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बस्तर के जंगल में नक्सलियों की ओर से बनाई गई 70 मीटर लंबी सुरंग का पता चला

रायपुर. छत्तीसगढ़ में सुरक्षार्किमयों ने बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों की सीमा पर घने जंगल में नक्सलियों द्वारा तैयार गई 70-मीटर लंबी सुरंग का पता लगाया है. प्रथम दृष्टया इसका इस्तेमाल बंकर एवं साजो-सामान को छिपाने के लिए किया जाता था. एक पुलिस अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी.

पुलिस ने बताया कि उसे पहले भी बस्तर संभाग में ऐसे भूमिगत रास्ते होने की जानकारी मिली थी, लेकिन पहली बार ऐसी सुरंग का पता लगाया गया है. दंतेवाड़ा के अपर पुलिस अधीक्षक आर. के. बर्मन ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि बीजापुर जिले में लगभग 70 मीटर लंबी और छह फुट गहरी सुरंग का पता मंगलवार को उस वक्त चला जब दंतेवाड़ा के सुरक्षार्किमयों की एक संयुक्त टीम नक्सल-विरोधी अभियान चला रही थी.

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ पुलिस की इकाई ‘जिला रिजर्व गार्ड’ और ‘बस्तर फाइटर्स’ तथा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 230वीं बटालियन के कर्मी अभियान में शामिल थे. उन्होंने बताया, ”तोडोपत-उसपारी गांव के पास गश्त के दौरान सुरक्षार्किमयों ने सुरंग देखी. इसका प्रवेश मार्ग लट्ठों, झाड़ियों और मिट्टी से ढका हुआ था.” बर्मन के अनुसार, बस्तर क्षेत्र में भूमिगत सुरंग का पता लगाये जाने का यह पहला मामला है.

पुलिस अधिकारी ने बताया, ”प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि इलाके में अभियान के दौरान सुरक्षार्किमयों से छिपने के लिए नक्सलियों ने बंकर के रूप में इस्तेमाल करने के वास्ते इस सुरंग को खोदा है. हो सकता है कि वे इसका इस्तेमाल नक्सल-संबंधी सामग्रियों को छिपाने के लिए भी करते रहे हों.” उन्होंने साथ ही कहा कि विस्तृत जानकारी जांच के उपरांत ही सामने आएगी.

एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया, ”पुलिस को पहले भी बस्तर क्षेत्र के जंगलों में नक्सलियों द्वारा सुरंग खोदने की जानकारी मिली थी, लेकिन पहली बार ऐसी सुरंग का पता लगाया गया है.” दंतेवाड़ा और बीजापुर बस्तर संभाग के सात जिलों में शामिल है.
इस बीच, बर्मन ने कहा कि दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों की सीमा से लगे गांवों में माओवादियों की भैरमगढ़ और इंद्रावती क्षेत्र समितियों के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के बारे में खुफिया जानकारी मिलने के बाद नक्सल-विरोधी अभियान शुरू किया गया था.

उन्होंने कहा कि सुरक्षार्किमयों और नक्सलियों के बीच संक्षिप्त गोलीबारी हुई और नक्सलियों ने बीजीएल (बैरल ग्रेनेड लांचर) से गोले दागे. उन्होंने बताया कि नक्सली जल्द ही घटनास्थल से भाग गए. बर्मन ने बताया कि सुरक्षार्किमयों ने लौटते समय माओवादियों से जुड़े तीन स्मारकों को नष्ट कर दिया और जंगलों में छिपाकर रखा गया एक कुकर बम बरामद किया. सुकमा और बीजापुर जिलों की सीमा पर मंगलवार को नक्सलियों के साथ हुए मुठभेड़ में कोबरा इकाई के दो कमांडो समेत सीआरपीएफ के तीन जवान शहीद हो गए थे और 15 अन्य घायल हो गए थे.

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