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छत्तीसगढ़ : सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में 30 नक्सली ढेर, एक जवान बलिदान

बीजापुर/कांकेर. छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में 30 नक्सली मारे गए. इस दौरान एक जवान की भी मृत्यु हो गई. पुलिस अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के अंतर्गत बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में तथा कांकेर जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 30 नक्सलियों को मार गिराया.

उन्होंने कहा कि बीजापुर जिले में 26 नक्सली मारे गए और एक जवान की भी मृत्यु हो गई, जबकि कांकेर जिले में चार अन्य नक्सली मारे गए. बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र कुमार यादव ने बताया कि गंगालूर थाना क्षेत्र के अंतर्गत अण्ड्री गांव के जंगल में माओवादियों की उपस्थिति की सूचना पर नक्सल विरोधी अभियान में बीजापुर जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), बस्तर फाइटर, एसटीएफ और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को रवाना किया गया था.

यादव ने बताया कि अभियान के दौरान आज सुबह लगभग सात बजे से सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई, जो शाम तक रूक-रूक कर चलती रही. उन्होंने बताया कि मुठभेड़ समाप्त होने के बाद जब सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ स्थल की तलाशी ली तब वहां से 26 वर्दीधारी माओवादियों का शव, बड़ी संख्या में एके 47 राइफल, इंसास राइफल, .303 राइफल, रॉकेट लांचर, बैरल ग्रेनेड लांचर और भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किया गया. अधिकारी ने कहा कि मुठभेड़ में बीजापुर डीआरजी के जवान राजू ओयम की भी मौत हो गई.

कांकेर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इंदिरा कल्याण एलेसेला ने बताया कि आज कांकेर और नारायणपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में माओवादियों की उपस्थिति की सूचना पर डीआरजी कांकेर, बस्तर फाईटर्स और सीमा सुरक्षाबल के जवानों को नक्सल विरोधी अभियान में रवाना किया गया था.

एलेसेला ने बताया कि अभियान के दौरान छोटेबिटिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिनागुंडा, कुरूषकोड़ो और पांगुर गांव के मध्य जंगल पहाड़ में पुलिस दल और माओवादियों के बीच सुबह लगभग आठ बजे से मुठभेड़ शुरू हुई, जो शाम तक रूक-रूक कर चलती रही. उन्होंने बताया कि मुठभेड़ के बाद घटना स्थल की तलाशी के दौरान चार माओवादियों का शव और स्वाचालित हथियार तथा अन्य सामान बरामद किया गया. अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की पहचान के प्रयास जारी हैं. दंतेवाड़ा रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक कमलोचन कश्यप ने बताया कि मुठभेड़ में और अधिक नक्सलियों के घायल या मारे जाने की संभावना को देखते हुए आस पास के क्षेत्र में खोज अभियान जारी है.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे ‘नक्सल मुक्त भारत’ अभियान की दिशा में एक बड़ी सफलता बताया. शाह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”नरेन्द्र मोदी सरकार नक्सलियों के विरुद्ध ‘रुथलेस अप्रोच’ (बिना कोई रहम किए) से आगे बढ़ रही है और समर्पण से लेकर समावेशन की तमाम सुविधाओं के बावजूद जो नक्सली आत्मसमर्पण नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ ‘कतई बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपना रही है. अगले साल 31 मार्च से पहले देश नक्सल-मुक्त होने वाला है.” छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षाबलों की इस सफलता को नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है.

साय ने कहा, ”सुरक्षाबलों की वीरता और अदम्य साहस को नमन है. छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई मजबूती से जारी है. यह संघर्ष तब तक नहीं रुकेगा, जब तक प्रदेश पूरी तरह से नक्सलमुक्त नहीं हो जाता.” मुख्यमंत्री ने इस अभियान के दौरान डीआरजी के एक जवान की मौत को लेकर कहा, ”हमारे वीर जवानों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा. जवान ने छत्तीसगढ़ को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है. उनका यह त्याग व्यर्थ नहीं जाएगा.”

साय ने कहा, ”मुझे पूर्ण विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का संकल्प पूरा होगा. प्रदेश का हर नागरिक भयमुक्त जीवन जिएगा. नक्सलवाद की अंतिम घड़ी आ चुकी है.” छत्तीसगढ़ में इस मुठभेड़ के साथ ही इस साल अब तक राज्य में अलग-अलग मुठभेड़ों में 113 नक्सली मारे जा चुके हैं. इनमें से 97 बस्तर संभाग में बीजापुर और कांकेर जिलों सहित सात जिलों में मारे गए.

नयी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, 2025 में अब तक देश के विभिन्न हिस्सों में 104 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया और 164 ने आत्मसमर्पण किया है. बयान के मुताबिक, वर्ष 2024 में 290 नक्सलियों को मार गिराया गया, 1090 को गिरफ्तार किया गया और 881 ने आत्मसमर्पण कर दिया. अब तक कुल 15 शीर्ष नक्सल नेताओं को मार गिराया गया है. इसके मुताबिक, वर्ष 2004 और 2014 के बीच नक्सल हिंसा की कुल 16,463 घटनाएं हुईं. हालांकि, 2014 से 2024 तक नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान नक्सल हिंसा की 7,744 घटनाएं हुईं, जो 53 प्रतिशत तक की गिरावट दर्शाता है. बयान के मुताबिक, 2014 में देश में 126 जिले नक्सल प्रभावित थे, लेकिन 2024 तक ऐसे जिलों की संख्या घटकर केवल 12 रह गई है.

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