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‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सशस्त्र बलों ने एकजुटता, रणनीतिक दूरदर्शिता का प्रदर्शन किया: राष्ट्रपति

नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि देश के सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान एकजुटता और रणनीतिक दूरर्दिशता की ताकत का प्रदर्शन किया, जिसके परिणामस्वरूप नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार आतंकवादी बुनियादी ढांचे को ध्वस्त किया गया.

पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने सात मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान के नियंत्रण वाले इलाकों में आतंकी ढांचों को निशाना बनाया गया. इस हमले के बाद चार दिनों तक भीषण झड़पें हुईं, जो 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति के साथ समाप्त हुईं.

यहां राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के 65वें पाठ्यक्रम के संकाय और पाठ्यक्रम सदस्यों को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा कि बदलते भू-राजनीतिक माहौल और सुरक्षा संदर्भ गतिशील प्रतिक्रियाओं की मांग करते हैं. उन्होंने कहा कि भारत सशस्त्र बलों को तकनीकी रूप से उन्नत युद्ध के लिए तैयार बल के रूप में परिर्वितत करने में लगा हुआ है, जो बहु-क्षेत्रीय एकीकृत अभियान में सक्षम हो.

राष्ट्रपति ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे सशस्त्र बलों ने एकजुटता और रणनीतिक दूरर्दिशता की ताकत का प्रदर्शन किया. सेना के तीनो अंगों की बेहतर प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप प्रभावी तालमेल स्थापित हुआ.” मुर्मू ने सशस्त्र बलों के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा, “नियंत्रण रेखा के पार और सीमा पार के क्षेत्रों में अंदर तक आतंकी बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने के सफल अभियान के पीछे यही तालमेल था.” राष्ट्रपति ने कहा कि एकजुटता को ब­ढ़ावा देने की प्रक्रिया सैन्य मामलों के विभाग के गठन के साथ शुरू हुई, जिसके सचिव प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) हैं.

उन्होंने कहा, “मुझे यह जानकर खुशी हुई कि एकीकृत थिएटर कमांड और एकीकृत युद्धक समूहों की स्थापना के माध्यम से सशस्त्र बलों के पुनर्गठन के प्रयास चल रहे हैं.” मुर्मू ने कहा कि सार्वभौमिक मूल्य हमारे राष्ट्रीय हितों को परिभाषित करने के मूल में हैं और भारतीय परंपरा ने हमेशा पूरी मानवता को एक परिवार के रूप में देखा है.

उन्होंने कहा, “संपूर्ण विश्व एक परिवार है, यह समृद्ध भावना ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ में व्यक्त होती है. सार्वभौमिक भाईचारा और शांति हमारी आस्था के मूलमंत्र रहे हैं. लेकिन हमने मानवता और हमारे राष्ट्र के लिए हानिकारक ताकतों को हराने के लिए युद्ध को लेकर तैयार रहने को भी महत्व दिया है.” राष्ट्रपति ने ‘महाभारत’ का हवाला देते हुए कहा कि इसमें उन मूल्यों की अभिव्यक्ति मिलती है जिन्हें हम संजोते हैं.

उन्होंने कहा, “युद्ध को टालने और सौहार्दपूर्ण समाधान पर पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास किया गया. शांति के प्रयासों का नेतृत्व मुख्य पात्र कृष्ण ने किया, जिन्हें हम भगवान मानते हैं. जब युद्ध अपरिहार्य हो गया, तो कृष्ण ने सबसे महत्वपूर्ण योद्धाओं में से एक अर्जुन से कहा कि वे सभी संदेहों को दूर कर लें और बहादुरी से लड़ें. इस प्रकार, युद्ध और शांति के प्रति समग्र भारतीय दृष्टिकोण, शांति और अहिंसा के मूल्यों को सर्वोच्च महत्व देता है.” मुर्मू ने कहा कि लेकिन जब कोई लड़ाई अपरिहार्य हो जाती है तो यह पूरे संकल्प के साथ लड़ने के लिए भी प्रेरित करती है.

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