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संविधान संशोधन विधेयकों के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन दिखाता है कि वे भ्रष्टाचार के साथ : भाजपा

नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को कहा कि गंभीर आरोपों में 30 दिन तक गिरफ्तार रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने संबंधी तीन विधेयकों के खिलाफ लोकसभा में विपक्षी सदस्यों का विरोध दर्शाता है कि वे भ्रष्टाचार और भ्रष्ट लोगों के साथ खड़े हैं.

भाजपा सांसदों ने सदन में विरोध के दौरान गृह मंत्री अमित शाह पर कागज फाड़कर फेंकने के लिए विपक्षी सदस्यों की भी आलोचना की और इसे शर्मनाक और अलोकतांत्रिक करार दिया. उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए. विपक्षी दलों की आलोचना करते हुए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि तीनों विधेयकों का विरोध करने वाले लोग अराजकता लाना चाहते हैं और दिखाना चाहते हैं कि वे कानून से ऊपर हैं.

उन्होंने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ”आज की परिस्थितियों में यह कानून बहुत आवश्यक है.” प्रधान ने कहा कि हाल के दिनों में कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जब कुछ लोग जेल से सरकार और अपने मंत्रालय चलाना चाहते हैं. उन्होंने कहा, “हमने हाल में देखा कि कुछ राज्यों में संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों ने गिरफ्तार होने के बाद भी इस्तीफा नहीं दिया.” उन्होंने पूछा, “क्या हमारा संविधान यही कहता है?” प्रधान ने मांग की, “उन्हें (विपक्ष को) यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे इस बात का समर्थन करते हैं कि किसी को भी इस्तीफा नहीं देना चाहिए, भले ही वे सलाखों के पीछे हों.” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तीनों विधेयक पारर्दिशता बढ.ाने के लिए हैं. उन्होंने कहा कि यह परंपरा रही है कि सरकार का कोई भी सदस्य गिरफ्तार होने के बाद इस्तीफा दे देता है.

भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि जिस तरह से विपक्षी सदस्यों ने सदन में विरोध प्रदर्शन किया, उससे पता चलता है कि “वे भ्रष्टाचार और भ्रष्ट लोगों के साथ खड़े हैं, और वे भ्रष्ट लोगों को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं.” उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “सवाल यह उठता है कि विपक्ष किसके खिलाफ विरोध कर रहा है. क्या यह नैतिकता है या भ्रष्टाचार?” ठाकुर ने कहा, “लड़ाई स्पष्ट है. विपक्ष भ्रष्टाचार और भ्रष्ट लोगों के साथ खड़ा है. भाजपा-राजग राजनीति को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना चाहता है.” केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) नेता चिराग पासवान ने विधेयक का समर्थन किया और कहा कि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ है. तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि उनकी पार्टी भी विधेयकों की मंशा का समर्थन करती है. उन्होंने कहा कि इसे संसद की संयुक्त समिति को भेजने का कदम स्वागत योग्य है.

ठाकुर ने लोकसभा में विपक्ष के विरोध को “तुच्छ” करार दिया और कहा कि उन्होंने सदन में अपने आचरण से देश के लोकतंत्र को “शर्मसार” किया है. उन्होंने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, “विपक्षी सदस्य अपनी सीटों से विरोध कर सकते थे… लेकिन वे सत्ता पक्ष के पास, गृह मंत्री के पास आ गए. उन्होंने हंगामा किया, देश के गृह मंत्री के पास कागज के टुकड़े फाड़े.” उन्होंने पूछा, “क्या यह विरोध करने का सही तरीका है?” भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल ने विपक्ष के विरोध को “अलोकतांत्रिक” करार दिया और कहा कि यह देश के लोकतंत्र पर हमला है.

पाल ने बताया कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदर्शनकारी सदस्य आसन के समीप आ गए और गृह मंत्री के करीब आ गए. उन्होंने कहा, “आज कोई भी अप्रिय घटना घट सकती थी.” उन्होंने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, “एक तरह से यह काला दिन है. अध्यक्ष को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए.” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच लोकसभा में बुधवार को ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’, ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025’ पेश किए. बाद में उनके प्रस्ताव पर सदन ने तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने का निर्णय लिया.

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