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एनएमडीसी के नगरनार इस्पात संयंत्र में उत्पादन शुरू

रायपुर. छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) के नगरनार इस्पात संयंत्र (एनएसपी) ने उत्पादन शुरू कर दिया है. कंपनी के अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि संयंत्र ने ‘हॉट मेटल’ के उत्पादन के बाद केवल नौ दिनों में बुधवार को ‘एचआर कॉइल’ (हॉट रोल्ड कॉइल) कॉइल का उत्पादन करने की उपलब्धि हासिल की है.

राष्ट्रीय खनिज विकास निगम का 30 लाख टन प्रति वर्ष क्षमता वाला इस्पात संयंत्र राजधानी रायपुर से 300 किलोमीटर दूर बस्तर जिले के नगरनार गांव में 1,980 एकड़ क्षेत्र में लगभग 24 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है. संयंत्र के महाप्रबंधक और संचार प्रमुख रफीक अहमद जिनाबड़े ने एक बयान जारी कर कहा, ”कंपनी के कार्यवाहक सीएमडी और निदेशक (वित्त) अमिताव मुखर्जी ने 12 अगस्त को नगरनार इस्पात संयंत्र की शुरुआत की थी.” उन्होंने बताया कि अंतिम उत्पाद एचआर कॉइल का उत्पादन संयंत्र में हॉट मेटल के उत्पादन के ठीक नौ दिन बाद बृहस्पतिवार से शुरू किया गया.

अधिकारी ने कहा कि इस्पात बनाने का कोई पूर्व अनुभव नहीं रखने वाली एक खनन कंपनी की यह उपलब्धि किसी आश्चर्य से कम नहीं है. मुखर्जी ने विज्ञप्ति में कहा है, ”छह दशकों से अधिक समय से हम इस्पात क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. गुणवत्तापूर्ण लौह अयस्क के आपूर्तिकर्ता के रूप में इस्पात बाजार में हमारी पहचान है. आज हम घरेलू इस्पात बाजार में सबसे नये खिलाड़ी के रूप में उभरे हैं और बस्तर को इस्पात मानचित्र पर ले आये हैं.”

उन्होंने कहा है, ”एनएमडीसी भारतीय इस्पात निर्माताओं की प्रतिष्ठित लीग में शामिल हो गया है. बस्तर के स्थानीय समुदाय को लंबे समय से इस सपने के पूरा होने की प्रतीक्षा थी. इस सपने के साकार होने से मुझे बहुत खुशी हो रही है.” मुखर्जी ने कहा, ”हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन हम भाग्यशाली रहे कि हमें केंद्र और राज्य सरकारों तथा इस्पात मंत्रालय से हर स्तर पर समर्थन मिला है. साथ-साथ इस्पात उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य इस्पात इकाइयां, तकनीकी प्रदाता, स्थानीय समुदाय, मीडिया और सभी हितधारक के मजबूत समर्थन के बिना हम अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते.”

विज्ञप्ति में कहा गया है कि 30 लाख टन प्रति वर्ष क्षमता का इस्पात संयंत्र लगभग 24 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है. यह संयंत्र अपने उच्च गुणवत्ता वाले हॉट रोल्ड इस्पात के भंडार के साथ ‘हॉट रोल्ड’ बाजार में अपनी पहचान स्थापित करने के लिए तैयार है, जो अपनी प्रौद्योगिकी के बल पर कई प्रमुख उपभोक्ता क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करेगा.

विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत की नवीनतम और सबसे आधुनिक मिल से आने वाले एचआर कॉइल, शीट और प्लेट देश निर्माण में आवश्यक गुणवत्ता वाले एचआर की बढ़ती मांग को पूरा करेंगे. इनसे एलपीजी सिलेंडर, पुल, इस्पात निर्मित संरचनाएं, जहाज, बड़े व्यास वाले पाइप, भंडारण टैंक, बॉयलर, रेलवे वैगन, साइकिल फ्रेम, इंजीनियरिंग, सैन्य उपकरण, ऑटोमोबाइल, ट्रक के पहियों आदि चीजों का निर्माण होगा.

यह संयंत्र बाद के चरण में जनरेटर, मोटर, ट्रांसफार्मर और ऑटोमोबाइल के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले विशेष प्रकार के इस्पात का भी उत्पादन करेगा. नगरनार इस्पात संयंत्र के विनिवेश की खबरों के बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार (20 अगस्त) को कहा था कि केंद्र सरकार को इसका निजीकरण नहीं करना चाहिए. बघेल ने यह भी कहा था कि राज्य सरकार संयंत्र चलाना चाहती है, लेकिन केंद्र सरकार उसे ऐसा नहीं करने दे रही है.

उन्होंने कहा कि इस संयंत्र से बस्तर के लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं और केंद्र को इससे खिलवाड़ नहीं करना चाहिए. वर्ष 2020 में बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर उस दौरान बन रहे इस्पात संयंत्र का निजीकरण नहीं करने का आग्रह किया था. उसी वर्ष छत्तीसगढ़ विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें कहा गया था कि सदन केंद्र से नगरनार इस्पात संयंत्र का विनिवेश नहीं करने का आग्रह करता है, लेकिन यदि विनिवेश किया गया तो राज्य सरकार इसे खरीदने के लिए तैयार है.

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