ओबीसी, दलित और आदिवासियों को उनकी सही संख्या का पता लगने पर बदल जाएगा देश : राहुल गांधी
राहुल गांधी ने साइप्रस 'गोल्डन पासपोर्ट' योजना को लेकर साधा निशाना
नयी दिल्ली/बेमेतरा/बलौदाबाजार. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को एक बार फिर जातिगत जनगणना की वकालत की और कहा कि जिस दिन देश के अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), दलित और आदिवासी समुदायों को अपनी सच्ची आबादी पता लग जाएगा, उस दिन यह देश हमेशा के लिए बदल जाएगा.
गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर गाली देने का आरोप लगाया और कहा कि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि यह कृत्य केवल यह दर्शाता है कि वह (राहुल गांधी) काम कर रहे हैं. गांधी ने विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण के चुनाव प्रचार के अंतिम दिन छत्तीसगढ़ के बेमेतरा और बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में दो रैलियों को संबोधित किया.
उन्होंने कहा, ”जब मैं आपसे (जनता से) देश में ओबीसी की आबादी के बारे में पूछता हूं, तो कोई जवाब नहीं दे पाता. देश में लगभग 50 फीसदी ओबीसी हैं. जब हमने (कांग्रेस सरकार) कर्ज माफ किया (किसानों का) और बिजली बिल आधा किया, तो 50 प्रतिशत लाभार्थी ओबीसी थे. नरेन्द्र मोदी जी ने 14 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया तो इसका फायदा ओबीसी को नहीं बल्कि अरबपतियों को मिलता है.”
कांग्रेस नेता ने कहा, ”बीमा योजना के तहत मोदी जी ने 16 कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये दिये. उन कंपनियों में कोई ओबीसी, दलित या आदिवासी काम नहीं करता. मुझे (गौतम) अडाणी की कंपनी में एक ओबीसी (कर्मचारी) दिखाओ. अडाणी की कंपनी की (कर्मचारियों की) सूची निकाल लें, आपको वहां एक भी ओबीसी, दलित या आदिवासी नहीं मिलेगा.” गांधी ने कहा, ”वह (प्रधानमंत्री मोदी) दावा करते हैं कि वह ओबीसी की सरकार चलाते हैं लेकिन पैसा अडाणी को देते हैं. क्या जीएसटी (माल एवं सेवा कर) से आपको फायदा हुआ?
कर्जमाफी से आपको फायदा हुआ? जिस दिन मैंने जाति जनगणना और ओबीसी की जनसंख्या के बारे में बात करना शुरू किया, मोदी जी ने मुझे गाली देना शुरू कर दिया. रोज (वह) एक नयी गाली देते हैं.” उन्होंने कहा, ”पहले वह (प्रधानमंत्री) खुद को ओबीसी कहते थे और अब कहते हैं कि देश में कोई जाति नहीं है, केवल गरीब हैं. तो फिर आप (प्रधानमंत्री) कौन हैं? आप ओबीसी कैसे बने? आप हजारों करोड़ रुपये के हवाई जहाज में उड़ते हैं और करोड़ों रुपये के सूट पहनते हैं. क्या आपने कभी मोदी जी को एक कपड़ा दो दिन तक पहने हुए देखा है. मैं केवल यह सफेद शर्ट पहनता हूं (अपने कपड़ों की ओर इशारा करते हुए). वह रोज कपड़े बदलते हैं, कभी सूट, कभी शॉल. लेकिन जब ओबीसी का समर्थन करने का समय आता है, तो वह कहते हैं कि कोई ओबीसी नहीं है.”
उन्होंने कहा, ”मोदी की गारंटी अडाणी की गारंटी है. वह अडाणी और उनके जैसे लोगों के लिए काम करते हैं… छत्तीसगढ़ में दोबारा कांग्रेस की सरकार बनने के बाद पहला कदम किसानों की कर्जमाफी के साथ-साथ जातिगत सर्वे कराना होगा. जब हम अगले साल केंद्र में सत्ता में आएंगे तो पहला कदम देश में जाति जनगणना कराना होगा.” गांधी ने कहा कि जिस दिन ओबीसी को अपनी असली ताकत का पता चल जाएगा, उस दिन देश का वास्तविक विकास शुरू हो जाएगा.
उन्होंने कहा, ”यह एक ऐतिहासिक फैसला होगा. जिस दिन इस देश के ओबीसी, दलित और आदिवासियों को अपनी वास्तविक जनसंख्या और असली ताकत का पता चल जाएगा, यह देश हमेशा के लिए बदल जाएगा. आजादी के बाद यह सबसे बड़ा क्रांतिकारी फैसला होगा.” गांधी ने आरोप लगाया कि जहां कांग्रेस सरकारें किसानों का कर्ज माफ करती हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार अडाणी जैसे बड़े उद्योगपतियों का कर्ज माफ करती है.
कांग्रेस नेता ने कहा, ”जहां भी हमारी सरकार है, चाहे वह कर्नाटक हो, छत्तीसगढ़ हो, राजस्थान हो या हिमाचल प्रदेश हो, मैंने सभी मुख्यमंत्रियों से कहा है कि कांग्रेस सरकार किसानों, मजदूरों, माताओं और बहनों के बैंक खातों में उतना ही पैसा डालेगी जितना भाजपा सरकार अरबपतियों और बड़े ठेकेदारों को देती है.”
उन्होंने कहा, ”अर्थव्यवस्था किसानों, मजदूरों, छोटे दुकानदारों और युवाओं द्वारा चलती है. अगर पैसा अडाणी जी की जेब में जाता है, तो अडाणी जी इसे अमेरिका में खर्च करते हैं. लेकिन अगर यह किसान के पास जाता है, तो यह गांव के भीतर खर्च किया जाता है और इस तरह ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है.” बेमेतरा जिले में रैली में मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर इशारा करते हुए गांधी ने कहा कि बघेल जी आपको याद होगा कि मैंने आपसे कहा था कि (2018 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद) किसानों की कर्जमाफी की फाइलों पर पहला हस्ताक्षर होना चाहिए और आपने किया तथा इससे लाखों किसान लाभान्वित हुए.
उन्होंने कहा, ”मैं मंच से एक बार फिर कह रहा हूं कि आपको (बघेल को) कर्ज माफ करने के लिए एक बार फिर हस्ताक्षर करना होगा.” कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में कर्ज माफी के वादे के साथ किसानों को लुभाने की कोशिश की है. यह वादा सत्ताधारी दल ने 2018 में भी किया था.
कांग्रेस नेता ने कहा, ”मोदी जी जहां भी जाते हैं, मुझे गालियां देते हैं. इससे मुझे कोई फ.र्क नहीं पड़ता क्योंकि मैं आपको अपने लक्ष्य के बारे में पहले ही बता चुका हूं. जितना पैसा मोदी जी अडाणी को देते हैं, उतना मैं गरीबों, मजदूरों, किसानों और छोटे व्यापारियों को दूंगा. असली राजनीति अरबपतियों का समर्थन करना नहीं है बल्कि असली राजनीति गरीबों, बेरोजगारों, युवाओं और किसानों का समर्थन करना है. जितनी गाली दे सको मुझे दो. जितना अधिक आप मुझे गाली देंगे उतना ही मुझे एहसास होगा कि मैं अच्छा काम कर रहा हूं.” छत्तीसगढ़ की कुल 90 विधानसभा सीटों में से 70 पर दूसरे चरण का मतदान 17 नवंबर को होगा. राज्य में सात नवंबर को 20 सीटों पर पहले चरण का मतदान हुआ था.
राहुल गांधी ने साइप्रस ‘गोल्डन पासपोर्ट’ योजना को लेकर साधा निशाना
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को सवाल किया कि ”परम मित्र” के भाइयों ने “अमृत काल” के दौरान भारत क्यों छोड़ दिया. गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय आयी है, जब मीडिया में ऐसी खबर आयी है कि गौतम अडाणी के बड़े भाई विनोद अडाणी सहित कुछ कारोबारी उन 66 भारतीयों में शामिल हैं, जिन्हें साइप्रस में ‘गोल्डन पासपोर्ट’ मिला.
गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, ”’अमृत काल’ में ‘परम मित्र’ के भाई भारत छोड़ कर क्यों भागे? ‘गोल्डन पासपोर्ट’ मतलब चोरी का सुनहरा मौका – जनता का पैसा चुराओ, शेल कम्पनी बनाओ और विदेश में उड़ाओ.” उन्होंने यह बात मीडिया में ऐसी खबरें आने के बाद कही, जिनमें कहा गया था कि विनोद अडाणी और पंकज ओसवाल उन 66 भारतीयों में शामिल थे, जिन्हें ‘गोल्डन पासपोर्ट’ मिला था. वर्ष 2007 में शुरू हुई “गोल्डन पासपोर्ट” योजना को “साइप्रस निवेश कार्यक्रम” भी कहा जाता था और इसने आर्थिक रूप से मजबूत व्यक्तियों को साइप्रस की नागरिकता प्रदान करने की सुविधा प्रदान की थी, जिससे देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया.
केंद्र में सत्तारूढ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी सेल प्रभारी अमित मालवीय ने गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि यह कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के तहत हुआ कि भारत-साइप्रस कर संधि ने कर चोरों के लिए एक पनाहगाह बनाया.
मालवीय ने एक्स पर पोस्ट किया, ”आपने निवेशकों के लिए पूंजीगत लाभ कर की अनदेखी कर लाल कालीन बिछा दिया, जबकि साइप्रस इस तरह का कर नहीं लगाता है. इसमें कम विदहोल्डिंग कर की दर के साथ आपको साइप्रस में कर पनाहगाह बनाने, व्यवसायों को लुभाने और व्यक्तियों को साइप्रस में धन लगाने के लिए एक आदर्श नुस्खा मिल गया.”
उन्होंने कहा, ”हालांकि भाजपा के नेतृत्व वाले राजग गठबंधन के सत्ता में आने पर, हमने इस चाल को समझा और तत्काल, निर्णायक कार्रवाई की. 2016 में, हमने साइप्रस के साथ दोहरा कराधान बचाव संधि (डीटीएए) में सिर्फ बदलाव नहीं किया, हमने इसमें आमूल-चूल परिवर्तन किया. हमारा संशोधन, नवंबर 2013 की पुरानी तिथि से लागू हुआ और यह पासा पलटने वाला था. इसने पूंजीगत लाभ के कराधान को सीधे उस स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जहां आय होती है – स्रोत देश – बजाय निवेशकों को उनके निवास के देश के पर्दे के पीछे छिपने की अनुमति देने के. यह सिर्फ एक नीतिगत बदलाव नहीं था; यह आपके द्वारा चलाये जा रहे कर बचाव ‘सर्कस’ को एक सीधी चुनौती थी.”
माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट पर गांधी की पोस्ट पर प्रतिक्रिया जताते हुए उन्होंने कहा, ”आइए एक अप्रैल, 2017 से पहले किए गए निवेश के लिए हमारे द्वारा पेश किए गए ‘ग्रैंडफादरिंग क्लॉज’ के बारे में बात करते हैं. यह सिर्फ एक प्रावधान नहीं था. हमने इसमें एक नयी व्यवस्था में निष्पक्ष बदलाव सुनिश्चित किया. इसके तहत इस समयसीमा से पहले किए गए निवेश के लिए निवेशक के निवास देश में पूंजीगत लाभ पर कर लगाया जाएगा.”
उन्होंने कहा, ”यह बदलाव बहुत बड़ा था. यह सिर्फ उचित कराधान के बारे में नहीं था. इसने कर चोरी के लिए विदेशी संस्थाओं का उपयोग बंद कर दिया. तथाकथित ‘गोल्डन पासपोर्ट’ जिसे आप बढ.ावा देने का हम पर आरोप लगाते हैं? यह आपके शासन का अवशेष है, यह उस अपारदर्शी, गुप्त सौदे का प्रतीक है जिसका आपने समर्थन किया है.” मालवीय ने दावा किया, ”तो, आइए हम रिकॉर्ड को सही करते हैं. जो लोग चले गए हैं वे आपके ‘परम मित्र’ हैं. उनके जाने का दायित्व आप पर है. कर पनाहगाह और अपारदर्शी वित्तीय प्रथाओं को बढ.ावा देने की आपकी विरासत ने उन्हें बाहर जाने दिया. हमारे सुधारों ने न केवल इन खामियों को भरा, बल्कि पारदर्शी और जवाबदेह कर प्रशासन के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को प्रर्दिशत किया है. आपके आरोप आपकी पार्टी के संदिग्ध अतीत की याद दिलाते हैं.”
