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अर्चना तिवारी ने शादी से बचने के लिए रची अपनी ही ‘गुमशुदगी’ की साजिश

भोपाल. मध्यप्रदेश के कटनी की रहने वाली और मंगलवार को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर-खीरी जिले में नेपाल सीमा से पकड़ी गई अर्चना तिवारी ने कथित तौर पर शादी से बचने के लिए अपनी ही ‘गुमशुदगी’ की कहानी रची और वह खुद ही इस पूरे मामले की मुख्य साजिशकर्ता थी. पुलिस के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी.

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन में राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के पुलिस अधीक्षक राहुल कुमार लोढ़ा ने पुलिस आयुक्त कार्यालय में संवाददाताओं को बताया कि अर्चना के परिजनों ने एक पटवारी के साथ अर्चना का रिश्ता तय किया था और वे उस पर पढ़ाई छोड़कर शादी का दबाव बना रहे थे. उन्होंने बताया कि 29 वर्षीय अर्चना इस रिश्ते से खुश नहीं थी इसलिए उसने इस सबसे बचने के लिए अपनी ही गुमशुदगी की साजिश रची. लोढ़ा ने बताया कि इस मामले में युवती स्वयं अपनी मर्जी से अपने पैतृक घर नहीं जाकर अनेक स्थानों पर चली गयी, जिस वजह से फिलहाल कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी.

उन्होंने बताया, ह्लइसके बावजूद मामले में अगर युवती या उसके मित्रों द्वारा किया गया कोई अपराध सामने आता है तो मामला दर्ज किया जायेगा.ह्व पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में अर्चना तिवारी ने बताया, ”मेरे घर वाले मेरी मर्जी के खिलाफ मेरे लिए शादी के रिश्ते देख रहे थे. कुछ दिन पहले मेरे घरवालों द्वारा बताया गया कि तुम्हारे रिश्ते के लिए एक पटवारी लड़का देखा है. इसी तरह बार बार शादी के लिए दबाव डाल रहे थे, जिस कारण से मानसिक रुप से परेशान हो गयी थी.” पुलिस अधीक्षक ने युवती के हवाले से बताया कि इस कारण वह नर्मदा एक्सप्रेस से अपने घर कटनी नहीं जाकर इटारसी पर ही उतर गयी और उसके बाद अपने मित्रों की सहायता से शुजालपुर, इंदौर, हैदराबाद, दिल्ली, धनगुढ़ी (नेपाल) और फिर काठमांडू पहुंच गयी.

अर्चना तिवारी रक्षा बंधन से एक दिन पहले नर्मदा एक्सप्रेस से सात अगस्त को इंदौर से कटनी के लिए रवाना हुई थी लेकिन लग अपने गंतव्य तक नहीं पहुंची. पुलिस के मुताबिक, अर्चना के परिजनों ने रानी कमलापति स्टेशन पर उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. लोढ़ा ने संवाददाताओं को बताया कि शुजालपुर के रहने वाले एक युवक सारांश से अर्चना की इंदौर में दोस्ती हुई थी और दोनों उस दिन एक ही ट्रेन में यात्रा कर रहे थे. उन्होंने बताया कि अर्चना ने सारांश और तेजेंद्र नाम के एक अन्य युवक के साथ के साथ मिलकर अपनी गुमशुदगी की कहानी रची.

अधिकारी ने बताया कि अर्चना ने पहले भागने की योजना बनाई थी लेकिन यह सोचकर उसने इसे गुमशुदगी की शक्ल दी कि जीआरपी इस पर इतना ध्यान नहीं देगी. लोढ़ा के मुताबिक, तेजेन्द्र ने अर्चना को इटारसी स्टेशन के उन स्थानों की जानकारी दी, जहां सीसीटीवी नहीं थे.

उन्होंने बताया कि तेजेन्द्र ने नर्मदापुरम में ट्रेन में अर्चना को कपड़े दिये और इटारसी स्टेशन से बाहर निकलने में मदद की. अधिकारी ने बताया कि लोकेशन का पता न लगे, इसलिए अर्चना ने बागतवा के जंगलों में अपना मोबाइल फेंक सारांश के साथ कार से निकल गई. लोढ़ा ने बताया कि उसी रात एक मामले में दिल्ली पुलिस तेजेन्द्र को अपने साथ ले गई और इसके बाद इस मामले की परत खुलने लगी.

उन्होंने बताया कि शक होने पर जीआरपी की टीम ने दिल्ली जाकर जेल में तेजेन्द्र से पूछताछ की और फिर सारांश को पकड़ा.
अधिकारी ने बताया कि सारांश के जरिए काठमांडू से अर्चना को बुलाया गया और फिर उसे दिल्ली के रास्ते भोपाल लाया गया.
लोढ़ा ने बताया कि अर्चना ने सारांश के साथ प्रेम संबंध से इनकार किया है. इंदौर उच्च न्यायालय में वकालत करने के साथ ही दीवानी न्यायाधीश की परीक्षा की तैयारी कर रही अर्चना सात अगस्त को नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन से कटनी के लिए निकली थीं.

अर्चना की आखिरी ‘लोकेशन’ भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन की मिली थी, जिसके बाद उसके परिजनों ने रानी कमलापति जीआरपी थाने में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया था. पुलिस ने अर्चना का पता लगाने के लिए रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से लेकर इटारसी और कटनी तक के क्षेत्रों में भी गहनता से जांच की तथा स्टेशन एवं आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी खंगाले.

 

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