आरएसएस प्रार्थना विवाद पर शिवकुमार ने कहा- माफी मांगता हूं; पार्टी के दबाव से किया इनकार
बेंगलुरु. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की प्रार्थना गाने के कारण पार्टी के भीतर आलोचनाओं का सामना कर रहे कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि इस घटना के कारण यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह माफी मांगते हैं. हालांकि उन्होंने यह दावा भी किया कि विधानसभा में प्रार्थना के जरिये वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधना चाहते थे.
शिवकुमार ने दावा किया कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि उनकी कांग्रेस पार्टी में कुछ लोग इस घटना का ‘दुरुपयोग’ करने और भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा कि उनका रिश्ता भगवान और भक्त जैसा है. कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के प्रमुख शिवकुमार ने यह भी कहा कि अगर आरएसएस के प्रार्थना गायन से किसी को ठेस पहुंची है, तो उन्हें खेद है. उन्होंने कहा कि वह एक कांग्रेसी हैं और मरते दम तक कांग्रेसी ही रहेंगे. निष्कासित कैबिनेट सदस्य और पार्टी के ही विधायक के एन राजन्ना ने सवाल किया कि शिवकुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई.
उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने यह भी स्पष्ट करने का प्रयास किया कि उन्होंने विधानसभा में ”किसी संदर्भ में इसका उल्लेख किया था”. शिवकुमार ने साथ ही कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की प्रशंसा नहीं की. उन्होंने कहा कि वह भाजपा नेता आर अशोक की ”खिंचाई” करना चाहते थे. शिवकुमार ने हाल में सदन के अंदर आरएसएस का प्रार्थना गाकर सभी को हैरान कर दिया था.
शिवकुमार ने कहा, ”पिछले सप्ताह विधानसभा में भगदड़ की घटना (4 जून को चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई, जिसमें 11 लोग मारे गए थे) पर चर्चा के दौरान, विपक्ष के नेता आर अशोक की खिंचाई करने के लिए, मैंने आरएसएस की प्रार्थना की दो-तीन पंक्तियां पढ़ीं. मेरा इरादा उनकी प्रशंसा करना नहीं था. मैंने बस उनकी (भाजपा की) खिंचाई करने की कोशिश की. मेरे कुछ मित्र (कांग्रेस में) इसका राजनीतिक फायदा उठा रहे हैं, इसका दुरुपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं और भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं.”
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि विधानसभा में उनके द्वारा दिए गए “सरसरी संदर्भ” को काटकर किसी और चीज से जोड़ दिया गया और उसे राष्ट्रीय समाचार बना दिया गया. उन्होंने कहा, ”यदि किसी को ठेस पहुंची है, जिसके बारे में मेरे कुछ पार्टी सहयोगी टिप्पणी कर रहे थे तो मुझे इसके लिए खेद है. ‘इंडिया’ गठबंधन में, अलग-अलग राजनीतिक दलों में मेरे कई मित्र हैं. मैं किसी को ठेस नहीं पहुंचाना चाहता, मैं उनकी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहता. मैं उन सभी से माफ.ी मांगता हूं.”
शिवकुमार ने चिन्नास्वामी स्टेडियम में चार जून को हुई भगदड़ पर 21 अगस्त को विधानसभा में चर्चा के दौरान आरएसएस की प्रार्थना ”नमस्ते सदा वत्सले… की कुछ पंक्तियां पढ़ी थीं.” उन्होंने कहा, ”मैं किसी से बड़ा नहीं हूं, मेरा जीवन समाज में सबको ताकत देने के लिए है.” उन्होंने कहा कि एक निष्ठावान कांग्रेसी होने के नाते वह किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते. उन्होंने कहा, ”अगर आपको लगता है कि मैंने कोई गलती की है, जो मैंने नहीं की है, तब भी मैं माफी मांगने को तैयार हूं.” कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए शिवकुमार ने कहा, ”गांधी परिवार के प्रति मेरी निष्ठा पर कोई सवाल नहीं उठा सकता. मैं जन्म से कांग्रेसी हूं, मरते दम तक कांग्रेसी ही रहूंगा.” शिवकुमार ने कहा कि पार्टी ने उन पर माफी मांगने का दबाव नहीं डाला है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी आलाकमान या किसी भी नेता ने उनसे इस बारे में सवाल नहीं किया है, क्योंकि उन्हें उन पर भरोसा है.
उन्होंने कहा, ”…मैं पूरे देश में, समर्थन करने वालों, जिनमें मेरे मीडिया के दोस्त भी शामिल हैं, यह संदेश देना चाहता हूं कि मैं एक निष्ठावान कांग्रेसी के रूप में प्रतिबद्ध हूं, मैं मरते दम तक एक कांग्रेसी रहूंगा. गांधी परिवार के साथ मेरी निष्ठा और रिश्ता भगवान और भक्त के जैसा है. गांधी परिवार मेरा भगवान है और मैं भक्त हूं.” शिवकुमार ने कहा कि उनके इतिहास, प्रतिबद्धता, निष्ठा और विचारधारा को जानने के बावजूद, अगर कोई उन पर संदेह करना चाहता है, तो “उनसे बड़ा मूर्ख कोई नहीं है”.
उन्होंने दावा किया, ”छात्र जीवन से लेकर आज तक के मेरे सफर में, मेरी पीढ़ी के नेताओं में से कोई भी इन मामलों में मेरे आस-पास भी नहीं पहुंच सकता.” किसी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, “….हमारी पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने मुझे कुछ सलाह दी है और मीडिया में बोल रहे हैं. उन्हें आकर मुझसे बात करने दीजिए.” इसके अलावा, उन्होंने याद किया कि जब महाराष्ट्र में विलास राव देशमुख के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार खतरे में थी, तो पार्टी नेताओं के निर्देश पर, उन्होंने सरकार बचाने के लिए सौ से अधिक कांग्रेस विधायकों को कर्नाटक पहुंचाया था.
उन्होंने कहा, ”तब भी मेरे खिलाफ साजिश हुई थी और यह झूठी खबर फैलायी गई थी कि मैंने हिरण का मांस परोसा है और छापे पड़े थे. फिर अहमद पटेल के राज्यसभा चुनाव के दौरान, गुजरात के विधायक यहां थे. मेरे परिवार के 77 सदस्यों पर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय), सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) और आयकर विभाग ने 400 मामले दर्ज किए. मुझे भी गिरफ़्तार किया गया, जेल भेजा गया, अब मैं जेल से बाहर हूं.” उन्होंने कहा कि जेल जाने के बाद कई लोगों ने कहा था कि उनकी राजनीति खत्म हो गई है. उन्होंने कहा, ”तिहाड़ जेल से बाहर आने पर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने मुझे उप-मुख्यमंत्री और (कर्नाटक प्रदेश) अध्यक्ष का पद दिया और मैं संगठन और जनता, दोनों के लिए अथक परिश्रम कर रहा हूँ.” अपने “नरम हिंदुत्व” के खिलाफ आलोचना पर एक सवाल का जवाब देते हुए, शिवकुमार ने कहा, “मैं अपना धर्म छोड़ने के लिए तैयार नहीं हूं, मैं जन्मजात हिंदू हूं. मैं ऐसा कैसे कर सकता हूं? लेकिन मैं हर धर्म में विश्वास करता हूं, ईसाई, मुस्लिम, जैन…. मैं एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति हूं, मैं मानवता में विश्वास करता हूं.” वहीं उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा विधानसभा में आरएसएस का प्रार्थना गाने के लिए माफ.ी मांगने का स्वागत करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बी. के. हरिप्रसाद ने कहा कि पार्टी में किसी को भी संघ को किसी भी तरह से “वैध” नहीं ठहराना चाहिए.
एमएलसी हरिप्रसाद ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार से माफ.ी मांगने की मांग की थी. हरिप्रसाद ने एक सवाल के जवाब में कहा, ”कांग्रेस पार्टी मैंने या डी.के. शिवकुमार ने नहीं बनाई है, किसी ने इसे भविष्य के लिए बचाने के लिए हमें दिया है. अगर हममें ताकत है, तो हमें इसे बचाना होगा और आने वाली पीढ़ी को देना होगा. कोई भी स्थायी नहीं है, कोई भी 500 साल तक जीवित नहीं रहेगा.” उन्होंने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उन्हें शिवकुमार से व्यक्तिगत रूप से कोई दिक्कत नहीं, बल्कि महात्मा गांधी की हत्या करने वाले संगठन की प्रार्थना गाने के कृत्य से है.
उन्होंने कहा, “उन्हें (शिवकुमार को) पार्टी अध्यक्ष होने के नाते, ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए थीं. अगर वह उपमुख्यमंत्री के तौर पर ऐसा कहते तो मुझे कोई आपत्ति नहीं होती. कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते, आरएसएस की प्रार्थना गाने की कोई जरूरत नहीं, जो कांग्रेस, संविधान और तिरंगे झंडे का विरोधी है. उन्होंने प्रार्थना क्यों पढ़ी, यह एक अलग मामला है.”