October 15, 2026

बाबरी मस्जिद से जुड़ी पोस्ट को लेकर विधि स्नातक के खिलाफ मामला रद्द करने से न्यायालय का इनकार

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Supreme court India

नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने सोशल मीडिया पर बाबरी मस्जिद से जुड़े पोस्ट के आरोप में विधि स्नातक के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है. इस पोस्ट में कहा गया था कि बाबरी मस्जिद एक दिन फिर से बनाई जाएगी.
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि उसने पोस्ट देखी है और याचिकाकर्ता मोहम्मद फैय्याज मंसूरी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील तल्हा अब्दुल रहमान ने दलील दी कि पोस्ट में कोई अश्लीलता नहीं थी और मंसूरी ने केवल इतना कहा था कि बाबरी मस्जिद का तुर्की की मस्जिद की तरह पुर्निनर्माण किया जाएगा. उन्होंने दलील दी कि भड़काऊ पोस्ट किसी और ने किया था, लेकिन उसकी जांच नहीं की गई. न्यायमूर्ति कांत ने वकील से कहा, ”आप ऐसा ना करें कि हमें कोई कठोर टिप्पणी करनी पड़े.” अदालत के रुख को भांपते हुए वकील ने अपनी याचिका वापस लेने का अनुरोध किया जिसकी अदालत ने उन्हें अनुमति दे दी.

पीठ ने सोमवार को आदेश दिया, ”कुछ समय तक मामले पर बहस करने के बाद, याचिकाकर्ता के वकील ने इस याचिका को वापस लेने का अनुरोध किया और उन्हें इसकी अनुमति दे दी गई. तदनुसार, विशेष अनुमति याचिका को वापस लिया गया मानकर खारिज किया जाता है. यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि बचाव पक्ष की सभी दलीलों पर अधीनस्थ अदालत द्वारा उनके गुण-दोष के अनुसार विचार किया जाएगा.” मंसूरी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द करने से इनकार कर दिया गया था.

अगस्त 2020 में उसपर एक पोस्ट करने के लिए मामला दर्ज किया गया था जिसमें एक अन्य व्यक्ति ने हिंदू समुदाय के देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी. इस पोस्ट पर संज्ञान लेते हुए लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी ने उसे हिरासत में लेने का आदेश दिया था. लेकिन बाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हिरासत आदेश को रद्द कर दिया था. हालांकि, इस साल की शुरुआत में निचली अदालत ने उसके खिलाफ दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लिया था. मंसूरी ने अपने खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के लिए फिर से उच्च न्यायालय का रुख किया, लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे रद्द करने से इनकार कर दिया. इस आदेश से व्यथित होकर उसने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.

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