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यतींद्र सिद्धरमैया के बयान पर कर्नाटक में सत्तारू­ढ़ कांग्रेस में हलचल

बेंगलुरु. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के बेटे यतींद्र के इस बयान के बाद राज्य में सत्तारू­ढ़ कांग्रेस में बृहस्पतिवार को खलबली मच गई कि उनके पिता अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं और लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली भी उनके जैसी ही प्रगतिशील विचारधारा वाले नेता हैं.

नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच यतींद्र के इस बयान से ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या वह अपने पिता के उत्तराधिकारी के बारे में बात कर रहे हैं. इस पद के प्रबल दावेदार उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने इस मामले में तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की लेकिन जारकीहोली ने कहा कि यतींद्र ने केवल अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं.

जारकीहोली ने हालांकि स्पष्ट किया कि वह 2028 में राज्य में विधानसभा चुनाव के दौरान शीर्ष पद के लिए दावा पेश करेंगे. यतींद्र ने बुधवार को बेलगावी जिले के चिक्कोडी में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था,”वह (सिद्धरमैया) अपने राजनीतिक करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं. ऐसे समय में वैचारिक रूप से प्रगतिशील सोच रखने वालों का मार्गदर्शन और नेतृत्व करने के लिए एक नेता की आवश्यकता है.” यतींद्र ने कहा था, ”ऐसे नेता मिलना मुश्किल हैं जो सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हों, लेकिन जारकीहोली प्रतिबद्धता के साथ अपना काम कर रहे हैं. उन्हें ऐसा करते रहना चाहिए.” जब डी के शिवकुमार से यतींद्र के बयान पर प्रतिक्रिया देने को कहा गया तो उन्होंने कहा, ”मैं अभी कुछ नहीं कहना चाहता. मैं मीडिया का हिस्सा नहीं बनना चाहता. मैं बाद में उचित समय पर बात करूंगा.” जारकीहोली ने कहा कि ये बातें पार्टी आलाकमान तय करता है.

उन्होंने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा, ”उन्होंने (यतींद्र) केवल अपनी निजी राय व्यक्त की है और हर कोई अपनी राय व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र है. अंतत? पार्टी आलाकमान और पार्टी विधायक ही फैसला करेंगे. खैर, अभी बहुत समय है.” उन्होंने कहा कि वह सभी को एक साथ लाने की कोशिश करेंगे, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी नेताओं पर छोड़ दिया गया है.

मंत्री ने स्पष्ट किया, ”मैं पहले ही कह चुका हूं कि मैं 2028 में मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश करूंगा लेकिन अंतिम फैसला पार्टी को लेना है. सब कुछ अभी तय नहीं किया जा सकता. अभी 30 महीने बाकी हैं. हमें देखना होगा कि तब क्या होगा. यह पार्टी और मौजूदा हालात पर निर्भर करेगा.” जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका निभाएंगे तो जारकीहोली ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियंक खरगे ने भी कहा कि जारकीहोली कांग्रेस के उन नेताओं में से एक हैं जो पार्टी की विचारधारा को आगे ब­ढ़ा रहे हैं.

मंत्री ने कहा, ”हमारी पार्टी में कई लोग हैं जो हमारी पार्टी की विचारधारा को आगे ब­ढ़ा रहे हैं और सतीश जारकीहोली ने खुद कहा है कि वह उनमें से एक हैं. वह अंधविश्वास के खिलाफ और भारतीय संविधान के पक्ष में अभियान चला रहे हैं. इसमें कुछ भी गलत नहीं है. इसमें गलत क्या है? वह कांग्रेस के प्रति मूल रूप से प्रतिबद्ध हैं.” जारकीहोली द्वारा मुख्यमंत्री पद के लिए दावा करने के बयान पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियंक ने कहा कि इस संबंध में पार्टी और लोग फैसला करेंगे.

शिवकुमार के इन दिनों ”बहुत अधिक” मंदिर जाने पर प्रियंक खरगे ने कहा, ”शिवकुमार हमेशा से ही भक्त रहे हैं लेकिन मीडिया उन पर अब ध्यान केंद्रित कर रहा है.” मंत्री ने कहा, ”मैं उन्हें पिछले तीन दशक से मंदिरों और मठों में जाते हुए देख रहा हूं.” मुख्यमंत्री पद में बदलाव की चर्चाओं के बीच सिद्धरमैया लगातार दोहराते रहे हैं कि वह पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे. मई 2023 में विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा थी. कांग्रेस शिवकुमार को मनाने में कामयाब रही थी और उन्हें उप-मुख्यमंत्री बनाया गया था.

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