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आरक्षण का समर्थन करने वाले को जाति आधारित जनगणना का भी समर्थन करना चाहिए: चिदंबरम

रायपुर. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने रविवार को कहा कि यदि कोई आरक्षण का समर्थन करता है तो उसे जाति आधारित जनगणना का भी समर्थन करना चाहिए, क्योंकि इस प्रक्रिया से समाज के विभिन्न वर्गों के लिए कोटा की प्रक्रिया तय करने में मदद मिलेगी. रायपुर में पार्टी के प्रदेश कार्यालय राजीव भवन में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा कि यदि हाथियों और बाघों की गिनती हो सकती है तो देश में जाति आधारित जनगणना क्यों नहीं हो सकती.

जाति आधारित जनगणना के लिए कांग्रेस की वकालत के बारे में पूछे जाने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम ने कहा, ”हमें पता होना चाहिए कि कितने लोग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) और एनबीसी (गैर पिछड़ा वर्ग) के हैं. बिना आंकड़े के हम आरक्षण दे रहे हैं.”

चिदंबरम ने कहा, ”आप आंकडों के बिना आरक्षण कैसे दे सकते हैं? यदि आप आरक्षण का समर्थन करते हैं तो आपको जाति आधारित जनगणना का भी समर्थन करना चाहिए. बिना जातीय जनगणना के आरक्षण कैसे हो सकता है? यहां तक कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी 10 प्रतिशत आरक्षण देने से पहले गिनती करनी होगी. हम बाघों और हाथियों की गिनती करते हैं. आप जाति (आधारित जनगणना) की गणना क्यों नहीं कर सकते, ताकि हम आरक्षण दे सकें. यदि आप आरक्षण का समर्थन करते हैं तो आपको जाति आधारित जनगणना का समर्थन करना होगा.”

किसानों की ऋण माफी की आवश्यकता के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ”यदि कृषि को टिकाऊ बनाए रखना है तो उसे लाभदायक होना चाहिए. छत्तीसगढ़ के अधिकांश नागरिक किसान हैं और राज्य की जीडीपी का 32 प्रतिशत हिस्सा खेती से आता है. अध्ययन से पता चलता है कि किसानों पर कर्ज है. कृषि छत्तीसगढ़ का मुख्य आधार है और किसानों को समय-समय पर राहत दी जानी चाहिए.” उन्होंने कहा, ”कांग्रेस पार्टी का आकलन है कि वे अभी भी कर्ज के बोझ से जूझ रहे हैं, इसलिए एक बार फिर (कर्ज माफी का) वादा किया गया है.” पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”हम राज्य की समस्याओं और राज्य के लोगों को क्या चाहिए, इसके बारे में बात कर रहे हैं. इस राज्य को एक और कृषि ऋण माफी की आवश्यकता है, इसलिए इसे यहां लागू किया जा रहा है.”

उन्होंने कहा, ”यदि कोई अन्य राज्य आकलन करता है और इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि उस राज्य में ऋण माफी की जरूरत है तो वे ऐसा कर सकते हैं.” चिदंबरम ने कहा, ”ऐसा कोई एक मॉडल नहीं है जो पूरे भारत में लागू हो.. एकमात्र व्यक्ति जो एक मॉडल, एक राशन कार्ड, एक चुनाव, एक यह और एक वह में विश्वास करता है, वह नरेन्द्र मोदी हैं. मैं उस पर विश्वास नहीं करता. प्रत्येक राज्य की एक अनोखी स्थिति होती है. प्रत्येक राज्य को एक अलग समाधान की आवश्यकता है.” नक्सलवाद पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कांग्रेस नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई को पार्टी के नजरिए से नहीं देख सकती तथा छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा में कमी का बड़ा श्रेय भूपेश बघेल सरकार को दिया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, ”जब (केंद्र में) मनमोहन सिंह की सरकार थी, तब हमने राज्य सरकारों के साथ काम किया और नक्सली हिंसा को काफी हद तक कम किया. लेकिन पिछले पांच सालों में छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा और कम हो गई. राज्य में नक्सलवाद में गिरावट का बड़ा श्रेय बघेल सरकार को जाना चाहिए.” पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”नक्सलवाद से निपटने के लिए कोई पार्टी नहीं है, यह पार्टी या वह पार्टी. यह देश की एक बड़ी समस्या है. हम नक्सलियों से लड़ाई को पार्टी के नजरिये से नहीं देख सकते. यदि कांग्रेस पार्टी दिल्ली में सत्ता में आती है तो हम नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे और उनके प्रभाव को कम करने की कोशिश करेंगे.”

बघेल सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए चिदंबरम ने कहा, ”यदि पार्टी राज्य में सत्ता बरकरार रखती है तो अब तक की गई नयी घोषणाएं पूरी की जाएंगी.” उन्होंने कहा, ”नयी घोषणाओं में किसानों से प्रति एकड़ 20 क्विंटल धान की खरीदी, कृषि ऋण माफी, राज्य में जाति आधारित जनगणना, मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 17.50 लाख परिवारों को घर, तेंदू पत्ता संग्राहकों को चार हजार रुपये की वार्षिक प्रोत्साहन राशि, लघु वनोपज पर प्रति किलोग्राम 10 रुपये अतिरिक्त, सरकारी स्कूल और कॉलेज में मुफ्त शिक्षा शामिल है.”

कांग्रेस नेता चिदंबरम ने कहा, ”हम अगले पांच वर्षों में प्रभावशाली आर्थिक विकास, विशेष रूप से कृषि क्षेत्र और किसानों की सर्वांगीण समृद्धि, महिलाओं और बच्चों का कल्याण, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए विशेष पहल, शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने, युवाओं के लिए नौकरियों के सृजन तथा सभी वर्गों के लिए शांति और सुरक्षा का वादा करते हैं.”

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