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MP वीणा देवी और पति पर दो मतदाता पहचान पत्र रखने का आरोप, निर्वाचन आयोग ने दिया नोटिस

मृत मतदाताओं, एक से अधिक मतदाता पहचान पत्र रखने वालों की सूची पार्टियों के साथ साझा की गई: ईसी

पटना/नयी दिल्ली. निर्वाचन आयोग ने बिहार के वैशाली से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद वीणा देवी और उनके पति एवं जनता दल यूनाइटेड के विधान परिषद सदस्य दिनेश सिंह को कथित तौर पर दो-दो मतदाता पहचान पत्र रखने के लिए बृहस्पतिवार को नोटिस जारी किया. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी.

इससे पहले, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि वीणा देवी और उनके पति दिनेश सिंह के पास दो ईपीआईसी (इलेक्ट्रॉनिक मतदाता पहचान पत्र) कार्ड हैं. अधिकारी ने कहा, ”मुजफ्फरपुर विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) ने सांसद और उनके पति को नोटिस भेजकर 16 अगस्त तक दो मतदाता पहचान पत्र रखने के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग को जवाब देने को कहा है.”

वीणा देवी ने पत्रकारों से कहा, ”मुझे नहीं पता कि मेरा नाम मुजफ्फरपुर विधानसभा सीट की मतदाता सूची में कैसे आया. मैं केवल साहेबगंज विधानसभा सीट की पंजीकृत मतदाता हूं. मुझे इसके बारे में प्रेस के माध्यम से पता चला.” उन्होंने आरोप लगाया कि यह विसंगति निर्वाचन अधिकारियों द्वारा की गई अनियमितताओं के कारण हुई है. उन्होंने कहा कि उन्होंने मुजफ्फरपुर मतदाता सूची से अपना नाम हटाने के लिए एक प्रपत्र जमा किया है.

वीणा देवी ने कहा, ”तेजस्वी यादव जो चाहें वह कहें… वह विपक्ष में हैं, इसलिए वह सत्तारूढ़ दलों के नेताओं के खिलाफ ऐसी बातें कहेंगे.” बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक ‘पोस्ट’ में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत बिहार में प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से कथित तौर पर लिए गए ‘स्क्रीनशॉट’ साझा करते हुए वीणा देवी और दिनेश सिंह के पास दो मतदाता पहचान पत्र होने का आरोप लगाया.

तेजस्वी ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”वह (वीणा देवी) अपनी लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीट की पंजीकृत मतदाता हैं और इसी नाम के संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मुजफ्फरपुर विधानसभा क्षेत्र की भी मतदाता हैं. जीवनसाथी के ‘कॉलम’ में उनके पति, जनता दल यूनाइटेड के विधान परिषद सदस्य दिनेश सिंह का नाम भी दर्ज है.” यादव ने आरोप लगाया कि उनके पति के पास भी दो अलग-अलग विधानसभा सीट के लिए दो ईपीआईसी कार्ड हैं.

उन्होंने कहा, ”वीणा देवी वैशाली से सांसद हैं. इनके पास दो अलग-अलग ईपीआईसी कार्ड हैं-यूटी01134543 और जीएसबी1037894 तथा इनके दो अलग-अलग जिलों के दो अलग-अलग लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में दो अलग-अलग वोट हैं. इनके दो अलग-अलग विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में दो अलग-अलग वोट हैं. दो अलग-अलग ईपीआईसी कार्ड में इनकी अलग-अलग उम्र है. एसआईआर में इन्होंने दो अलग-अलग गणना प्रपत्र भरे.” उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण में इन्होंने दो अलग-अलग प्रपत्र पर दो अलग-अलग हस्ताक्षर किए होंगे.

उन्होंने कहा, ”निर्वाचन आयोग द्वारा प्रकाशित नयी मसौदा सूची में दो अलग-अलग ईपीआईसी कार्ड, दो अलग-अलग लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र, दो अलग-अलग विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, दो अलग-अलग उम्र के साथ इनके दो अलग-अलग वोट कैसे बन गए?” तेजस्वी ने सवाल किया कि क्या यह निर्वाचन आयोग द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-राजग को जिताने के लिए की गई धांधली, फर्जीवाड़ा और मिलीभगत नहीं है? तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि वीणा के पति के पास भी दो ईपीआईसी कार्ड हैं – आरईएम0933267 और यूटी01134527 तथा वह दो अलग-अलग लोकसभा सीट पर पंजीकृत मतदाता भी हैं.

उन्होंने कहा, ”क्या निर्वाचन आयोग एसआईआर में की जा रही अपनी गड़बड़ियों और गलतियों को स्वीकार करेगा? क्या आयोग दिनेश सिंह को दो जगह से दो अलग-अलग नोटिस देगा?” राजद नेता ने बुधवार को वरिष्ठ भाजपा नेता और मुजफ्फरपुर की महापौर निर्मला देवी और उनके दो रिश्तेदारों पर ”दो मतदाता पहचान पत्र रखने” का आरोप लगाया था.

मृत मतदाताओं, एक से अधिक मतदाता पहचान पत्र रखने वालों की सूची पार्टियों के साथ साझा की गई: ईसी

उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्वाचन आयोग को बिहार की मतदाता सूची से हटाये गए 65 लाख नामों का विवरण प्रकाशित करने का निर्देश दिये जाने को लेकर आयोग ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह मृत मतदाताओं और एक से अधिक मतदाता पहचान पत्र रखने वालों की सूची राजनीतिक दलों के साथ साझा कर रहा है.

निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के गणना प्रपत्र में पहले से ही पहचान के प्रमाण के रूप में ‘आधार’ नंबर मांगा जाता है. आयोग ने कहा कि मृत और स्थायी रूप से स्थानांतरित हुए मतदाताओं की सूची 20 जुलाई से राजनीतिक दलों के साथ साझा की जा रही है. न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि वह बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में पारर्दिशता बढ़ाने के लिए मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख नामों का विवरण प्रकाशित करे तथा उन्हें शामिल न करने के कारण भी बताए.

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