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कफ सिरप से मौत : छिंदवाड़ा जिले में मृतकों की संख्या हुई 16

'जहरीले' कफ. सिरप मामले की न्यायिक जांच हो: कांग्रेस

छिंदवाड़ा/नयी दिल्ली. मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में ‘दूषित’ कफ सिरप पीने से गुर्दे (किडनी) में संक्रमण से पीड़ित दो और बच्चों की नागपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई. इसके साथ ही जिले में अब तक कुल 16 बच्चों की मौत हो चुकी है. एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

अधिकारियों के अनुसार छिंदवाड़ा के इन बच्चों की मौत किडनी के संदिग्ध रूप से फेल होने के कारण हुई है, जो ‘विषाक्त’ को्ड्रिरफ कफ सिरप के सेवन से जुड़ी है. छिंदवाड़ा के अपर जिलाधिकारी धीरेंद्र सिंह ने कहा, ”आज एक और बच्ची की मौत की सूचना मिली है. अभी तक हमारे छिंदवाड़ा जिले में 16 बच्चों की मौत हो चुकी है.” उन्होंने बताया कि दो वर्षीय मृतक बच्ची जयुषा यदुवंशी जिले के जुन्नारदेव की रहने वाली थी और विगत एक हफ्ते से नागपुर के शासकीय चिकित्सालय में उसका इलाज हो रहा था.

उन्होंने कहा, ”आज उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.” अपर जिलाधिकारी ने बताया कि छिंदवाड़ा जिले के छह बच्चों का नागपुर के विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है और इनमें से पांच की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है. इससे पहले, सोमवार को तामिया ब्लॉक के भरियाढना गांव की रहने ढाई साल की धानी डहेरिया की नागपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई थी.

परिजनों ने बताया कि चिकित्सक द्वारा दिए गए को्ड्रिरफ सिरप के सेवन के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ गई थी और उसकी किडनी फेल हो गई. उन्होंने बताया कि डहेरिया का इलाज पहले परासिया में डॉक्टर प्रवीण सोनी के पास कराया गया था लेकिन हालत बिगड़ने पर उसे नागपुर में भर्ती कराया गया.

भोपाल में राज्य सरकार के एक अधिकारी ने इससे पहले बताया था कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के नागपुर के विभिन्न अस्पतालों में राज्य के नौ बच्चों का इलाज चल रहा है, जिनमें से सात छिंदवाड़ा और दो बैतूल के हैं. जयुषा यदुवंशी और धानी डहेरिया की मौत से पहले मध्यप्रदेश सरकार ने छिंदवाड़ा में 14 बच्चों की मौत की पुष्टि की थी. इस मामले में जांच के बीच सोमवार को राज्य सरकार ने दो औषधि निरीक्षकों और खाद्य एवं औषधि प्रशासन के एक उप निदेशक को निलंबित कर दिया था और राज्य के औषधि नियंत्रक का भी तबादला कर दिया था.

छिंदवाड़ा के डॉ. प्रवीण सोनी को लापरवाही के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, जबकि को्ड्रिरफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. जहरीला कफ सिरप पीने से छिंदवाड़ा के अब तक 14 बच्चों की किडनी खराब होने से मौत हो गई. इन 14 मृतकों में से 11 परासिया उपमंडल से, दो छिंदवाड़ा शहर से और एक चौरई तहसील से हैं. मध्यप्रदेश पुलिस ने मौतों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है और तमिलनाडु में स्थित को्ड्रिरफ कफ सिरप की निर्माता कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

‘जहरीले’ कफ. सिरप मामले की न्यायिक जांच हो: कांग्रेस

कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में ‘जहरीला’ कफ.. सिरप पीने से कई बच्चों की मौत होने के मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए. मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने दोनों प्रदेशों में ‘जहरीले’ कफ.. सिरप से बच्चों की मौत को लेकर भाजपा की सरकारों पर संवेदनहीन होने का आरोप लगाया.

सिंघार ने संवाददाताओं से कहा, ” छिंदवाड़ा में 16 बच्चों की मौत हो गई. हमारे स्थानीय विधायक ने कई बार सरकार को चेताया, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया. मामला जब ज्यादा ब­ढ़ा तो एक बच्ची का शव कब्र से निकालकर पोस्टमॉर्टम कराया गया.” उन्होंने दावा किया कि राज्य में बच्चों की मौत होती रही और मुख्यमंत्री मोहन यादव असम के काजीरंगा पार्क में घूम रहे थे.

कांग्रेस नेता ने कहा, ”मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला कहते हैं कि कफ. सिरप से कोई मृत्यु नहीं हुई है और वह कफ. सिरप बनाने वाली कंपनी को क्लीनचिट देते रहे. आखिर ये कैसी संवेदनहीन सरकार है और उप मुख्यमंत्री का दवा कंपनी से क्या रिश्ता है?” सिंघार का कहना है कि भारत सरकार ने बीते तीन अक्टूबर को कफ. सिरप को लेकर परामर्श जारी किया था, लेकिन मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकार नहीं जागीं. उन्होंने आरोप लगाया कि अब साफ हो गया है कि इसके पीछे भारी भ्रष्टाचार है.

मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ”बच्चों की मौत के मामले में न्यायिक जांच हो. मृतक के परिवार के एक सदस्य को नौकरी मिले और मृतक के परिवारों का इलाज में जितना पैसा खर्च हुआ है, उतनी राशि उन्हें मिलनी चाहिए.” टीकाराम जूली ने आरोप लगाया, ”राजस्थान और मध्य प्रदेश, दोनों जगह पर्ची वाले मुख्यमंत्री हैं. ये लोग फैसला नहीं ले पाते और फैसला सीधा दिल्ली से आता है.” उनका कहना है कि राजस्थान सरकार ने अभी तक कोई आदेश नहीं दिया है कि जहरीला कफ. सिरप लोगों को नहीं दिया जाए.
जूली ने कहा, ”राजस्थान में कांग्रेस सरकार देश में सबसे पहले ‘स्वास्थ्य का अधिकार’ योजना लाई थी. लेकिन आज भाजपा सरकार ने ऐसी हालत बना दी है कि लोगों को सही इलाज ना मिलने के कारण जान गंवानी पड़ रही है.” उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान की ‘पर्ची सरकार’ आज ‘उड़न खटोला सरकार’ बन चुकी है तथा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ज्यादातर समय ‘दिल्ली दरबार’ में हाजिरी लगाने में व्यस्त रहते हैं.

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