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बीजापुर में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में माओवादियों का नेता ढेर

बीजापुर. छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने 40 लाख रुपये के इनामी माओवादी नेता नरसिंह चालम उर्फ सुधाकर को एक मुठभेड़ में मार गिराया है. पुलिस अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. पिछले महीने बस्तर क्षेत्र में सुरक्षाबलों द्वारा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू को मार गिराए जाने के बाद इस कार्रवाई से माओवादियों को एक और बड़ा झटका लगा है.

सुरक्षाबलों के इस सफलता पर राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि ‘लाल आतंक’ का अंत हो रहा है, नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है. बस्तर क्षेत्र में तैनात पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के जंगल में उस समय गोलीबारी हुई जब सुरक्षाबलों का एक संयुक्त दल नक्सलियों के वरिष्ठ कैडर की मौजूदगी के बारे में सूचना मिलने के आधार पर नक्सल रोधी अभियान पर निकला था.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि बुधवार को शुरू किए गए इस संयुक्त अभियान में छत्तीसगढ़ पुलिस की दोनों इकाइयां, जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की कोबरा बटालियन के जवान शामिल थे.
अधिकारी ने बताया कि माओवादी नेता सुधाकर, तेलंगाना राज्य समिति के सदस्य बांदी प्रकाश, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) के सदस्य पप्पा राव और कुछ अन्य सशस्त्र नक्सलियों की मौजूदगी के बारे में मिली सूचना के आधार पर यह अभियान शुरू किया गया.

उन्होंने बताया कि जब सुरक्षाबलों के जवान जंगल में थे तभी अचानक नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसका सुरक्षाबलों ने जवाब दिया. उन्होंने बताया कि जब गोलीबारी बंद हुई तब घटनास्थल से एक माओवादी का शव और एक एके-47 राइफल बरामद की गयी. अधिकारी ने बताया कि 67 वर्षीय सुधाकर को आनंद, चंति बालकृष्ण, रामाराजू, अरविंद और सोमन्ना के नाम से भी जाना जाता था और वह आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले के प्रगदावरम गांव का निवासी था. उन्होंने बताया कि माओवादियों की केंद्रीय समिति का सदस्य सुधाकर, प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सर्वोच्च शासी निकाय, रिवोल्यूशनरी पॉलिटिकल स्कूल और सेंट्रल रीजनल ब्यूरो (सीआरबी) का भी प्रभारी था.

बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया, “सुधाकर कई हिंसक घटनाओं के लिए जिम्मेदार था, जिसके परिणामस्वरूप कई निर्दोष आदिवासी नागरिकों की मौत हुई थी और सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे. इसके अलावा, माओवादी वैचारिक प्रशिक्षण स्कूल के प्रभारी के रूप में वह हिंसक और राष्ट्र-विरोधी विचारधाराओं के साथ युवाओं को गुमराह करने और उन्हें कट्टरपंथी बनाने में शामिल था.” सुंदरराज ने कहा, “उसकी मौत सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी सफलता है और माओवादी नेतृत्व के लिए एक बड़ा झटका है. उसके मारे जाने से प्रतिबंधित और गैरकानूनी माओवादी संगठन की पहले से ही कमजोर होती ताकत को काफी बड़ा झटका लगने की उम्मीद है.” उन्होंने कहा कि अन्य माओवादियों को तलाश करने के लिए क्षेत्र में तलाशी अभियान अभी भी जारी है. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि अभियान समाप्त होने के बाद इस संबंध में अधिक जानकारी साझा की जाएगी.

मुख्यमंत्री साय ने सुरक्षाबलों की इस सफलता पर कहा है कि राज्य में नक्सलवाद अब अंतिम सांसे गिन रहा है. साय ने सोशल मीडिया में पोस्ट कर कहा है, ”लाल आतंक का अंत हो रहा है, नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है.” उन्होंने कहा, ”सुरक्षाबल के वीर जवान कठिन चुनौतियों और दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद नक्सलवाद के खात्मे के अभियान को ऐतिहासिक सफलता की ओर ले जा रहे हैं. आज बीजापुर में डीआरजी, एसटीएफ और कोबरा बलों ने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ एक और निर्णायक प्रहार किया है. तलाशी अभियान के दौरान कुख्यात नक्सली और नक्सलवादियों का केंद्रीय समिति सदस्य गौतम उर्फ सुधाकर सहित कई नक्सलियों को मार गिराया गया है.”

साय ने लिखा है, ”21 मई 2025 को नारायणपुर में माओवादियों के राष्ट्रीय महासचिव बसवराजू के अंत के बाद, यह नक्सलियों के लिए एक और बड़ा झटका है. वर्ष 2024-25 में ही अब तक बस्तर रेंज में 400 से अधिक नक्सलियों को मार गिराया जा चुका है. यह उपलब्धि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की लौ जलाने का संकल्प है. हमारे जवानों का यह अद्वितीय साहस और बलिदान न केवल उनके कर्तव्यनिष्ठा को प्रर्दिशत करता है, बल्कि पूरे देश को एक सकारात्मक संदेश भी देता है, भारत अब नक्सलवाद की बेड़ियों से मुक्त हो रहा है.”

उन्होंने कहा है, ”माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के संकल्प के अनुरूप मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद मुक्त बनाने का लक्ष्य निश्चित रूप से पूरा होगा. सभी जवानों के शौर्य को नमन.” गौरतलब है कि 21 मई को नारायणपुर-बीजापुर जिले की सीमा पर सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में शीर्ष माओवादी नेता बसवराजू (70) और 26 अन्य नक्सली मारे गए थे. आज की कार्रवाई के साथ ही इस साल अब तक छत्तीसगढ़ में अलग-अलग मुठभेड़ों में 203 नक्सली मारे जा चुके हैं. इनमें से 186 बस्तर संभाग में मारे गए, जिसमें बीजापुर जिला भी शामिल है. पिछले वर्ष जनवरी से अब तक बस्तर संभाग में अलग-अलग मुठभेड़ों में 403 से अधिक माओवादी मारे जा चुके हैं.

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