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अनावरण से पहले गौरेला में अजीत जोगी की प्रतिमा गायब, बाद में बरामद

गौरेला. छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला शहर के तिराहे में अनावरण के लिए रखी गई पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की आदमकद प्रतिमा को कुछ लोगों ने वहां से हटाकर अन्य स्थान पर फेंक दिया था जिसे बाद में बरामद कर लिया गया. पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी.

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने प्रतिमा को गौरेला नगर पालिका कार्यालय के परिसर से बरामद किया. पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज किया है. उन्होंने बताया कि जोगी की प्रतिमा को कुछ दिनों पहले गौरेला शहर के ज्योतिपुर चौराहे पर सड़क किनारे एक मंच पर स्थापित किया गया था. प्रतिमा का अनावरण 29 मई को जोगी की पुण्यतिथि पर किया जाना था.

अधिकारियों ने बताया कि 22 मई को गौरेला नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने मंच (प्रतिमा के लिए) बनाने वाली निर्माण कंपनी को नोटिस जारी कर जोगी की प्रतिमा को तत्काल हटाने को कहा था. गौरेला थाने के प्रभारी नवीन बोरकर ने बताया कि इलाके के सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि प्रतिमा को रात करीब 2.30 बजे मशीन का इस्तेमाल कर हटाया गया गया.

उन्होंने बताया कि इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.
अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने प्रतिमा को हटाने के लिए इस्तेमाल की गई जेसीबी मशीन का भी पता लगा लिया है तथा उसे जब्त करने के लिए एक दल भेजा गया है. मामले की जांच की जा रही है.

यह पूछे जाने पर कि क्या नगर पालिका ने प्रतिमा हटाई है, तब गौरेला की अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) ऋचा चंद्राकर ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. बाद में अधिकारियों द्वारा प्रतिमा को वापस उसी स्थान पर रखा गया, जहां उसे स्थापित किया जाना था.

निर्माणकर्ता कंपनी श्री गणेश कंस्ट्रक्शन को सीएमओ द्वारा दिए गए नोटिस में कहा गया है कि नगर पालिका परिषद गौरेला के वार्ड क्रमांक 10 में ज्योतिपुर तिराहा पर उद्यान और चबूतरा निर्माण का कार्य आपके (कंपनी) द्वारा कराया जा रहा है. नोटिस में आगे कहा गया है कि उक्त कार्य प्रगति पर है, लेकिन चबूतरे पर बिना अनुमति के प्रतिमा स्थापित कर दी गई है, जो निकाय द्वारा जारी कार्य आदेश के विरुद्ध है और लोक निर्माण विभाग की कार्य नियमावली का उल्लंघन है.

सीएमओ ने कंपनी को स्थापित प्रतिमा को तत्काल हटाकर कार्य पूरा करने और 24 घंटे के भीतर कार्य के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था. नोटिस में कहा गया है कि ऐसा न करने पर नगर पालिका द्वारा प्रतिमा हटाने की कार्रवाई की जाएगी और केंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी. घटना की जानकारी मिलने के बाद अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी अपने समर्थकों के साथ उस मंच के सामने बैठकर विरोध प्रदर्शन किया जहां प्रतिमा स्थापित की जानी थी.

अमित जोगी ने संवाददाताओं से कहा, ”जीपीएम (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) के लोग चाहते थे कि जोगी जी की प्रतिमा उनकी जन्मस्थली ज्योतिपुर में स्थापित की जाए. रात दो बजे अंधेरे में प्रतिमा को हटाकर अपवित्र कर दिया गया. यह सिर्फ प्रतिमा पर हमला नहीं है. जोगी जी भले ही हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन वे यहां हर व्यक्ति के दिल में प्रेरणा के रूप में जीवित हैं.” उन्होंने प्रतिमा हटाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और 24 घंटे के भीतर उसी स्थान पर प्रतिमा को फिर से स्थापित करने की मांग की.

नगर पालिका द्वारा दिए गए नोटिस के बारे में पूछे जाने पर अमित जोगी ने कहा, ”मुझे नोटिस के बारे में जानकारी नहीं है. लेकिन मैं दावा कर सकता हूं कि जिस जमीन पर प्रतिमा स्थापित की जा रही है, वह नगर पालिका की नहीं है. यह निजी जमीन है और इसके मालिक को इस पर कोई आपत्ति नहीं है. सबसे बड़ी बात यह है कि इससे लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं. अजीत जोगी की वजह से छत्तीसगढ़ को पूरे देश में पहचान मिली.” उन्होंने कहा कि अगर सत्तारूढ़ भाजपा नहीं चाहती कि उनकी प्रतिमा उनके पैतृक स्थान पर स्थापित की जाए तो यह उनकी संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है.

जोगी ने कहा, ”प्रतिमा को फिर से लाकर इसे पवित्र गंगा जल से शुद्ध किया गया है. जोगी जी केवल एक पार्टी के नेता नहीं थे. मैं चाहता हूं कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत, दोनों जोगी जी की प्रतिमा का अनावरण करें.” वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद अजीत जोगी 2000 से 2003 तक कांग्रेस सरकार में पहले मुख्यमंत्री बने थे. अजीत जोगी ने जून 2016 में कांग्रेस से अलग होने के बाद जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़-जोगी (जेसीसी-जे) की स्थापना की थी जिसे जोगी कांग्रेस के नाम से भी जाना जाता है. अजीत जोगी का मई, 2020 में निधन हो गया था.

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