भाजपा ने बघेल को फंसाने की कोशिश की थी, ‘शराब घोटाले’ का मामला राजनीति से प्रेरित था: कांग्रेस
जांच एजेंसियों से सरकार का गठबंधन, विपक्ष के खिलाफ बनाया गया हथियार: कांग्रेस
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के कथित ‘शराब घोटाले’ के मामले में उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेश को लेकर बुधवार को दावा किया कि यह पूरा मामला राजनीति से प्रेरित था और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को फंसाने की कोशिश की थी.
उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ में 2,000 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश के खिलाफ धन शोधन का मामला सोमवार को रद्द करते हुए कहा था कि अपराध से कोई संपत्ति अर्जित नहीं की गई. न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने यह उल्लेख करते हुए पिता-पुत्र के खिलाफ शिकायत रद्द कर दी कि उन पर मुख्य अपराध का कोई मामला नहीं है और ना ही धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कोई मामला बनता है.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”सोमवार के दिन उच्चतम न्यायालय ने तथाकथित छत्तीसगढ़ ”शराब घोटाले” के मामले को ईडी द्वारा बेशर्मी से गढ़ा गया मामला बता कर रद्द कर दिया. भाजपा ने अपने मुख्य अग्रिम संगठन ईडी के माध्यम से पिछले साल छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले बेशर्मी से इस झूठ को फैलाया था और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को ”सिंडिकेट” (गिरोह) में फंसाने की कोशिश की थी. इसमें अब कोई संदेह नहीं रह गया है कि यह पूरा मामला राजनीति से प्रेरित था.”
उन्होंने कहा, ”पीएमएलए की विशेष अदालत के समक्ष दायर शिकायत में ईडी ने आरोप लगाया था कि राजनेताओं, व्यक्तियों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के एक आपराधिक ‘सिंडिकेट’ ने 2019 से 2022 तक अवैध रूप से शराब बेचकर 2,161 करोड़ रुपए की हेराफेरी की थी. पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश को इस ‘सिंडिकेट’ के मुख्य साजिशकर्ता के रूप में दिखाया गया था.” रमेश के अनुसार, न्यायमूर्ति ए.एस. ओका की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस शिकायत को रद्द कर दिया तथा अदालती कार्यवाही से पता चलता है कि मामला वास्तव में कितना खोखला था.
उन्होंने कहा, ”शिकायत में टुटेजा को आरोपी के रूप में नामित तक नहीं किया गया था. कोई भी कथित अपराध पीएमएलए के अंतर्गत नहीं आता. कोई विधेय अपराध (अपराध की श्रृंखला में पहला कार्य) या अपराध की आय नहीं थी.” रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं को परेशान करने के लिए ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग का इस्तेमाल और भाजपा के राजनेताओं को शुद्ध करने के लिए ‘वॉशिंग मशीन’ के इस्तेमाल ने देश भर में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों को ध्वस्त कर दिया है. उन्होंने कहा, ”भ्रष्टाचार के सभी आरोप और भ्रष्टाचार से संबंधित मुद्दों पर अभियोजन के सभी कानूनी मामले, काफ.ी हद तक राजनीतिक हो गए हैं.”
जांच एजेंसियों से सरकार का गठबंधन, विपक्ष के खिलाफ बनाया गया हथियार: कांग्रेस
कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले के मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद बुधवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और आयकर विभाग के साथ गठबंधन कर रखा है और इन जांच एजेंसियों को विपक्षी नेताओं के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है.
पार्टी प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों का दुरुपयोग लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है.
उन्होंने सवाल किया कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बने हुए महीनों हो चुके हैं, उसके बाद भी कथित शराब घोटाले के मामले में अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ में 2,000 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश के खिलाफ धन शोधन का मामला सोमवार को रद्द करते हुए कहा था कि अपराध से कोई संपत्ति अर्जित नहीं की गई.
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने यह उल्लेख करते हुए पिता-पुत्र के खिलाफ शिकायत रद्द कर दी कि उन पर मुख्य अपराध का कोई मामला नहीं है और ना ही धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कोई मामला बनता है.
सिंघवी ने संवाददाताओं से कहा, ”मोदी सरकार ने ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग के साथ गठबंधन कर रखा है. 10 से 20 प्रतिशत राजनीतिक पहलू वाले मामलों में 99 प्रतिशत मामले विपक्षी नेताओं के खिलाफ होते हैं. वहीं, पार्टी बदल देने पर अचानक सारे मामले रुक या बंद हो जाते हैं. कई बार गिरफ्तारी के बाद लोग सरकारी गवाह बन जाते हैं और सब कुछ सही हो जाता है.” उनका कहना था, ”छत्तीसगढ़ के तथाकथित शराब घोटाले के मामले में उच्चतम न्यायालय ने कुछ बातें सामने रखी हैं. सबसे पहले न्यायालय ने कहा कि हम पूरा मामला ख.ारिज करते हैं और इसमें तो धनशोधन का मामला भी नहीं बन रहा है. अदालत ने यह भी कहा कि केवल काल्पनिक, कुत्सित राजनीतिक मंशाओं के कारण, शासन-प्रशासन को बदनाम करने, पूर्व मुख्यमंत्री (भूपेश बघेल) पर आरोप लगाने और आयकर विभाग की ताबड़तोड़ छापेमारी के आधार पर इसे ईडी का मामला बनाया गया था.”
सिंघवी ने दावा किया, ”यह सब इसलिए किया गया, क्योंकि चुनाव होने थे. ऐसे में जब चुनाव का बिगुल बजा तो ईडी का बिगुल भी बज गया.” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले की पूरी कहानी राजनीतिक द्वेष के कारण रची थी और इस मामले में कई लोगों से रात-रात भर पूछताछ की गई और उन्हें प्रताड़ित किया गया.
सिंघवी का कहना था, ”यह मामला एक चुनावी अभियोजन था.” उन्होंने सवाल किया, ”यदि घोटाला हुआ तो ईडी ने इतनी लंबी जांच के बाद अदालत के सामने धनशोधन के एक भी सबूत क्यों नहीं रखे? यदि अपराध शराब निर्माताओं की फैक्टरी से शुरू हुआ तो क्या एक भी शराब निर्माता को ईडी ने गिरफ्तार किया? क्या ईडी ने एक भी आबकारी अधिकारी को गिरफ्तार किया?” सिंघवी ने यह सवाल भी किया, ”अगर ये सभी दोषी थे तो छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बने हुए महीनों हो चुके हैं, उसके बाद भी अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
भाजपा ने बार-बार तमिलनाडु के लोगों पर अपनी इच्छा थोपने की कोशिश की: कांग्रेस
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कोयंबटूर में जनसभा से पहले बुधवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तमिलनाडु के लोगों पर अपनी इच्छा थोपने की बार-बार कोशिश की है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ और केंद्र से कर संग्रह के राजस्व का राज्यों को ‘अपर्याप्त हस्तांतरण’ जैसे विषयों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी से कुछ सवाल किए.
प्रधानमंत्री मोदी आज कोयंबटूर में चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे.
रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “आज प्रधानमंत्री मोदी तमिलनाडु के कोयंबटूर में होंगे. तमिलनाडु एक ऐसा राज्य है जिसका सहकारी संघवाद की पैरोकारी करने का एक लंबा इतिहास है. भाजपा ने बार-बार वहां के लोगों पर अपनी इच्छा थोपने की कोशिश की है.” उन्होंने कहा, “तमिलनाडु में मोदी सरकार के ट्रैक रिकॉर्ड से सवाल उठता है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी लोगों का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं, या वह उन पर शासन करना चाहते हैं?” रमेश ने कहा कि नीट परीक्षा 2017 में भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई थी और इसे इस डर के कारण व्यापक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा कि इससे गरीब और हाशिए के समुदायों के छात्रों को नुकसान होगा.
