये अधिक मिलते.” उन्होंने कहा, “गुजरात में 71 करोड़ रुपये का दुरुपयोग किया गया और ग्रामीण विकास मंत्री के बेटे को जेल भी हो गई, फिर भी कोई केंद्रीय टीम वहां नहीं गई. लेकिन जब पश्चिम बंगाल की बात आती है, तो कोष से वंचित करना ही एकमात्र उद्देश्य है. भाजपा पश्चिम बंगाल को भूखा रखकर उसे अधीन बनाना चाहती थी.” मजूमदार ने आधार से जुड़े जॉब कार्ड हटाने को लेकर भी केंद्र पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में आधार लिंकिंग 99.8 प्रतिशत है. हमने शुरुआत से अब तक केवल 33 लाख कार्ड हटाए हैं, जबकि उत्तर प्रदेश ने 1.38 करोड़ कार्ड हटाए हैं. लेकिन अनियमितताओं का आरोप पश्चिम बंगाल पर ही लगता है.”

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने मजदूरों को मुश्किलों से बचाने के लिए अपने खज़ाने से भी मजदूरी दी. उन्होंने कहा, “हम किसी से भीख नहीं मांग रहे हैं. हम सिफ.र् न्याय चाहते हैं. अगर न्याय में फिर से देरी हुई, तो पश्चिम बंगाल की जनता 2026 में इसका जवाब देगी.” तृणमूल सांसद प्रतिमा मंडल ने कहा कि इस फैसले ने भाजपा की “गरीब-विरोधी सोच” को उजागर कर दिया है. उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में बार-बार खारिज किए जाने के बाद, भाजपा ने सबसे गरीब लोगों की मज़दूरी रोककर बदला लेने की कोशिश की. हमने दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, दस्तावेज़ जमा किए, आवाज़ उठाई, फिर भी वे हमारे राज्य को वंचित करते रहे.”

अभिषेक बनर्जी ने एसआईआर को लेकर भाजपा पर निशाना साधा, बड़े आंदोलन की चेतावनी दी

तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की घोषणा को लेकर भाजपा और निर्वाचन आयोग पर हमला बोला और आरोप लगाया कि यह कवायद वास्तविक मतदाताओं को “बाहर” करने और 2026 के राज्य चुनावों से पहले राजनीतिक संतुलन को बिगाड़ने के लिए की गई है.

बनर्जी ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग 2002 में दो साल तक चले एक “व्यापक कार्य” को हड़बड़ी में पूरा कर रहा है, जिसका उद्देश्य राज्य प्रशासन को अपने नियंत्रण में लाना है ताकि निर्वाचित सरकार काम न कर सके. तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा, “भाजपा के सहयोगी संगठन, निर्वाचन आयोग ने कल एसआईआर की घोषणा की है. यह प्रक्रिया (नाम) शामिल करने की नहीं, बल्कि बाहर करने के बारे में है.” उन्होंने घोषणा की कि केंद्र में सत्तारू­ढ़ पार्टी यह तय करने का प्रयास कर रही है कि “कौन वोट देगा और कौन नहीं”.

मतदाता सूची के पुनरीक्षण के समय पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “केवल डे­ढ़ साल पहले ही लोकसभा चुनाव हुए थे. अगर अब मतदाता सूची में विसंगतियां हैं, तो लोकसभा भंग कर नए चुनाव कराए जाने चाहिए.” उन्होंने पूछा, “बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की मौजूदगी का हवाला देकर बंगाल के लिए एसआईआर की घोषणा क्यों की गई? अन्य सीमावर्ती राज्यों का क्या हुआ?” तृणमूल नेता ने सवाल उठाया कि जब पांच पूर्वोत्तर राज्य बांग्लादेश और म्यांमा के साथ सीमा साझा करते हैं, तो पश्चिम बंगाल को ही क्यों निशाना बनाया गया. कड़ी चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा, “यदि एक भी पात्र मतदाता का नाम हटाया गया तो बंगाल के एक लाख लोग दिल्ली में निर्वाचन आयोग कार्यालय के बाहर धरना देंगे.” तृणमूल नेता ने जोर देकर कहा कि एसआईआर के बावजूद पार्टी अगले साल विधानसभा चुनावों में अपनी सीटों की संख्या ब­ढ़ाएगी.

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