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दबाव पड़ा तो अमित शाह की वंशवाद की राजनीति और चुनाव आयोग के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करूंगी: ममता

कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए उन पर ”वंशवाद की राजनीति” में लिप्त होने का आरोप लगाया. भारतीय जनता पार्टी लगातार ममता और उनकी पार्टी पर वंशवाद का आरोप लगाती रही है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर निर्वाचन आयोग का नाम लिए बिना उस पर भी निशाना साधा और “अलोकतांत्रिक प्रथाओं का पर्दाफाश” करने की धमकी दी.

उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के सदस्यों के “परिवार” से जुड़े शीर्ष नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के ज.रिए चुनाव निकाय पूरे भारत में “अलोकतांत्रिक प्रथाओं” को बढ़ावा दे रहा है. ममता ने केंद्रीय गृह मंत्री की ओर इशारा करते हुए कहा, ”अमित बाबू, आप हम पर ‘वंशवाद की राजनीति’ चलाने का आरोप लगाते हैं, लेकिन आपके बेटे का क्या, जो एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष है, जिसमें हज.ारों-लाखों करोड़ रुपये लगे हैं… क्या यह वंशवाद नहीं है. क्या आप इसे समाजवाद कहते हैं.” ममता जहां अमित शाह के बेटे और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अध्यक्ष जय शाह का ज.क्रि कर रही थीं, वहीं भाजपा उन पर वंशवाद की राजनीति करने का आरोप लगा रही है, क्योंकि उनके भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को पार्टी में नंबर दो माना जाता है.
पार्टी की छात्र शाखा, तृणमूल छात्र परिषद, के स्थापना दिवस के अवसर पर कोलकाता में एक रैली को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग पर हमला बोला. तृणमूल नेतृत्व बिहार और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू करने के लिए आयोग की तीखी आलोचना करता रहा है.
इससे पहले, ममता ने निर्वाचन आयोग को भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का ‘लॉलीपॉप’ बताया था.

उन्होंने कहा, “लॉलीपॉप सरकार हमारे बीडीओ, एसडीओ, डीएम और पुलिस को छंटनी या जेल की सज.ा की धमकी दे रही है. लेकिन चुनाव के दौरान आयोग का कार्यकाल तीन महीने से ज़्यादा नहीं होता. राज्य सरकार ही रहती है.” ममता ने कहा, “हम इस बाहुबल को बर्दाश्त नहीं करेंगे. हमारे पास भी आपका भानुमती का पिटारा है. अगर आप बाध्य करेंगे तो हम आपके भ्रष्टाचार का पर्दाफ.ाश करेंगे… सुनिए, लॉलीपॉप बाबू, हम जानते हैं कि आपके परिवार के कौन से सदस्य अलग-अलग राज्यों में आईएएस और आईपीएस अधिकारी हैं और किसके ज.रिए आप भाजपा के लिए यह लॉलीपॉप तंत्र चला रहे हैं.”

उन्होंने कहा कि वह किसी को भी लोगों का मताधिकार छीनने नहीं देंगी, उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा देश भर में बंगालियों पर “भाषाई आतंक” फैला रही है. बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा ने मतदाता सूचियों से मतदाताओं के नाम हटाने के उद्देश्य से सर्वेक्षण के लिए देश भर से 500 से अधिक टीम पश्चिम बंगाल में तैनात की हैं.

उन्होंने रैली में कहा, ”आपको खुद जांच करनी चाहिए कि आपका नाम अब भी मतदाता सूची में है या उसे मतदाता सूची से हटा दिया गया है… आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके पास आधार कार्ड हैं.” बनर्जी ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग राज्य सरकार के अधिकारियों को धमका रहा है.

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा स्वतंत्रता आंदोलन में बंगालियों द्वारा निभायी गयी भूमिका को भुलाने की कोशिश कर रही है.
उन्होंने कहा, ”अगर बांग्ला भाषा ही नहीं है, तो राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत किस भाषा में लिखे गए हैं? वे चाहते हैं कि लोग स्वतंत्रता आंदोलन में बंगालियों द्वारा निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका को भुला दें. हम इस भाषाई आतंक को बर्दाश्त नहीं करेंगे.” उन्होंने दावा किया, ”उनके पूर्ववर्ती ब्रिटिश एजेंट थे, जिन्होंने जेलों से बाहर निकलने के लिए वचन (अंडरटेकिंग) दिया था.” ममता ने दावा किया कि उनके प्रशासन ने कई सामाजिक कल्याणकारी पहल की हैं, जबकि केंद्र की भाजपा-नीत सरकार विकास के नाम पर भ्रष्टाचार में लिप्त है.

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि वह (वाम दल) उनसे मुकाबला करने के लिए भाजपा से ”हाथ मिला रहा है.” बनर्जी ने कहा, ”केरल की माकपा सरकार दावा कर रही है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंग्रेजों के डर से देश छोड़कर भाग गए थे. हम इसकी निंदा करते हैं.” राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में अब कुछ ही महीने बचे हैं और ममता बनर्जी लगातार सड़कों पर उतर रही हैं. वह आरोप लगा रही हैं कि भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी प्रवासी कामगारों को परेशान किया जा रहा है.

केंद्र पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के लिए धनराशि “राजनीतिक ईष्र्या” के कारण रोक दी गई है. ममता ने कहा, ”लगातार चार-पांच सालों तक, पश्चिम बंगाल 100 दिन का रोजग़ार देने, गरीबों के लिए घर बनाने और ग्रामीण सड़कों के निर्माण में नंबर वन रहा. ईष्र्यावश, उन्होंने हमारे फंड रोक दिए हैं और अब वे लोगों के मताधिकार छीनने के लिए एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक पंजी) लागू करना चाहते हैं, लेकिन जब तक मैं ज.दिंा हूं, मैं उन्हें ऐसा नहीं करने दूंगी.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल हथियार की तरह किया है.

उन्होंने दावा किया, ”इससे पहले, किसी भी सरकार ने चुनावों से पहले केंद्रीय एजेंसियों का इस तरह इस्तेमाल नहीं किया था.” उन्होंने सरकारी भर्ती अभियान और कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने में देरी के लिए माफी मांगी, लेकिन इसके लिए मुकदमेबाजी को जिम्मेदार ठहराया.

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